बीजिंग: चीन ने बुधवार को नए के-वीजा कैटेगरी को लॉन्च किया, जिसे अमेरिका के एच-1बी वीजा का जवाब माना जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी वीजा की फीस बढ़ाकर एक लाख डॉलर कर दी है। इस वजह से अब अमेरिकी कंपनियों के लिए विदेशी वर्कर्स को हायर करना मुश्किल होगा। ऐसी स्थिति में अब चीन के-वीजा के जरिए उन लोगों को अपने यहां लाना चाहता है, जिन्हें अमेरिका में जॉब के लिए एच-1बी वीजा पाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं के-वीजा क्या है, ये किसको मिलेगा, इसके फायदे क्या हैं, इसे लेकर चुनौतियां क्या हैं? कुल मिलाकर 5 ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब जानना जरूरी है।
क्या है के-वीजा:
चीन ने के-वीजा को अगस्त में पेश किया था, जिसका मकसद उन प्रोफेशनल्स और युवाओं को देश में लाना है, जिन्होंने एसटीईएम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स) की पढ़ाई की है। उन्हें बिना जॉब ऑफर के देश में आने की इजाजत होगी, ताकि वे यहां नौकरी ढूंढ सकें। केपीएमजी के विश्लेषण के मुताबिक, चीन ने 2013 में ही हाई स्किल वाले प्रोफेशनल्स के लिए आर वीजा लॉन्च किया था, लेकिन के-वीजा खासतौर पर साइंस और टेक्नोलॉजी से जुड़े लोगों को लाने के लिए लाया गया है
कौन कर सकता है क्वालिफाई:
जिन भी विदेशी ग्रेजुएट्स के पास एसटीईएम फील्ड से जुड़ी बैचलर्स या उससे ऊपर की डिग्री है, वे के-वीजा हासिल कर सकते हैं। उनकी डिग्री किसी प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी या रिसर्च सेंटर से होनी चाहिए। इसके अलावा अगर कोई युवा प्रोफेशनल्स एसटीईएम फील्ड में टीचिंग या रिसर्च कर रहा है, तो उसे भी चीन के वीजा देकर देश में बुलाने वाला है। इसका मुख्य मकसद ही टेक सेक्टर में ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाना है, ताकि अमेरिका को टक्कर दी जा सके।
क्या एच-1बी का जवाब बन सकेगा के-वीजा:
के-वीजा उन लोगों के लिए बेहतर ऑप्शन है, जो अमेरिका के अलावा किसी और देश में जॉब की तलाश में हैं। अमेरिका के आयोवा राज्य के इमिग्रेशन वकील मैट मौटेल-मेडिसी ने रॉयटर्स से बात करते हुए कहा, 'प्रतीकात्मकता शक्तिशाली है। अमेरिका बाधाएं बढ़ा रहा है, चीन उन्हें कम कर रहा है। अमेरिका में एच-1बी वीजा फीस बढ़ने के बाद जो लोग यहां जॉब के लिए नहीं जा पाएंगे, उनके लिए चीन ने अपने दरवाजे खोल दिए हैं।
के-वीजा की चुनौतियां:
चीन के के-वीजा प्रोग्राम को लागू करने में काई बाधाएं आ रही है। चीनी अधिकारियों ने उम्र, एजुकेशनल क्वालिफिकेशन और वर्क एक्सपीरियंस से संबंधित अस्पष्ट शर्ते निर्धारित की हैं। इस वीजा के जरिए मिलने वाली सैलरी, जॉब प्लेसमेंट और लंबे समय तक देश में रहने की इजाजत को लेकर भी साफ नियम नहीं बताए गए है। चीन में बहुत मुश्किल से ही नागरिकता दी जाती है, इसके उलट अमेरिका सभी को नागरिकता देता है। चीन में ज्यादातर कंपनियों में मंदारिन भाषा बोली जाती है। इस वजह से भी विदेशी वर्कर्स को यहां जॉब करने में दिक्कत हो सकती है।
के-वीजा के फायदे:
वीजा अवधिः के वीजा के जरिए काफी फ्लेक्सिबिलिटी दी जाएगी। अन्य वीजा कैटेगरी के मुकाबले के-वीजा पाने वाले शख्स की वीजा अवधि भी ज्यादा होने वाली है।
ज्यादा चीजें करने की इजाजतः के-वीजा होल्डर चीन में एजुकेशनल, साइंटिफिक,टेक्नोलॉजिकल, कल्चरल, आंत्रप्रेन्योरशिप जैसे काम कर सकता है।
एंट्री की शर्तें: के-वीजा के लिए स्थानीय कंपनी से स्पांसरशिप की जरूरत नहीं होगी। वीजा देने के लिए आवेदक की पढ़ाई और वर्क एक्सपीरियंस को देखा जाएगा।