Iran Israel War Update: तेहरान। मिडिल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से दोनों पक्षों के बीच हमले और जवाबी कार्रवाई तेज हो गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बनते नजर आ रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में इजरायल ने ईरान के महत्वपूर्ण तेल भंडारण केंद्रों को निशाना बनाया है।
तेहरान और करज में जोरदार धमाके:
रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार को तेहरान और उसके पड़ोसी शहर करज में कई जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। बताया जा रहा है कि इजरायली हमलों में ईरान के कई फ्यूल स्टोरेज कॉम्प्लेक्स और ऑयल डिपो को नुकसान पहुंचा है। हमलों के बाद आसमान में आग और धुएं का बड़ा गुबार देखा गया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाया निशाना:
सूत्रों के अनुसार अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के ऊर्जा ढांचे (Energy Infrastructure) को निशाना बनाया है। इन हमलों में तेहरान और अल्बोर्ज प्रांत के कई तेल भंडारण केंद्रों को नुकसान पहुंचने की खबर है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में ईरान को और “सरप्राइज” मिल सकते हैं।
IRGC का बड़ा दावा:
दूसरी ओर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि देश की सेना इस संघर्ष को लंबे समय तक जारी रखने की क्षमता रखती है। फार्स न्यूज एजेंसी को दिए बयान में IRGC के प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी ने कहा कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं मौजूदा ऑपरेशन की गति से कम से कम छह महीने तक अमेरिका और इजरायल के खिलाफ युद्ध जारी रख सकती हैं।
200 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाने का दावा:
IRGC ने यह भी दावा किया है कि अब तक उन्होंने पूरे क्षेत्र में अमेरिका और इजरायल से जुड़े 200 से अधिक सैन्य ठिकानों और सुविधाओं को निशाना बनाया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है असर:
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी पड़ सकता है। मिडिल ईस्ट दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है, ऐसे में यहां बढ़ता तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी चिंता का कारण बन सकता है।