बस्तर से वामपंथी उग्रवाद के पूरी तरह खात्मे के लिए सुरक्षा बलों ने ‘मिशन 2026 द एंड गेम’ नाम से अंतिम चरण का अभियान शुरू कर रखा है। इस मिशन का मकसद बस्तर संभाग से नक्सल नेटवर्क का पूर्ण उन्मूलन करना है। 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद खत्म करने के एलान के बाद बस्तर में फोर्स ने कोर इलाके अबूझमाड़ और नेशनल पार्क क्षेत्र में लगातार दबाव बढ़ा दिया है। अलग-अलग सुरक्षा बलों के हजारों जवान इस समय जंगलों में सक्रिय हैं और उनका फोकस उन संभावित ठिकानों पर है, जहां बचे हुए नक्सलियों के छिपे होने की आशंका है।
बचे हुए नक्सलियों पर कड़ी नजर, समर्पण की भी अपील
अभियान के दौरान केवल ऑपरेशन ही नहीं, बल्कि बचे हुए नक्सलियों से लगातार समर्पण की अपील भी की जा रही है। पुलिस के साथ-साथ नक्सलियों के परिजन भी उन्हें मुख्यधारा में लौटने के लिए समझाने में जुटे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर अब गिनती के बचे हुए बड़े नक्सली नेता हैं। इनमें 2 सेंट्रल कमेटी मेंबर, टॉप 10 मोस्ट वांटेड नक्सली और उनके करीब 50 साथी शामिल बताए जा रहे हैं।
भर्ती प्रक्रिया लगभग ठहराव में पहुंची
सुरक्षा बलों का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में अपनाई गई आक्रामक और सटीक रणनीति से माओवादियों के नेटवर्क, नेतृत्व और लॉजिस्टिक सपोर्ट को गहरी चोट पहुंची है। लगातार एरिया डॉमिनेशन, इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशन और अंदरूनी क्षेत्रों तक प्रभावी पहुंच के चलते नक्सलियों के सुरक्षित ठिकाने कमजोर हुए हैं। इसी दबाव का असर यह भी बताया जा रहा है कि नक्सलियों की नई भर्ती प्रक्रिया लगभग ठहराव की स्थिति में पहुंच गई है।
मिशन 2026 के समापन में अब केवल 12 दिन बाकी
मिशन 2026 के समापन में अब महज 12 दिन शेष बताए जा रहे हैं। ऐसे में बस्तर पुलिस और अन्य तैनात सुरक्षा बल पूरी सतर्कता, आक्रामकता और फोकस के साथ अंतिम चरण का अभियान चला रहे हैं। पिछले दो वर्षों में समन्वित प्रयासों से माओवादियों को लगातार बड़े झटके लगे हैं और सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि साझा ऑपरेशन के कारण उन्हें दोबारा संगठित होने का मौका नहीं मिला। अब अंतिम चरण में बचे कैडरों पर दबाव बढ़ाने और उन्हें आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित करने की रणनीति पर काम हो रहा है।
आईजीपी सुंदरराज बोले- लक्ष्य बस्तर से वामपंथी उग्रवाद का पूर्ण समापन
आईजीपी सुंदरराज पी. ने कहा कि मिशन 2026 अब अपने निर्णायक एंड गेम चरण में पहुंच गया है और इसका मुख्य उद्देश्य बस्तर से वामपंथी उग्रवाद का पूर्ण समापन सुनिश्चित करना है। उनके मुताबिक, बीते वर्षों में बस्तर पुलिस, डीआरजी, बस्तर फाइटर्स, एसटीएफ, सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी और सीएएफ समेत सभी सुरक्षा बलों ने समन्वित और इंटेलिजेंस आधारित अभियान चलाकर माओवादी ढांचे को काफी कमजोर किया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावी आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के चलते बड़ी संख्या में कैडर मुख्यधारा में लौटे हैं, जिससे संगठन की रीढ़ टूट चुकी है।
टॉप 10 मोस्ट वांटेड नक्सलियों पर फोकस
फोर्स अब उन टॉप 10 मोस्ट वांटेड नक्सलियों पर फोकस कर रही है, जिन पर केवल छत्तीसगढ़ में ही 3 करोड़ रुपये से अधिक का इनाम घोषित है। इनमें सबसे ऊपर मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति उर्फ रमन्ना का नाम शामिल है, जो पोलित ब्यूरो और सलाहकार सेंट्रल कमेटी का सदस्य बताया जाता है। इसके अलावा मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर भी मोस्ट वांटेड सूची में शामिल है, जिस पर छत्तीसगढ़ में 40 लाख रुपये का इनाम घोषित है।
अन्य प्रमुख नामों में पापाराव कुड़म उर्फ सुन्नम चंदैरया उर्फ मंगू दादा उर्फ चन्द्रना और केसा सोढ़ी शामिल हैं, जिन पर भी 40-40 लाख रुपये के इनाम घोषित बताए गए हैं। ये सभी बचे हुए शीर्ष नक्सली कमांडरों में शामिल माने जा रहे हैं।
अन्य इनामी नक्सलियों से भी लगातार समर्पण की अपील
इसके अलावा हेमला विज्जा, चंदर कतलाम, किशोर उर्फ आयतु डोडी, रूपी पति विजय रेड्डी, मगेंश परचापी उर्फ सोमलू और मनीषा कोर्राम जैसे नक्सली भी सुरक्षा एजेंसियों की हिट लिस्ट में हैं। इन पर 5 लाख से 8 लाख रुपये तक के इनाम घोषित हैं। पुलिस की ओर से इन सभी से लगातार जल्द समर्पण करने की अपील की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों ने साफ संकेत दिया है कि तय समय के भीतर आत्मसमर्पण नहीं करने पर उन्हें फोर्स की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।