भोपाल : भोपाल : राजधानी भोपाल में यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से सटे इलाकों की पेयजल पीने लायक नहीं है। इसका खुलासा गैस त्रासदी पीड़ित संगठनों ने पानी के सैंपलों की जांच रिपोर्ट आने के बाद की। संगठन ने खुलासा किया है कि पानी में मल के बैक्टीरिया (फीकल कोलीफॉर्म) पाए गए है। जिससे यह साफ़ होता है कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास के इलाको में सीवेज से दूषित पानी की आपूर्ति की जा रही है। जिससे लोगों के स्वास्थ पर असर पड़ सकता है।
30 बस्तियों से पेयजल के 63 नमूने की गई जांच
संगठनों के अनुसार, शहर की 30 बस्तियों से पेयजल के 63 नमूने एकत्र कर उनकी जांच कराई गई। रिपोर्ट में 43 नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मिलने का दावा किया गया है, जो पानी के मलजनित प्रदूषण की ओर संकेत करता है। उनके मुताबिक, जांच में लगभग 70 प्रतिशत नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए।
बड़ा तालाब का पानी सप्लाई 90% दूषित
दावा यह भी किया गया कि बड़ा तालाब से होने वाली जलापूर्ति के करीब 90 प्रतिशत नमूनों में प्रदूषण के संकेत मिले, जबकि कोलार डैम से सप्लाई होने वाले लगभग 25 प्रतिशत नमूनों में भी अशुद्धियां पाई गईं।
टाइफाइड जैसी बीमारियों के बढ़ सकते है मामले
संगठनों ने चेतावनी दी है कि दूषित पानी के कारण दस्त, उल्टी और टाइफाइड जैसी बीमारियों के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों का हवाला देते हुए प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और सीवर व ड्रेनेज परियोजनाओं को जल्द पूरा करने की मांग की है।