नई दिल्ली। देश के प्रमुख महानगरों में वायु प्रदूषण लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। दिल्ली-NCR में हवा की स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर नजर आ रही है। उपलब्ध AQI रीडिंग के मुताबिक, नई दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 674 दर्ज किया गया है, जबकि नोएडा में यह आंकड़ा 788 तक पहुंच गया। गुरुग्राम में भी AQI 808 की रीडिंग सामने आई है। दूसरी ओर, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता और बंगलूरू जैसे शहरों में प्रदूषण का स्तर तुलनात्मक रूप से कम दर्ज किया गया है।
दिल्ली-NCR के आंकड़े महानगरों के बीच प्रदूषण के बड़े अंतर को सामने लाते हैं। नोएडा में PM 2.5 का स्तर 470 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर और PM 10 का स्तर 513 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज किया गया। हवा में इन प्रदूषक कणों की अधिक मात्रा स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकती है।
दिल्ली-NCR में प्रदूषण ने बढ़ाई चिंता
उपलब्ध रीडिंग के अनुसार, नई दिल्ली का AQI 674, नोएडा का 788 और गुरुग्राम का 808 दर्ज किया गया है। नोएडा में दर्ज PM 2.5 और PM 10 के स्तर भी प्रदूषण की गंभीरता की ओर इशारा करते हैं।
नोएडा में तापमान 28 डिग्री सेल्सियस, आर्द्रता 23 प्रतिशत और हवा की रफ्तार 10.1 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई। हालांकि, मौसम के साथ प्रदूषण के स्तर में बदलाव हो सकता है और अलग-अलग निगरानी केंद्रों की रीडिंग में अंतर भी संभव है।
मुंबई से बंगलूरू तक जानिए महानगरों का AQI
देश के अन्य प्रमुख शहरों की उपलब्ध रीडिंग पर नजर डालें तो कोलकाता का AQI 182, हैदराबाद का 172, पुणे का 167 और अहमदाबाद का 164 दर्ज किया गया है। मुंबई में यह आंकड़ा 152 रहा, जबकि चेन्नई में 122 और बंगलूरू में 102 की रीडिंग सामने आई।
इन आंकड़ों में दिल्ली-NCR की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक दिखाई देती है। वहीं, बंगलूरू और चेन्नई में अन्य महानगरों के मुकाबले अपेक्षाकृत कम प्रदूषण दर्ज किया गया है। हालांकि, वायु गुणवत्ता में स्थानीय परिस्थितियों और समय के अनुसार बदलाव होता रहता है।
प्रदूषित हवा से सेहत पर पड़ सकता है असर
हवा में PM 2.5 और PM 10 जैसे कणों की अधिक मात्रा सांस संबंधी परेशानियां बढ़ा सकती है। प्रदूषण के संपर्क में आने से खांसी, सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी बीमारी से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।प्रदूषण अधिक होने पर बाहर की गतिविधियां सीमित रखना, धूल-धुएं के संपर्क से बचना और स्थानीय प्रशासन की स्वास्थ्य संबंधी सलाह का पालन करना जरूरी है।