मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति से बुधवार सुबह एक बेहद दुखद खबर सामने आई। राज्य के उपमुख्यमंत्री और ‘प्रशासन के मास्टर’ कहे जाने वाले अजित पवार का 28 जनवरी 2026 को विमान हादसे में निधन हो गया। बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान उनके चार्टर्ड विमान में तकनीकी खराबी आ गई, जिसके बाद विमान क्रैश हो गया। इस हादसे में अजित पवार समेत कुल 5 लोगों की मौत हो गई।
तीन दिन का शोक घोषित:
66 वर्षीय अजित पवार के निधन से पूरे महाराष्ट्र और देश की राजनीति में शोक की लहर है। वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि उनका निधन बेहद दुखद है. अजित दादा भाई पवार जमीन से जुड़े हुए नेता थे. उनके परिवार में अभी शोक का माहौल है. वे हमारे दिलदार और दमदार मित्र थे. यह एक राज्य के लिए भी कठिन दिन है. इस घटना को लेकरप्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने भी हमसे चर्चा की है. सीएम फडणवीस ने आगे लिखा महाराष्ट्र में तीन दिन का तक राज्यकीय शोक घोषित किया है, इसकी जानकारी उन्होंने अपने सोशल मिडिया पर पोस्ट की है जिसने लिखा ''राज्य में हमने तीन दिन का शोक घोषित किया है।"
Ajit Pawar Political Career: चुनावी राजनीति में अजेय ‘दादा’
अजित पवार का राजनीतिक करियर असाधारण रहा। उन्होंने अपने जीवन में विधानसभा का एक भी चुनाव नहीं हारा।1991: बारामती लोकसभा सीट से पहला चुनाव जीतकर संसद पहुंचे, शरद पवार के केंद्रीय मंत्री बनने पर सीट छोड़ी और राज्य राजनीति में वापसी की। 1991 से 2024 तक: बारामती से 8 बार विधायक निर्वाचित हुए, 2024 विधानसभा चुनाव: भतीजे युगेंद्र पवार को 1 लाख से अधिक मतों से हराया। वे महाराष्ट्र के 6 बार उपमुख्यमंत्री रहे और वित्त, सिंचाई, जल संसाधन, योजना और ऊर्जा जैसे अहम विभाग संभाले।
परिवार और निजी जीवन, सुनेत्रा पवार से बेटों तक:
अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं। वे महाराष्ट्र के दिग्गज नेता और पूर्व गृह मंत्री पदमसिंह पाटिल की बहन हैं। 2024 लोकसभा चुनाव: सुप्रिया सुले से मुकाबला हार गए, जून 2024 में निर्विरोध राज्यसभा सांसद बनीं, बेटे पार्थ पवार 2019 मावल लोकसभा चुनाव में हार, फिलहाल सामाजिक और व्यावसायिक गतिविधियों में सक्रिय हैं, जय पवार परिवार का व्यवसाय और कृषि कार्य संभालते हैं, दिसंबर 2025 में ऋतुजा पाटिल से विवाह हुआ, प्रशासन का मास्टर: 16 घंटे काम और ‘नो फाइल पेंडिंग’ नीति, अजित पवार की पहचान एक सख्त, तेज और परिणाम देने वाले प्रशासक के रूप में थी। वे रोजाना 16–17 घंटे काम करते थे और उनका स्पष्ट आदेश था। “कोई भी फाइल अगले दिन के लिए लंबित नहीं रहेगी।” अधिकारियों के बीच उनकी पकड़ और फाइलों पर गहरी नजर के किस्से मंत्रालयों में मशहूर थे।
अंधविश्वास से दूर, कर्म में विश्वास:
अजित पवार किसी भी तरह के अंधविश्वास में यकीन नहीं रखते थे।न अंगूठी, न रत्न, न कलावा, न ज्योतिष उनका मानना था“मेहनत और निर्णय ही असली भाग्य हैं।”
फिल्मी पृष्ठभूमि और अधूरे सपने:
बहुत कम लोग जानते हैं कि उनके पिता अनंतराव पवार, फिल्म निर्देशक वी. शांताराम के साथ राजकमल स्टूडियो से जुड़े थे। कहा जाता है कि यदि पिता का जल्दी निधन न हुआ होता, तो अजित पवार शायद फिल्म निर्माण की दुनिया में होते।
खेल और शिक्षा से गहरा जुड़ाव:
अजित पवार खो-खो, कबड्डी और क्रिकेट के शौकीन थे। वे मानते थे कि राजनीति में तेज निर्णय लेने की क्षमता उन्हें खेलों से मिली। विद्या प्रतिष्ठान जैसी संस्थाओं के माध्यम से उन्होंने बारामती को शिक्षा का बड़ा केंद्र बनाया। गरीब छात्रों की फीस चुपचाप अपनी जेब से भरना उनकी खास पहचान थी।
Ajit Pawar Legacy बारामती का ‘दादा’ हमेशा जिंदा रहेगा:
अजित पवार अपने पीछे विकास, सहकारिता और प्रशासनिक सख्ती की एक मजबूत विरासत छोड़ गए हैं। पिंपरी-चिंचवाड़, पुणे और बारामती के विकास में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही। अब यह जिम्मेदारी उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार और बेटे पार्थ पवार पर होगी कि वे इस राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाएं। महाराष्ट्र ने आज सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि एक युग खो दिया है।