नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार चिंताजनक बना हुआ है। प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का स्टेज-2 लागू किए जाने के बावजूद दिल्ली की हवा में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 331 दर्ज किया गया है। यह स्तर 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है।
राजधानी के कई इलाकों में प्रदूषण की स्थिति और भी गंभीर हो गई है। सबसे खराब हालात जहांगीरपुरी में देखने को मिले, जहां AQI बढ़कर 449 तक पहुंच गया। वहीं रोहिणी, पंजाबी बाग, विवेक विहार और अलीपुर समेत कई क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 के पार दर्ज किया गया है।
दिल्ली के इन इलाकों में सबसे ज्यादा प्रदूषण
CPCB के जारी आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के कई क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता गंभीर स्तर पर पहुंच चुकी है। अलग-अलग इलाकों का AQI इस प्रकार दर्ज किया गया है:
इलाका AQI स्तर
जहांगीरपुरी 449
रोहिणी 429
पंजाबी बाग 424
अलीपुर 413
विवेक विहार 410
नरेला 406
बवाना 403
मुंडका 396
ITO 373
मंदिर मार्ग 368
ओखला फेज-2 352
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि दिल्ली के कई हिस्सों में प्रदूषण का स्तर बेहद खराब स्थिति में पहुंच गया है। खासतौर पर 400 से अधिक AQI वाले इलाकों में लोगों को प्रदूषित हवा के कारण स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है।
नोएडा में भी जहरीली हवा का असर, सेक्टर-62 का AQI 404
दिल्ली से सटे नोएडा में भी वायु प्रदूषण की स्थिति राहत देने वाली नहीं है। मंगलवार को नोएडा के सेक्टर-62 में AQI 404 रिकॉर्ड किया गया, जो गंभीर श्रेणी में आता है।
नोएडा के अन्य क्षेत्रों में भी प्रदूषण का स्तर ऊंचा बना हुआ है। सेक्टर-39 में AQI 365, सेक्टर-150 में 343 और सेक्टर-116 में 272 दर्ज किया गया। इससे साफ है कि दिल्ली के साथ-साथ एनसीआर के दूसरे शहर भी खराब वायु गुणवत्ता की समस्या से जूझ रहे हैं।
कितना AQI होने पर हवा मानी जाती है खराब?
वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के जरिए हवा में मौजूद प्रदूषकों के स्तर और उसके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों का आकलन किया जाता है। AQI की अलग-अलग श्रेणियां इस प्रकार हैं:
0 से 50: अच्छा
51 से 100: संतोषजनक
101 से 200: मध्यम
201 से 300: खराब
301 से 400: बहुत खराब
401 से 500: गंभीर
इस पैमाने के अनुसार दिल्ली का औसत AQI 331 होने के कारण राजधानी की हवा बहुत खराब श्रेणी में बनी हुई है, जबकि जहांगीरपुरी जैसे इलाकों में स्थिति गंभीर स्तर तक पहुंच चुकी है।
GRAP Stage-2 में प्रदूषण रोकने के लिए क्या-क्या होंगे उपाय?
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए GRAP के दूसरे चरण के तहत सरकारी एजेंसियों को अतिरिक्त कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य सड़कों की धूल, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन और निर्माण गतिविधियों से फैलने वाले प्रदूषण पर लगाम लगाना है।
इसके तहत प्रमुख उपायों में शामिल हैं:
सड़कों की नियमित सफाई के लिए मैकेनिकल और वैक्यूम स्वीपिंग की व्यवस्था की जाएगी।
धूल को नियंत्रित करने के लिए पानी और डस्ट सप्रेसेंट का छिड़काव किया जाएगा।
प्रदूषण के हॉटस्पॉट वाले क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाए जाएंगे।
निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण से जुड़े नियमों की निगरानी और निरीक्षण बढ़ाया जाएगा।
निजी वाहनों का इस्तेमाल घटाने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाने जैसे कदम उठाए जाएंगे।
लोगों को निजी गाड़ियों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
जिन कार्यालयों में काम की प्रकृति अनुमति देती है, वहां वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने की सलाह दी गई है।
कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर लागू प्रतिबंधों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।
दिल्ली-NCR में प्रदूषण से कब मिलेगी राहत?
GRAP-2 लागू होने के बाद भी दिल्ली और नोएडा के कई इलाकों में AQI का गंभीर स्तर पर पहुंचना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सरकारी एजेंसियों के साथ आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल, निजी वाहनों में कमी और प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन हवा की गुणवत्ता सुधारने में अहम भूमिका निभा सकता है।