कबीरधाम जिले के बम्हनी धान खरीदी केंद्र में धान के रिकॉर्ड और निर्गमन से जुड़ी गंभीर गड़बड़ी सामने आई है। प्रशासनिक जांच में लगभग 77 लाख रुपये के धान घोटाले का खुलासा होने के बाद केंद्र प्रभारी समेत तीन लोगों के खिलाफ रेंगाखार थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। मामले के सामने आने के बाद धान खरीदी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
कागजों में जारी होते रहे डिलीवरी ऑर्डर
जांच रिपोर्ट के अनुसार, राइस मिलों को धान भेजने के लिए लगातार डिलीवरी ऑर्डर (डीओ) जारी किए जाते रहे, जबकि वास्तविक स्थिति संदिग्ध पाई गई। अधिकारियों का मानना है कि रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर है, जिसकी विस्तृत जांच की जा रही है।
ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज होती रहीं प्रविष्टियां
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि करीब चार माह तक ऑनलाइन पोर्टल में धान निर्गमन की प्रविष्टियां दर्ज होती रहीं। आरोप है कि सिस्टम में ऐसी जानकारी अपडेट की गई, जिससे धान के उठाव और वितरण को नियमित दर्शाया जा सके। इस पूरे घटनाक्रम ने निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नोडल अधिकारी के हस्ताक्षर भी नहीं मिले
जांच अधिकारियों को खरीदी केंद्र की क्लोजिंग रिपोर्ट में संबंधित नोडल अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं मिले। इसके बावजूद आवश्यक सत्यापन और अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी किए बिना ऑनलाइन मॉड्यूल में धान जारी होने की एंट्री दर्ज होती रही। इस तथ्य को जांच में एक महत्वपूर्ण बिंदु माना जा रहा है।
तीन आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुआ मामला
शिकायत और विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने केंद्र प्रभारी सहित तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब दस्तावेजों, ऑनलाइन रिकॉर्ड और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस पूरे मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता तो नहीं थी।
जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
मामला सामने आने के बाद धान खरीदी प्रणाली की पारदर्शिता और नियंत्रण व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रशासन का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है और जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।