Middle East Conflict: मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के बीच इराक ऐसी स्थिति में पहुंच गया है, जहां उसे दोनों तरफ से हमलों का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर ईरान समर्थित मिलिशिया समूह अमेरिकी सैन्य ठिकानों और हितों को निशाना बना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका जवाबी कार्रवाई में इराक के भीतर मौजूद मिलिशिया ठिकानों पर एयरस्ट्राइक कर रहा है। लगातार बढ़ते इन हमलों से इराक की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता पर गंभीर संकट मंडराने लगा है।
ईरान पर हमले के बाद बढ़ा क्षेत्रीय तनाव:
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले शुरू किए जाने के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव तेजी से बढ़ गया। इसके बाद ईरान और उससे जुड़े संगठनों ने कई क्षेत्रों में जवाबी हमले शुरू कर दिए। इस टकराव का असर अब इराक में साफ दिखाई दे रहा है। युद्ध शुरू होने के बाद से इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों, दूतावासों और ऊर्जा ढांचों को बार-बार निशाना बनाया जा रहा है। राजधानी बगदाद और उत्तरी शहर इरबिल के एयरपोर्ट के आसपास भी ड्रोन और मिसाइल हमलों की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
इरबिल में रोज ड्रोन हमलों की कोशिश:
उत्तरी इराक के कुर्द क्षेत्र की राजधानी इरबिल में लगभग हर दिन ड्रोन हमलों की कोशिशें देखी जा रही हैं। यहां अमेरिकी सैन्य ठिकानों के अलावा व्यावसायिक इलाकों और कुछ होटलों को भी निशाना बनाने की कोशिश की गई। स्थानीय मीडिया के मुताबिक कई बार लोग कैफे और बाजारों में बैठे होते हैं और अचानक आसमान में ड्रोन की आवाज सुनाई देती है, जिसके बाद जोरदार धमाके और धुएं का गुबार दिखाई देता है। इससे इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है।
अमेरिका की जवाबी एयरस्ट्राइक:
इन हमलों के जवाब में अमेरिका ने भी कार्रवाई तेज कर दी है। अमेरिकी सेना ने इराक के कई क्षेत्रों में ईरान समर्थित मिलिशिया ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। इनमें प्रमुख रूप से बगदाद के दक्षिण का जुरफ अल-सखर क्षेत्र उत्तरी इराक के कुछ इलाके इराक-सीरिया सीमा के पास अल-काइम क्षेत्र शामिल हैं। इराक की सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि उसके भीतर एक ओर ईरान समर्थित सशस्त्र समूह सक्रिय हैं, जबकि दूसरी ओर देश में अमेरिका के सैन्य ठिकाने और कूटनीतिक हित भी मौजूद हैं। ऐसे में इराक इस पूरे संघर्ष का केंद्र बनता जा रहा है।
तेल निर्यात पर संकट, अर्थव्यवस्था पर खतरा:
इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर इराक की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है, क्योंकि देश की आय का मुख्य स्रोत तेल निर्यात है। खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने और ऊर्जा ढांचों पर हमलों के कारण तेल निर्यात लगभग ठप हो गया है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक जारी रहती है तो इराक सरकार के सामने बड़ा वित्तीय संकट खड़ा हो सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार कुर्द अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर तेल निर्यात जल्द शुरू नहीं हुआ तो सरकारी कर्मचारियों के वेतन देने में भी मुश्किल हो सकती है।
कुर्द क्षेत्र की पाइपलाइन से निर्यात शुरू करने की कोशिश:
स्थिति को संभालने के लिए बगदाद सरकार ने उत्तरी कुर्द क्षेत्र से तुर्की तक जाने वाली पाइपलाइन के जरिए तेल निर्यात फिर से शुरू करने की अपील की है। यह पाइपलाइन किर्कुक के तेल क्षेत्रों से तुर्की के जेहान बंदरगाह तक जाती है। सरकार चाहती है कि रोजाना कम से कम 2.5 लाख बैरल तेल इस रास्ते से निर्यात किया जाए। हालांकि इस मुद्दे पर कुर्द नेतृत्व और केंद्र सरकार के बीच बातचीत अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है।
मिलिशिया और अमेरिकी सेना के बीच रोजाना झड़प:
इस बीच एक और समानांतर संघर्ष भी जारी है। ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया समूहों और अमेरिकी सेना के बीच लगभग रोजाना झड़पें हो रही हैं। ड्रोन और रॉकेट हमलों से अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि अमेरिका जवाबी हमले कर रहा है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका उत्तरी इराक के कुर्द संगठनों को समर्थन देने पर विचार कर रहा है ताकि ईरान पर दबाव बनाया जा सके। कुर्द नेताओं ने संकेत दिया है कि यदि उन्हें अमेरिकी समर्थन मिला तो वे ईरान के भीतर भी कार्रवाई कर सकते हैं।
राजनीतिक अस्थिरता भी बढ़ा रही संकट:
इराक इस समय राजनीतिक रूप से भी कमजोर स्थिति में है। देश में फिलहाल एक अंतरिम सरकार काम कर रही है। अमेरिका ने पूर्व प्रधानमंत्री नूरी अल-मलिकी के नामांकन का विरोध किया था, जिसके बाद नई सरकार का गठन नहीं हो पाया। मौजूदा कार्यवाहक प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी के पास मिलिशिया समूहों को नियंत्रित करने की सीमित शक्तियां हैं। ऐसे में सुरक्षा स्थिति को संभालना और भी मुश्किल हो गया है।
विशेषज्ञों की चेतावनी:
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है तो इराक के लिए हालात और गंभीर हो सकते हैं। आर्थिक झटका, राजनीतिक अस्थिरता और मिलिशिया गतिविधियों में बढ़ोतरी मिलकर देश की उस स्थिरता को भी खतरे में डाल सकती हैं, जिसे इराक ने पिछले कई वर्षों में बड़ी मुश्किल से हासिल किया था।