दिल्ली-NCR में प्रदूषण का स्तर एक बार फिर चिंता बढ़ाने लगा है। राजधानी की हवा लगातार खराब होती जा रही है और लोगों को जहरीली हवा के बीच सांस लेने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार, 3 नवंबर को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 324 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। 31 अक्टूबर को दिल्ली का AQI 117 था। ऐसे में कुछ ही दिनों में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा है।
इस बीच पड़ोसी देश पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पराली जलाने की घटनाओं ने भी चिंता बढ़ा दी है। उपलब्ध सैटेलाइट आंकड़ों के मुताबिक, 1 से 29 अक्टूबर 2026 के बीच पाकिस्तान के पंजाब में 13,241 फायर स्पॉट दर्ज किए गए, जबकि भारतीय पंजाब में इनकी संख्या 3,158 रही। यानी पाकिस्तान के पंजाब में भारतीय पंजाब के मुकाबले करीब 4.2 गुना अधिक फायर स्पॉट सामने आए।
पाकिस्तान से दिल्ली तक पहुंच सकता है धुआं?
उत्तर-पश्चिमी हवाओं के कारण पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र में लगी आग का धुआं दिल्ली-NCR की ओर पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इसका वास्तविक असर हवा की दिशा, गति और मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। हर सैटेलाइट फायर स्पॉट को पराली जलाने की घटना मानना भी सही नहीं है और न ही यह जरूरी है कि हर जगह का धुआं दिल्ली तक पहुंचे।
आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर के आखिरी सात दिनों में पाकिस्तान के पंजाब में 6,655 फायर स्पॉट दर्ज हुए। 29 अक्टूबर को यह संख्या बढ़कर 1,327 तक पहुंच गई। पाकिस्तान के ओकारा, गुजरांवाला और ननकाना साहिब जिलों में सबसे ज्यादा फायर स्पॉट सामने आए।
5 नवंबर तक बेहद खराब रह सकती है दिल्ली की हवा
मौसम और प्रदूषण से जुड़े पूर्वानुमानों के मुताबिक, दिल्ली की हवा 5 नवंबर तक बेहद खराब श्रेणी में रह सकती है। अनुमान है कि प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान 3 नवंबर को करीब 8.5 प्रतिशत से बढ़कर 5 नवंबर तक 22 प्रतिशत हो सकता है।
हालांकि, दिल्ली की खराब हवा के पीछे केवल पराली जलाना ही जिम्मेदार नहीं है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन, कचरा जलाना और मौसम की परिस्थितियां भी प्रदूषण बढ़ाने में भूमिका निभाती हैं।
प्रदूषण से बचने के लिए बरतें सावधानी
विशेषज्ञों के अनुसार, हवा में मौजूद PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण फेफड़ों तक पहुंचकर स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। प्रदूषण बढ़ने पर लोगों को खुले में व्यायाम करने से बचना चाहिए। जरूरत पड़ने पर N95 मास्क का इस्तेमाल करें और बच्चों, बुजुर्गों तथा सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों का विशेष ध्यान रखें।