वाशिंगटन: ट्रंप प्रशासन के तानाशाही रवैए के खिलाफ आवाज बुलंद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ लोगों में भारी गुस्सा है। इस विशाल विरोध प्रदर्शन में विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और नागरिक समूहों ने भाग लिया, जिसमें महिलाओं के अधिकारों के लिए कार्य करने वाले संगठनों से लेकर पर्यावरण कार्यकर्ता और ट्रंप प्रशासन की नीतियों के विरोधी शामिल थे। प्रदर्शनकारियों ने ट्रंप के शासनकाल की आलोचना करते हुए 'अब और नहीं' और 'हमें बदलाव चाहिए' जैसे नारे लगाए। इस विरोध प्रदर्शन का आह्वान ट्रंप के प्रशासन के खिलाफ बढ़ते असंतोष और उनके द्वारा उठाए गए निर्णयों के विरोध में किया गया था। यह विरोध प्रदर्शन ट्रंप की विभिन्न नीतियों के खिलाफ है।
लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला:
इसमें विशेष रूप से ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों के खिलाफ उठाए गए उनके कदमों और उनके कार्यकाल के दौरान किए गए अन्य विवादास्पद कार्यों ने देशभर में गहरे विरोध को जन्म दे दिया है। शामिल मुद्दों में गर्भपात के अधिकारों पर प्रतिबंध, जलवायु परिवर्तन के खिलाफ की गई नीतियां, और सामाजिक असमानताओं में वृद्धि भी प्रमुख हैं। न्यायपालिका में ट्रंप द्वारा नियुक्त किए गए न्यायधीशों के फैसलों और संघीय पुलिस के कुछ आक्रामक कदमों के विरोध में कई संगठनों ने मिलकर यह विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। एक ओर जहां प्रदर्शनकारियों का कहना था कि ट्रंप के शासन में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला हो रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने इन विरोधों को "राजनीतिक साजिश" और "सामाजिक असंतोष फैलाने की कोशिश" के रूप में प्रस्तुत किया। इसे 'नो किंग्स प्रोटेस्ट' नाम दिया गया है। यानि अब ट्रंप की तानाशाही नहीं चलेगी का नारा लगाया जा रहा है।
ट्रंप प्रशासन के खिलाफ विरोध:
'नो किंग्स' प्रोटेस्ट क्या है? : राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ अमेरिका में विरोध की आग सुलग रही है। अमेरिका और दुनियाभर में 'नो किंग्स' के बैनर तले लाखों लोग सड़कों पर उतर गए है। 'नो किंग्स प्रोटेस्ट' ट्रंप प्रशासन की शिक्षा, प्रवासन और सुरक्षा नीतियों में बढ़ रही तानाशाही के खिलाफ चल रहा है। 200 से ज्यादा संगठन इस आंदोलन में कूद चुके हैं। छोटे कस्बों से लेकर बड़े-बड़े शहरों तक ट्रंप प्रशासन के तानाशाही रवैये के खिलाफ आवाज बुलंद हो रही है।
कहां-कहां हो रहा 'नो किंग्स' प्रोटेस्ट :
पूरे अमेरिका में 2,500 से अधिक प्रोटेस्ट की योजना तैयार की गई है, जिनमें बड़े शहरों के साथ ही छोटे कस्बे भी शामिल हैं। यह प्रोटेस्ट अमेरिका के सभी 50 राज्यों में होंगे। अलग-अलग जगहों पर अलग समय पर प्रदर्शन शुरू किए जाएंगे। प्रोटेस्ट में 200 से ज्यादा संगठन में जुड़े हुए हैं। इस डे ऑफ एक्शन के लिए आयोजकों ने कई प्रमुख शहरों को 'एंकर सिटीज के रूप में चिन्हित किया है, जिनमें शामिल वॉशिंगटन डीसी, सैन फ्रांसिस्को, अटलांटा, सैन डिएगो, होनोलूलू, कैनसस सिटी (मिसौरी), शिकागो, न्यूयॉर्क सिटी, बोस्टन, ह्यूस्टन (टेक्सास), न्यू ऑरलियन्स और बोजमैन (मोंटाना) शामिल हैं।