छत्तीसगढ़ की सीतापुर विधानसभा सीट से विधायक रामकुमार टोप्पो को जाति प्रमाण पत्र विवाद में बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित रायगढ़ जिला प्रशासन की जांच समिति ने करीब ढाई वर्ष तक चली जांच पूरी करने के बाद अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। समिति ने जांच में शिकायतकर्ताओं के आरोपों को प्रमाणित करने योग्य साक्ष्य नहीं मिलने की बात कहते हुए मामले को निराधार माना और विधायक को क्लीन चिट दे दी।
चुनाव याचिका के बाद शुरू हुई थी जांच
यह मामला वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान दायर एक चुनाव याचिका के बाद सामने आया था। याचिका में विधायक रामकुमार टोप्पो के जाति प्रमाण पत्र पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर रायगढ़ जिला प्रशासन ने जांच समिति का गठन किया और पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू की गई।
आरोपों के समर्थन में नहीं मिले पर्याप्त साक्ष्य
जांच समिति ने सभी पक्षों से दस्तावेज और आवश्यक जानकारी जुटाने के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार की। रिपोर्ट में कहा गया कि शिकायतकर्ताओं की ओर से लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेजी या प्रमाणिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसी आधार पर समिति ने शिकायत को निराधार मानते हुए प्रकरण का निराकरण कर दिया।
जांच में विधायक रामकुमार टोप्पो के जाति प्रमाण पत्र को वैध माना गया है।
रामकुमार टोप्पो बोले- सच्चाई की जीत हुई
रिपोर्ट सामने आने के बाद विधायक रामकुमार टोप्पो ने कहा कि उन्होंने जांच प्रक्रिया में प्रशासन का पूरा सहयोग किया। उन्हें शुरू से विश्वास था कि जांच में सच्चाई सामने आएगी।
उन्होंने कहा कि "दूध का दूध और पानी का पानी हो गया।" साथ ही आरोप लगाया कि राजनीतिक कारणों से उनके खिलाफ यह विवाद खड़ा किया गया था, लेकिन जांच ने सभी तथ्यों को स्पष्ट कर दिया।
समर्थकों में खुशी, आगे न्यायिक विकल्प खुले
जांच रिपोर्ट आने के बाद विधायक के समर्थकों ने इसे सत्य की जीत बताया है। उनका कहना है कि राजनीतिक विरोध के चलते शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन निष्पक्ष जांच में आरोप साबित नहीं हो सके।
हालांकि, यदि कोई पक्ष जांच समिति की रिपोर्ट से असहमत होता है, तो वह कानून के तहत न्यायालय में इसे चुनौती दे सकता है। ऐसे में मामले की आगे की प्रक्रिया न्यायिक निर्णय पर निर्भर करेगी।