तेंदूखेड़ा: मप्र का बुंदेलखंड इलाका अपनी प्राचीन संस्कृति और सभ्यता के लिए अभी भी अग्रसर है.यहां हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक मास में इस धरती के पालनहार भगवान विष्णु मत्स्य के रूप में जल में निवास करते हैं. ऐसे में कार्तिक महीने में सूर्योदय से पहले उठकर किसी पवित्र नदी,तालाब में स्नान करना बहुत ही शुभ फलदायी माना जाता है.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है और उसके सभी पाप धुल जाते हैं.इसीलिए इस महीने में घर की स्त्रियां सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र नदी में स्नान करती है, इससे भक्तों के सारे पाप धुल जाते हैं और मोक्ष जाने का रास्ता साफ हो जाता है.
जगह जगह की गई माता तुलसी की पूजा....
नगर के वार्ड नं 11 में स्थित पंचवटी मन्दिर परिसर में नगर की तमाम महिलाएं इकट्ठा हुई और जगत के पालनहार भगवान विष्णु के संघ माता तुलसी की पूजा कर उन्हें भोग लगाया ये सभी महिलाएं तेंदूखेड़ा नगर की गुरिया नदी में प्रातः काल स्नान करने जाती है.नदी के तट पर मौजूद माँ बड़ी खेरमाता के दर्शन कर जल चढ़ाती जिसके बाद ही इन महिलाओं के दिन की शुरुआत होती है.
पंडित कमलेश मिश्रा के अनुसार कार्तिक माह में तुलसी माता का पूजन किया जाए जलाशय जो है, नदी जो है इनमें मौजूद जल का उपयोग सोच समझकर करना चाहिए. वृक्ष कबहुं न¨ह फल भखैं, नदी न संचै नीर, परमारथ के कारने साधुन धरा शरीर। ' कबीर का यह दोहा हमें परोपकार की भावना का संदेश देता है.वृक्ष लगाने मात्र से ही वह हमारे पालनहार बन जाते हैं. इनके अंदर छिपे तमाम गुण हमें तमाम रोगों की औषधि तो देते ही हैं, साथ ही हमें प्राणवायु भी इन्हीं से मिलती है.
सरोवर,नदियों के तटों पर कार्तिक मास में इसलिए स्नान करना चाहिए नदियों में सभी जगह का जल होता है जिस वजह से इन्हें पवित्र माना गया है. समस्त तीर्थ स्थलों का पुण्य अर्जित करने के लिए माताएं,बहने,गोपी और सखियां कृष्ण जी को पाने के लिए सूर्योदय से पहले प्रातः काल उठकर जलाशय में स्नान करती है.