दिनेश निगम ‘त्यागी’ : प्रदेश में अब तक राज्य मंत्रिमंडल में प्रस्तावित फेरबदल नहीं हो सका बावजूद इसके दो मंत्रियों की रवानगी तय बताई जा रही है। ये मंत्री उस वर्ग से आते हैं, जिनके खिलाफ कार्रवाई से भाजपा नेतृत्व बचता और डरता है। इनमें एक हैं दलित वर्ग की प्रतिमा बागरी और दूसरे आदिवासी वर्ग के विजय शाह। बागरी के कारण सरकार और संगठन की पहले ही काफी किरकिरी हो चुकी है और शाह को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणी के कारण सरकार फंस गई है। कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शाह की माफी अस्वीकार कर दी है और सरकार को निर्देश दिया है कि वह उनके खिलाफ प्रकरण चलाने को लेकर दो हफ्ते में फैसला ले।
राज्य सरकार इस मसले पर कानूनी राय ले रही है। पर अब तक के कोर्ट के रुख को देखकर नहीं लगता कि शाह के मसले पर वह कोई दलील सुनने वाली है। भाजपा नेतृत्व ऐसे मसलों को ठंडा कर निबटाता है। इसीलिए प्रतिमा बागरी और अमित शाह को मंत्रिमंडल से बाहर करने का निर्णय लगभग ले लिया गया है। इनके स्थान पर दलित-आदिवासी वर्ग के ही विधायकों को जगह दी जाएगी। संगठन के अंदर वैकल्पिक नामों पर विचार भी चल रहा है। मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान ही यह होगा ताकि कार्रवाई हो जाए और दलित-आदिवासी वर्ग में भाजपा के खिलाफ मैसेज भी न जाए।
गोपाल को ऐसे मिली बाल-गोपालों के इलाज की प्रेरणा....
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव वैसे तो कई साल से अपने खर्च पर बीमार लोगों का इलाज कराते आ रहे हैं लेकिन अब उन्होंने अपने भोपाल स्थित बंगले में बच्चों के लिए जो पहल की है, इसे लेकर वे चर्चा में हैं। इसकी प्रेरणा उन्हें परिवार में आई एक विपत्ति से ही मिली। भार्गव के बेटे अभिषेक भार्गव के यहां बिटिया हुई थी, उसके हृदय में छेद था। डॉक्टरों ने कहा था कि इसका ज्यादा दिन तक जीवित रहना मुश्किल है, लेकिन भार्गव परिवार ने हार नहीं मानी। दिल्ली में उसका इलाज कराया। किस्मत से बिटिया स्वस्थ हो गई। इसके बाद परिवार में चर्चा हुई और उन बच्चों के इलाज कराने का निर्णय लिया गया जो ऐसी बीमारी लेकर पैदा होते हैं और समुचित इलाज के अभाव में जिंदगी पूरी नहीं कर पाते।
इसके बाद गोपाल की नातिन वेदिका के नाम पर वेदिका फाउंडेशन का गठन हुआ और बाल-गोपालों के इलाज का सिलसिला शुरू हुआ। एक साल में ही गंभीर किस्म के चार बच्चों का सफल इलाज हो चुका है। बच्चे बाहर जाकर परेशान न हो इसलिए भार्गव ने बंगले के एक कमरे को खेल खिलौने के साथ सुसज्जित कराया। दूसरों का दर्द अपने जैसा महसूस करने के कारण ही यह नेक कार्य संभव हो सका। इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने किया और कहा कि अन्य विधायकों को भी भार्गव की इस पहल से प्रेरणा लेना चाहिए।
अब यहां भाजपा की मुसीबत बना अपनों का विवाद....
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ के गढ़ को भेदने में भाजपा नेतृत्व को बड़े पापड़ बेलने पड़े हैं। नतीजे में लोकसभा चुनाव में नकुलनाथ को पराजय का सामना करना पड़ा और भाजपा के बंटी साहू ने जीत दर्ज की। इतना ही नहीं लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने कमलनाथ के विश्वसनीय आदिवासी विधायक कमलेश शाह को तोड़ने में कामयाबी हासिल कर ली थी। यह बात अलग है कि उप चुनाव में जीत के बावजूद भाजपा शाह को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं कर सकी। भाजपा की इस कामयाबी पर पार्टी के अपने ही ग्रहण लगा रहे हैं। जिलाध्यक्ष शेषराज यादव और सांसद बंटी साहू के बीच विवाद पार्टी के लिए मुसीबत बन गया है।
प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इस विवाद को सागर के भूपेंद्र सिंह-गोविंद राजपूत की तर्ज पर निबटाने की कोशिश की है। खंडेलवाल और प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा ने दोनों को भोपाल स्थित पार्टी कार्यालय में तलब किया। साथ बैठाकर बातचीत कराई गई और पार्टी की एकता बनाए रखने का सख्त अल्टीमेटम दिया गया। बता दें, सांसद साहू और जिलाध्यक्ष यादव के बीच मतभेद खुलकर सामने आ चुके हैं। जिलाध्यक्ष की बैठकों में सांसद शामिल नहीं हो रहे, जबकि यादव सांसद के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। यह विवाद जिला कार्यकारिणी गठन, पदों के बंटवारे और संगठनात्मक फैसलों को लेकर गहरा गया था।
मुख्य सचिव, सरकार पर भारी पड़ गए ये तीखे तेवर....
प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कलेक्टर-कांफ्रेंस बैठक की समीक्षा के दौरान क्या कहा, यह वे खुद और सुनने वाले अफसर ही बता सकते हैं लेकिन जो खबर सुर्खिंयों में आई, उससे सरकार की किरकिरी हो गई। कांग्रेस को भी सरकार पर हमला करने का अवसर मिल गया। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के साथ समूची कांग्रेस ने जैन के बयान के आधार पर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। बैठक में मुख्य सचिव के तेवर तीखे थे, वे उनके साथ सरकार पर भारी पड़ गए। उन्होंने कहा था कि उन्हें, मुख्यमंत्री, यहां तक कि पीएमओ को भी कलेक्टरों की हर एक्टिविटी की जानकारी है।
कलेक्टरों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायते हैं। जैन ने हिदायत दी कि वे अपने आचरण संयमित रखें और किसी तरह की शिकायत की स्थिति न आने दें। प्रचार ऐसा हो गया कि मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव से कहा था कि प्रदेश का कोई कलेक्टर बिना रिश्वत लिए काम नहीं करता और उन्होंने यह बात कलेक्टरों से कह दी। भला सरकार का प्रशासनिक मुखिया यह बात कैसे कह सकता है? पर मार्केट में यह बात फैल गई। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री के विर्देश दौरे के दौरान यह बैठक हो रही थी। इसे लेकर डैमेज कंट्रोल की कोशिश की गई लेकिन तीर कमान से निकल चुका था। लिहाजा, कोई खास फायदा नहीं हुआ। अब कांग्रेस ने भ्रष्टाचार को लेकर सरकार के खिलाफ अभियान चला रखा है।
महू में भी जहरीले पानी ने खाेली व्यवस्थाओं की पोल....
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी के शिकार लोगों की मौत का सिलसिला अभी थमा भी नहीं और इसी जिले के महू से जहरीले पानी से तबाही की खबर आ गई। भागीरथपुरा में दूषित पानी से अब तक 28 मौतें हो चुकी हैं। इसे लेकर भाजपा की राष्ट्रीय स्तर पर किरकिरी हुई है। इसलिए भी क्योंकि इंदौर स्वच्छता के मामले में कई साल से पहले पुरष्कार जीत रहा है। देश भर में इस आवार्ड की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं। हाईकोर्ट की इंदौर पीठ में इसे लेकर सुनवाई चल रही है। नगर निगम संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहा है। इंदौर में साफ पेयजल उपलब्ध कराने की जीतोड़ कोशिश हो रही है। दर्जनों टीमें पानी की जांच कर उसे शुद्ध करने में लगी हैं।
इन सारे प्रयासाें पर तब प्रश्नचिंह खड़े हो गए जब इंदौर जिले के ही महू में दूषित पानी से लोगों के अस्पताल पहुंचने का सिलसिला प्रारंभ हो गया। पहले ही दिन 6 बच्चों समेत 25 लोग मध्य भारत अस्पताल में भर्ती हो गए। प्राथमिक जांच में पता चला है कि अधिकांश लोगों को पीलिया हुआ है। इसके पीछे की वजह दूषित पानी की सप्लाई को ही बताया जा रहा है। महू अब अंबेडकर नगर के नाम से जाना जाता है। यह कस्बा बाबा साहब डॉ भीमराव आंबेडकर की जन्मस्थली होने के कारण चर्चा में रहता है। हालात देख कर लगता है कि यहां भी लोगों को साफ पेयजल नहीं मिल पा रहा है।