Mark Carney आज दोपहर 3:15 बजे मुंबई पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद यह उनकी पहली आधिकारिक भारत यात्रा है। दो दिवसीय मुंबई प्रवास के दौरान उनका पूरा ध्यान भारत-कनाडा आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने पर रहेगा। कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, कार्नी भारत के लिए पहले ही रवाना हो चुके थे और यह दौरा रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। भारत सरकार ने भी इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए अहम बताया है।
उद्योगपतियों और वित्तीय क्षेत्र के दिग्गजों से मुलाकात:
मुंबई में अपने कार्यक्रमों के तहत मार्क कार्नी भारत और कनाडा के प्रमुख उद्योगपतियों, बैंकिंग सेक्टर के वरिष्ठ अधिकारियों, टेक्नोलॉजी इनोवेटर्स और शिक्षाविदों से मुलाकात करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, भारत में निवेश कर रहे कनाडाई पेंशन फंड के प्रतिनिधियों के साथ भी उनकी विशेष बैठक तय है। यह संकेत देता है कि इस यात्रा का प्रमुख एजेंडा व्यापार, निवेश और वित्तीय सहयोग को बढ़ावा देना है।
1 मार्च को नई दिल्ली रवाना, 2 मार्च को होगी अहम बैठक:
मुंबई कार्यक्रमों के बाद कार्नी 1 मार्च को नई दिल्ली पहुंचेंगे। 2 मार्च को हैदराबाद हाउस में उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री Narendra Modi से होगी। दोनों नेताओं के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में जून 2025 (कनानास्कििस) और नवंबर 2025 (जोहान्सबर्ग) में हुई पिछली बैठकों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
इन अहम मुद्दों पर होगी चर्चा:
विदेश मंत्रालय के अनुसार, वार्ता का एजेंडा व्यापक होगा। मुख्य मुद्दे जिसमें द्विपक्षीय व्यापार और निवेश, ऊर्जा सहयोग, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), कृषि और फूड सिक्योरिटी, शिक्षा एवं रिसर्च पार्टनरशिप, वैश्विक और क्षेत्रीय भू-राजनीतिक हालात हैं, इसके अलावा दोनों प्रधानमंत्री ‘भारत-कनाडा सीईओ फोरम’ में भी भाग लेंगे, जहां निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाने पर जोर रहेगा।
क्यों अहम है यह दौरा?
भारत और कनाडा के संबंध हाल के वर्षों में कई उतार-चढ़ाव से गुजरे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री स्तर की यह मुलाकात रिश्तों को नई ऊर्जा देने और आर्थिक सहयोग को केंद्र में रखने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश, ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में साझेदारी दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। मार्क कार्नी की यह भारत यात्रा केवल औपचारिक कूटनीतिक दौरा नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नए स्तर पर ले जाने की पहल है। अब सबकी निगाहें 2 मार्च को होने वाली मोदी-कार्नी वार्ता पर टिकी हैं, जहां भविष्य की दिशा तय हो सकती है।