Bhopal Law and Order: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द को बिगड़ने से रोकने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। सोशल मीडिया पर लगातार बढ़ रहे विवादों और ट्विटर-फेसबुक वॉर से पैदा होने वाले खतरों को देखते हुए भोपाल में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किसी भी तरह की धार्मिक वैमनस्यता या नफरत फैलाने वाली गतिविधियों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
साइबर सेल और पुलिस की पैनी नजर
इस नए प्रतिबंधात्मक आदेश के लागू होने के बाद, पुलिस की स्पेशल साइबर विंग भोपाल के सोशल मीडिया यूज़र्स की गतिविधियों पर 24 घंटे नजर रख रही है। इसके तहत यदि किसी पोस्ट, मीम या वीडियो से किसी भी धर्म या समुदाय की भावनाएं आहत होती हैं, तो ग्रुप एडमिन और पोस्ट करने वाले पर सीधा मुकदमा दर्ज होगा। महिलाओं या किसी समुदाय विशेष के खिलाफ की गई अभद्र, अश्लील या नफरत से भरी टिप्पणियों पर भी सख्त कानूनी एक्शन लिया जाएगा।
आदेश क्यों जारी करना पड़ा?
प्रशासन द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया पर होने वाले विवाद केवल इंटरनेट तक सीमित नहीं रहते। कई बार सोशल मीडिया पर शुरू हुआ डिजिटल विवाद जमीनी स्तर पर दंगे या हिंसक झड़प का रूप ले लेता है, जिससे शहर की लोक शांति भंग होती है। भोपाल जैसे संवेदनशील और ऐतिहासिक शहर में भाईचारा और धार्मिक सौहार्द बनाए रखने के लिए यह एहतियाती कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया था।
भूलकर भी न करें ये गलतियां
भोपाल पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी असत्यापित या भड़काऊ मैसेज को न तो लाइक करें, न कमेंट करें और न ही आगे फॉरवर्ड करें। किसी भी ग्रुप में ऐसी पोस्ट आने पर तुरंत उसकी सूचना पुलिस को दें। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर धारा 163 के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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