महाराष्ट्र की राजनीति में सोमवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह सांसदों ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का साथ स्वीकार कर लिया। सांसदों ने औपचारिक रूप से अपना समर्थन पत्र लोकसभा अध्यक्ष को सौंपते हुए नए राजनीतिक पाले में जाने का फैसला किया। इस कदम को राज्य की राजनीति और संसद में शक्ति संतुलन बदलने वाली घटना माना जा रहा है।
शिंदे खेमे को मिली बड़ी मजबूती
पार्टी में शामिल होने वाले सांसदों में ओमराजे निंबालकर, नागेश पाटिल आष्टिकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल और भाऊसाहेब वाकचौरे का नाम शामिल है। मुंबई में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एकनाथ शिंदे और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में इन नेताओं का स्वागत किया गया। इस घटनाक्रम के बाद लोकसभा में शिंदे गुट की संख्या बढ़कर 13 तक पहुंच गई है, जिससे उनकी राजनीतिक स्थिति और मजबूत हुई है।
प्रताप सरनाइक ने साधा विपक्ष पर निशाना
मंत्री प्रताप सरनाइक ने सांसदों के शामिल होने पर खुशी जताते हुए कहा कि पार्टी का विस्तार लगातार जारी है। उन्होंने विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए दावा किया कि कई जनप्रतिनिधि वर्तमान नेतृत्व से असंतुष्ट हैं और इसी कारण शिंदे गुट की ओर रुख कर रहे हैं। उन्होंने इसे पार्टी की नीतियों और नेतृत्व पर बढ़ते विश्वास का परिणाम बताया।
आदित्य ठाकरे ने फैसले की आलोचना की
दूसरी ओर, शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने सांसदों के इस कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि जनादेश के आधार पर चुने गए प्रतिनिधियों ने मतदाताओं के भरोसे को ठेस पहुंचाई है। आदित्य ठाकरे ने कहा कि विपक्षी दलों को कमजोर करने की कोशिशें लगातार जारी हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
सियासी बयानबाजी हुई तेज
छह सांसदों के दल बदलने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। एक तरफ शिंदे गुट इसे अपनी बढ़ती राजनीतिक स्वीकार्यता का संकेत बता रहा है, तो दूसरी ओर उद्धव ठाकरे गुट इसे जनादेश के खिलाफ कदम करार दे रहा है। आने वाले समय में इस घटनाक्रम का असर राज्य की राजनीति पर और अधिक देखने को मिल सकता है।