जगदलपुर। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर के बाद बस्तर के रंगकर्मियों के बीच उनसे जुड़ी पुरानी यादें चर्चा में हैं। वर्ष 1987 में फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में बस्तर आए नाना पाटेकर ने अपने प्रवास के दौरान स्थानीय कलाकारों और रंगमंच से जुड़े लोगों के साथ समय बिताया था। अब उनके साथ बिताए पलों की पुरानी तस्वीरें साझा कर बस्तर के रंगकर्मी उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। रंगकर्मी जी.एस. मनमोहन ने सोशल मीडिया पर नाना पाटेकर के साथ की कुछ पुरानी तस्वीरें साझा की हैं। इन तस्वीरों के साथ उन्होंने अभिनेता के बस्तर प्रवास से जुड़े कई संस्मरण भी बताए। उनके अनुसार, नाना पाटेकर का जगदलपुर आना स्थानीय कलाकारों के लिए यादगार अनुभव रहा था।
1987 में फिल्म 'आज का महाभारत' की शूटिंग के लिए आए थे बस्तर
जी.एस. मनमोहन के मुताबिक, नाना पाटेकर वर्ष 1987 में फिल्म 'आज का महाभारत' की शूटिंग के सिलसिले में बस्तर पहुंचे थे। फिल्म यूनिट में उनके साथ दीप्ति नवल, सुरेश ओबेरॉय, भारत भूषण और नीता पुरी सहित अन्य कलाकार भी शामिल थे। बस्तर प्रवास के दौरान नाना पाटेकर जगदलपुर के शहीद पार्क रोड स्थित गोयल भवन में ठहरे थे। बताया जाता है कि उनका प्रवास लगभग एक सप्ताह का था। इस दौरान स्थानीय रंगकर्मियों और कलाकारों से उनकी मुलाकात हुई, जिससे क्षेत्र के कला जगत से उनका जुड़ाव बना।
खुद खुली जीप चलाकर शूटिंग लोकेशन पहुंचते थे अभिनेता
नाना पाटेकर के बस्तर प्रवास से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा उनकी शूटिंग की दिनचर्या से संबंधित है। जी.एस. मनमोहन द्वारा साझा की गई यादों के अनुसार, नाना पाटेकर साथी कलाकारों के साथ खुली जीप खुद चलाकर शूटिंग लोकेशन तक जाते थे। उस समय बस्तर में फिल्मों और डॉक्यूमेंट्री की शूटिंग को लेकर प्रशासनिक प्रतिबंध बताए जाते हैं। इसी वजह से फिल्म की शूटिंग बस्तर के बजाय ओडिशा के धनपुंजी के पास स्थित चांदली और देवड़ा के जंगलों में की गई थी। इस फिल्म में बस्तर के स्थानीय रंगकर्मियों को भी अभिनय करने का अवसर मिला था। जानकारी के मुताबिक, आकाशवाणी के उद्घोषक एवं रंगकर्मी जी. श्याम, शहजाद रहीम और गौतम कुंडू ने फिल्म में छोटी भूमिकाएं निभाई थीं। इस तरह फिल्म से जुड़ी यादें स्थानीय कलाकारों के लिए भी खास बन गईं।
इंजीनियरिंग कॉलेज के कार्यक्रम में बने थे मुख्य अतिथि
नाना पाटेकर के बस्तर प्रवास की एक और याद जगदलपुर के इंजीनियरिंग कॉलेज से जुड़ी हुई है। उस समय कॉलेज आज के एयरपोर्ट के सामने स्थित भवन में संचालित होता था। यहां आयोजित वार्षिक स्नेह सम्मेलन में नाना पाटेकर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कला, संस्कृति, सिनेमा और बस्तर की पहचान से जुड़े विषयों पर अपने विचार साझा किए थे। स्थानीय लोगों के लिए किसी बड़े फिल्म अभिनेता का इस तरह के शैक्षणिक और सांस्कृतिक आयोजन में शामिल होना एक यादगार अवसर था।
रंगकर्मियों के साथ रंगमंच और कला पर हुई थी चर्चा
जी.एस. मनमोहन के अनुसार, बस्तर प्रवास के दौरान नाना पाटेकर ने स्थानीय कलाकारों और रंगमंच से जुड़े लोगों के साथ खुलकर बातचीत की थी। इस दौरान अभिनय, रंगमंच, फिल्म और कला की विभिन्न विधाओं पर चर्चा हुई। नाना पाटेकर के निधन के बाद बस्तर के रंगकर्मी इन पुरानी मुलाकातों और अनुभवों को याद कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर साझा की जा रही तस्वीरें उस दौर की यादों को फिर से जीवंत कर रही हैं। बस्तर के कलाकारों के लिए नाना पाटेकर की ये स्मृतियां केवल एक फिल्म अभिनेता से मुलाकात की कहानी नहीं, बल्कि उस दौर की सांस्कृतिक गतिविधियों और स्थानीय रंगमंच से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अध्याय भी हैं।