ब्रेकिंग न्यूज़
  • इस गांव पर रोज रात धावा बोलता है लुटेरों का गिरोह: जिसके घर से खाने-पीने की खुशबू मिली, उसकी आई शामत
  • 6 घंटे के लिए शुरू हुआ किसानों का रेल रोको आंदोलन, लखनऊ में धारा 144 लागू, यहां दिख रहा असर
  • तीन मंत्रियों ने ली अफसरों की क्लास, डहरिया ने कहा- अस्पताल को बना रखा है मजाक
  • Delhi Fire: दिल्ली के LNJP अस्पताल में लगी आग, इमरजेंसी वार्ड से मरीजों को किया गया शिफ्ट
  • क्या पुंछ में भारतीय सेना के खिलाफ पाकिस्तान कमांडो भी आतंकवादियों का दे रहे साथ, पढ़ें ये रिपोर्ट
  • बड़ी खबर: ऐसे लगी सूरत की पैकेजिंग कंपनी में आग, 125 से ज्यादा मजदूरों का रेस्क्यू
  • क्रिकेटर युवराज सिंह को हरियाणा पुलिस ने किया गिरफ्तार, जानें पूरा मामला

सेहत

  • पीएम मोदी 13 अक्टूबर को करेंगे राष्ट्रीय मास्टर प्लान लॉन्च, जानें गति शक्ति योजना के बारे में

    पीएम मोदी 13 अक्टूबर को करेंगे राष्ट्रीय मास्टर प्लान लॉन्च, जानें गति शक्ति योजना के बारे में

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) 13 अक्टूबर को राष्ट्रीय मास्टर प्लान की घोषणा करने जा रहे हैं। इस योजना का जिक्र पीएम मोदी ने इसी साल लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराने के बाद किया था। उन्होंने अपने संबोधन के दौरान कहा था कि प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना (Pradhan Mantri Gati Shakti) का ऐलान किया था।

    मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम मोदी 13 अक्टूबर को पहली बार नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर मास्टरप्लान प्रधानमंत्री गति शक्ति लॉन्च करेंगे। 100 लाख करोड़ का राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा मास्टर प्लान तैयार किया गया है। यह योजना लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगी।

    गति शक्ति मास्टर प्लान क्या है?

    15 अगस्त 2021 को पीएम नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से कहा था कि इस परियोजना को भविष्य में युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों के स्रोत के रूप में पेश किया। पीएम मोदी ने कहा था कि आने वाले दिनों में हम पीएम गति शक्ति योजना, 100 लाख करोड़ का राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा मास्टर प्लान लॉन्च करेंगे, जो समग्र बुनियादी ढांचे की नींव बनाएगा और हमारी अर्थव्यवस्था को और भी ज्यादा मजबूत करेगी।

    और भी...

  • आपकी Health के बारे में ये 5 बातें बता देते हैं आपके बाल, जानें कैसे

    आपकी Health के बारे में ये 5 बातें बता देते हैं आपके बाल, जानें कैसे

    Things Your Hair Says About Your Health : हमारे शरीर में जब कोई बीमारी हो जाती है, शरीर के कई पार्ट्स पर इसका असर दिखने लगता है, यहां तक हमारे नाखुन (Nails) और बाल (Hair) भी इसका संकेत दे देते हैं। यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कि आपके बाल आपकी हेल्थ (Health) के बारे में क्या बताते हैं।

    1- तनाव की वजह से सफेद हो सकते है बाल अगर आप बाल उम्र से पहले ही सफेद होने लगते हैं, तो यह तनाव की ओर संकेत करता है। तनाव की वजह से आपके आप सफेद होने लगते हैं। हालांकि ये जेनेटिक भी हो सकता है। इसे लेकर चूहों पर एक टेस्ट किया गया, जिसमें पाया गया कि तनाव से डीएनए को नुकसान पहुंचता है और जो बालों के रोम में वर्णक-उत्पादक कोशिकाओं की सप्लाई को कम करके बालों के सफेद होने में योगदान दे सकते हैं। तनाव के कारण बाल भी झड़ सकते है।

    2- थाइराइड की वजह से पतले हो सकते है बाल जिन लोगों को थाइराइड की समस्या होती है, उनकी थायरॉयड ग्रंथि पर्याप्त थायराइड हार्मोन का उत्पादन नहीं कर पाती है, जिसकी वजह से बाल झड़ने लगते है और पतले हो जाते है।

    3- एनीमिया का संकेत हो सकता है बालों का झड़ना यदि आप अचानक अपने हेयरब्रश में या अपने शॉवर फ्लोर पर बहुत अधिक बाल देख रहे हैं, तो यह एक संकेत हो सकता है कि आपके शरीर में आयरन की कमी है, या एनीमिया है। इसलिए आपको टेस्ट करा लेना चाहिए। ताकि आप इन बीमारियों से बच सके।

    4- प्रोटीन की कमी से झड़ सकते है बाल बालों के स्वास्थ्य और विकास के लिए प्रोटीन की जरूरत होती है। अगर शरीर में प्रोटीन की कमी होती है, तो बाल पतले और झड़ने लगते हैं।

    5- डैमेज बाल बताते है कई बीमारियों के बारे में अगर आपके बाल लगातार खराब हो रहे है तो इसका मतलब है कि आपके शरीर में पोषक तत्वों की कमी है और कई तरह की बीमारियों ने आपके शरीर को जकड़ रखा है। ऐसे में आपको समय-समय पर डॉक्टर की सलाह लेते रहना चाहिए।

     

    और भी...

  • आपकी जीभ ऐसे बताएगी कि आप में Vitamin D की कमी है या नहीं ?

    आपकी जीभ ऐसे बताएगी कि आप में Vitamin D की कमी है या नहीं ?

    Vitamin D deficiency : शरीर को स्वस्थ रहने के लिए कई आवश्यक पोषक तत्वों (Nutrients) की जरुरत होती है, विटामिन डी (Vitamin D) इनमें से एक है। यह फैट में घुलने (Fat-Soluble) वाला ऐसा पोषक तत्व है, जो सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आने पर शरीर में बनता है। सूर्य (Sun) की किरणें ही विटामिन डी का प्राइमरी सोर्स माना जाता है, क्योंकि यह भोजन में सीमित मात्रा में ही मौजूद होता है।

    हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि हमारी हड्डियों, दांतों और मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में विटामिन डी अहम भूमिका निभाता है। इस पोषक तत्व की कमी आपके शारीरिक के साथ-साथ आपके मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) के लिए भी खराब हो सकती है। फिर भी, दुनिया भर में बड़ी संख्या में लोगों में इस विटामिन की कमी है। आम तौर पर, विटामिन डी की कमी का निदान (Diagnosed) ब्लड टेस्ट (Blood Test) के माध्यम से किया जाता है, अब शोधकर्ताओं ने संख्याओं को ट्रैक करने का एक और आसान तरीका मिल गया है। इससे आप अपनी जीभ (Tongue) से ही विटामिन डी की कमी की जांच कर सकते हैं।

    2017 की एक स्टडी की मानें तो जिन लोगों में बर्निंग माउथ सिंड्रोम (BMS) के लक्षण हैं, उन्हें फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज, विटामिन डी (डी2 और डी3), विटामिन बी6, जिंक, विटामिन बी1 और टीएसएच (TSH) की जांच करानी चाहिए।

    शोधकर्ताओं का कहना है कि बर्निंग पेन और हॉट संसेशन आमतौर पर होंठ (Lips) या जीभ (Tongue) पर महसूस होती है, या मुंह (Mouth) में अधिक व्यापक होती है। इसके साथ ही, व्यक्ति को मुंह में सुन्नता (Numbness) , सूखापन (Dryness) और अप्रिय स्वाद (Unpleasant Taste) का अनुभव हो सकता है। कुछ खाते समय दर्द बढ़ सकता है। शोधकर्ता का सुझाव है कि स्थिति की गंभीरता एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न हो सकती है।

     

    और भी...

  • Peanuts Health Benefits : जानें कैसे करती है मूंगफली आपके वजन और डायबिटीज को कंट्रोल

    Peanuts Health Benefits : जानें कैसे करती है मूंगफली आपके वजन और डायबिटीज को कंट्रोल

    Peanuts Health Benefits : सितंबर का महीना चल रहा है, इसमें मौसम में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते है, एक तरफ गर्मी जा रही होती है और वहीं दूसरी ओर ठंड का सीजन आने वाला होता है। ठंड में सबसे ज्यादा मूंगफली (Peanuts) का सेवन किया जाता है, वैसे तो मूंगफली हर सीजन में आती है, लेकिन ठंडी में इसे खाने का मजा कुछ और ही होता है। यहां हम आपको मूंगफली खाने के कुछ फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं।

    1- वजन कंट्रोल करने में मदद करती है शोधकर्ताओं का दावा कि मूंगफली में हाई मात्रा में फैट और कैलोरी पाई जाती है, मगर इसके बावजूद इससे वजन नहीं बढ़ता है। बल्कि बढ़े हुए वजन को कंट्रोल किया जा सकता है।

    2-दिल को स्वस्थ रखती है आप जानते हैं कि अखरोट और बादाम जैसे ड्राई फूट्स हर्ट को हेल्दी बनाने में हेल्प करते हैं, लेकिन मूंगफली इन महंगे नट्स से कम नहीं हैं। यह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करके हृदय रोग को रोकने में मदद करती है और छोटे रक्त के थक्कों को बनने से रोकने के लिए भी काम करती है। इससे स्ट्रोक की संभावना की संभावना कम होती है।

    3- पित्त पथरी के खतरे का कम करती है कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि मूंगफली का सेवन करने से पुरुषों और महिलाओं दोनों में पित्त पथरी के खतरे को कम कर सकता है। ऐसे में आपको नियमित रूप से मूंगफली का सेवन करना चाहिए।

    4- डायबिटीज के जोखिम को कम करती है हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो मूंगफली में कम ग्लाइसेमिक पाया जाता है, जो आपके बल्ड शुगर के स्तर में वृद्धि नहीं करते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि यह महिलाओं में टाइप -2 मधुमेह के खतरे को कम कर सकता है।

     

    और भी...

  • त्रिफले से मिलते हैं गजब के फायदे,जानें रोजाना क्यों करना चाहिए इसका सेवन

    त्रिफले से मिलते हैं गजब के फायदे,जानें रोजाना क्यों करना चाहिए इसका सेवन

    आयुर्वेदा (Ayurveda) में त्रिफला (Triphala) को एक ऐसी हर्बल औषधि माना जाता है, जिसमें ऐसे कई शक्तिशाली गुण पाए जाते हैं जो बड़ी-बड़ी बीमारियों का इलाज कर सकते है। यही कारण है त्रिफले का उपयोग आयुर्वेद में 100 से अधिक सालों से किया जा रहा है और जो विभिन्न उपचारों के लिए काम में आ रहा है। आईए जानते है कि त्रिफला (Triphala Benefits) आपकी हेल्थ (Health) के लिए कैसे फायदेमंद है और आपको इसका सेवन क्यों करना चाहिए।

    1- वजन कम (Weight Loss) आयुर्वेद की मानें तो त्रिफला एक शक्तिशाली डिटॉक्सिफायर है, जो पेट, छोटी आंत और बड़ी आंत में मौजूद विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। मिश्रण कोलन टोनर के रूप में भी काम करता है और कोलन के ऊतकों को मजबूत और टोनिंग करने में मदद करता है, जो आपके पाचन तंत्र को भी स्वस्थ बनाए रखने में भी मदद करता है। इससे आपको कब्ज की परेशानी नहीं रहती है और इसमें पाएं जाने वाले गुण आपका वजन घटाने में भी मदद करते है।

    2- कैंसर से लड़ सकता है एक अध्ययन से पता चलता है कि त्रिफला कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने में भी कारगर साबित होता है। दरअसल, चूहों पर एक परीक्षण किया गया था। जिसमें पाया गया है कि त्रिफला में मौजूद यौगिक लिम्फोमा, पेट और अग्नाशय के कैंसर के विकास को रोक सकता है। आयुर्वेद की मानें तो त्रिफला में गैलिक एसिड और पॉलीफेनोल जैसे एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, जो कैंसर से लड़ने में हेल्प करते हैं।

    3- दांतों के लिए भी अच्छा होता है त्रिफला त्रिफला में एंटीमाइक्रोबियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो आपको दांतों की कई तरह समस्याओं जैसे मसूड़ों में सूजन, मुंह में छाले में आराम पहुंचाता है और त्रिफला माउथवॉश से कुल्ला करने से प्लाक और फंगल इनफेक्शन को रोका जा सकता है।

    4- स्किन के लिए भी लाभदायक क्या आप जानते हैं कि कुछ लोग इसका सेवन करने के अलावा त्रिफला को अपनी स्कीन पर भी लगाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इसमें ऐसे एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते है, जो स्किन के लिए अच्छे होते है। त्रिफला का पेस्ट स्किन पर लगाने से त्वचा में नमी बनी रह सकती है, कोलेजन का निर्माण बढ़ सकता है और घावों को जल्दी ठीक होने में मदद कर सकता है।

    5-यह तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है। त्रिफले का सेवन करने से मेंटल हेल्थ भी अच्छी होती है। कई अध्ययन साबित करते हैं कि त्रिफला लेने से तनाव से बचा जा सकता है। एक अध्ययन की मानें तो त्रिफला तनाव के कारण होने वाले कुछ व्यवहार संबंधी मुद्दों को दूर करने में मदद कर सकता है।

     

    और भी...

  • Health Tips : यूरिक एसिड को करना चाहते हैं कंट्रोल तो सुबह उठकर इन 4 चीजों का करें सेवन

    Health Tips : यूरिक एसिड को करना चाहते हैं कंट्रोल तो सुबह उठकर इन 4 चीजों का करें सेवन

    यूरिक एसिड (Uric Acid) ब्लड (Blood) में पाया जाने वाला एक अपशिष्ट है, जब इसकी मात्रा शरीर में बढ़ जाती है, तो इसे कीडनी (kidney) फिल्टर नहीं कर पाती है और यह शरीर में ही जम जाता है, जो कई बीमारियों की वजह बन जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते है कि यूरिक एसिड बढ़ने से गठिया की बीमारी होना सबसे कॉमन है। यहां हम आपको यूरिक एसिड के मरीजों को सुबह उठकर क्या खाना चाहिए, इसके बारे में बताने जा रहे है।

    क्या है लक्षण

    -जोड़ों में दर्द

    -सूजन

    -पैरों और हाथों की उंगलियों में सूजन

    -टखनों और घुटनों में दर्द

    -टखनों और घुटनों सूजन आना आदि

    नींबू पानी नींबू पानी यूरिक एसिड को कम करने में मदद कर सकता है। आप सुबह उठकर खाली पेट एक गिलास पानी में नींबू का रस मिलाकर पीने से लाभ मिलेगा। नींबू में कई ऐसे तत्व पाए जाते है, जो शरीर में मौजूद विशाक्त पदार्थों को निकालने में मदद करते है।

    सेब का सिरका यूरिक एसिड के मरीजों के लिए सेब का सिरका काफी फायदेमंद हो सकता है। सेब में कई तरह के विटामिन्स, प्रोटीन, मिनरल्स पाए जाते हैं, जो यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में मदद कर सकते है। आप सुबह के समय खाली पेट एक गिलास पानी में एक चम्मच सिरका डालकर अच्छे से मिलाकर पी सकते हैं। नियमित रूप से इसे पीने से आपको काफी फायदा मिलेगा।

    अलसी के बीज अगर आप चाहे तो अलसी के बीज का भी सेवन कर सकते हैं। इसके लिए आपको अलसी के बीज चबाकर खाने होंगे। अलसी के बीज में प्रचुर मात्रा में फाइबर, ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन्स और विटामिन पाए जाते हैं जो यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में हेल्प कर सकते है।

    पानी सुबह उठकर खाली पानीने से भी यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है। ऐसा करने से शरीर में मौजूद यूरिक एसिड यूरीन के जरिए बाहर आएगा और इसे कंट्रोल करने में मदद मिलेगी। जो लोग यूरिक एसिड से परेशान हैं, उन्हें दिन में भी बार-बार पानी पीते रहना चाहिए।

     

    और भी...

  • याददाश्त को कमजोर बना रहा कोरोना, जानें कैसे आपके दिमाग को नुकसान पहुंचाता है अल्माइजर

    याददाश्त को कमजोर बना रहा कोरोना, जानें कैसे आपके दिमाग को नुकसान पहुंचाता है अल्माइजर

    World Alzheimer Day 2021 : कोविड (Covid 19) महामारी के दौरान अल्जाइमर (Alzheimer) की बीमारी ज्यादा देखने को मिली है। इस बीमारी से मेमोरी लॉस (Memory Loss) तो होती ही है, इसके साथ ही तनाव, गुस्सा, चिड़चिड़ेपन के लक्षण भी नजर आने लगते हैं। ब्राजील की एक अध्ययन की मानें तो अल्जाइमर (Alzheimer) के मरीज को कोविड संक्रमण (Covid Infection) के कारण मृत्यु का जोखिम तीन गुना ज्यादात होता है।

    अल्जाइमर के लक्षण (Symptoms of Alzheimer) -

    मेमोरी लॉस होना -पहले के मुकाबले एकाग्रता में कमी होना

    -चीजें रखकर भूल जाना

    -कंफ्यूज्ड -शक्की स्वभाव

    -तनाव में या डरे हुए रहना।

    ऐसे समझे अल्जाइमर एक्सपर्ट्स की मानें तो अल्जाइमर का सीधा संबंध किसी भी व्यक्ति की याद्दाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और व्यवहार से होता है। शुरुआती स्टेज में इसके लक्षण मामूली नजर आ सकते हैं, लेकिन जैसे-जैसे बीमारी मस्तिष्क में क्षति पहुंचाना शुरू करती है, तो लक्षण और भी गंभीर होते चलते जाते हैं। हालांकि रोग के गंभीर होने की गति हर व्यक्ति में अलग हो सकती है।

    8 साल बाद तक जीवित रह सकते है लक्षण आमतौर पर अल्जाइमर के लक्षण दिखने के बाद लोग 8 साल बाद तक जीवित रह सकते हैं, और यह सीमा 20 वर्ष तक भी जा सकती है। भारत में 4 मिलियन से ज्यादा लोग डिमेंशिया से जूझ रहे हैं। विश्व में ऐसे मरीजों की संख्या 44 मिलियन है, वैश्विक रूप से यह बीमारी एक ग्लोबल हेल्थ क्राइसिस (Global Health Crisis) के रूप में सामने आ रही है, जिसे गंभीरता से लेने की जरूरत है।


    क्या कहते हैं विशेषज्ञ कोविड के दौरान अल्जाइमर पेशेंट्स के ट्रीटमेंट में आई चुनौतियों के बारे में सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोलॉजी डॉक्टर अमित श्रीवास्तव से बातचीत की गई। जिसमें उन्होंने बताया कि हाल ही में यूके में हुए एक अध्ययन हुआ है। यह स्टडी यूके बायोबैंक की ओर से की गई। जिसमें 40,000 प्रतिभागियों को शामिल किया गया। जिसमें पाया गया कि कोविड होने के बाद मस्तिष्क में क्षति होने के साक्ष्य मिले है।

    सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोलॉजी ने ये भी बताया कि बहुत से अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि कोविड संक्रमण के कारण भूलने की समस्या जैसी परेशानियां भी आ सकती हैं। साथ ही अन्य अध्ययन बताते हैं कि कोविड संक्रमण, अल्जाइमर के लक्षणों को और गंभीर बना सकता है। इससे साबित होता है कि अल्जाइमर (Alzheimer) पेशेंट्स को कोविड को लेकर और भी अलर्ट रहने की जरूरत है।

     

    और भी...

  • जोड़ों के दर्द से लेकर डायबिटीज तक 10 बड़ी बीमारियों को जड़ से खत्म कर देता है विधारा, ऐसे करें सेवन

    जोड़ों के दर्द से लेकर डायबिटीज तक 10 बड़ी बीमारियों को जड़ से खत्म कर देता है विधारा, ऐसे करें सेवन

    Elephant creeper Health Benefits : विधारा (Elephant creeper) के नाम से आम लोग परिचित नहीं हैं, जबकि आयुर्वेद विद्वानों ने इसके कई तरह के फायदों के बारे में बताया है, जिन्हें जानकर आप हैरान हो जाएंगे। यह पौधा मानसिक, शारीरिक, स्नायु रोगों (Neurology) में भी एक प्रभावी औषधि के रूप में काम करता है। इसको अश्वगंधा (Ashwagandha) के साथ मिलाकर चूर्ण बनाया जाता है, जो सभी तरह की कमजोरी में बहुत लाभकारी है। आइए जानते हैं विधारा (Elephant creeper) के फायदों के बारे में।


    किन रोगों में लाभकारी -जोड़ों के दर्द -गठिया -सूजन -मधुमेह -पेट के कीड़े -बवासीर -मिरगी के दौरे -दस्त -कफ -गैस

    खाने को जल्दी पचाने में सहायक
    विधारा भोजन को शीघ्र पचाता है। इसकी मात्रा सामान्यतः रस दो से चार चम्मच, काढ़ा चार-चार चम्मच और चूर्ण एक-एक चम्मच सवेरे-शाम लेना चाहिए। ऐसे करें उपयोग -डायबिटीज (मधुमेह) के लिए दो से चार चुटकी चूर्ण को शहद में मिलाकर लेना लाभकारी है। -गर्भधारण में सफलता के लिए महिलाओं को इसका काढ़ा प्रतिदिन सवेरे पीना लाभकारी है। -जोड़ों के दर्द के लिए शतावरी की जड़ और विधारा की जड़ का काढ़ा बना कर चार-चार चम्मच दिन में दो बार लेना फायदेमंद होता है। -हाथी पांव, जिसको फीलपांव या फाइलेरिया भी कहते हैं के रोगी को इसकी जड़ का चूर्ण कांजी के साथ लेने से काफी राहत मिलती है। -एक्जिमा के रोगियों को इसके पत्तों का रस लगाने मात्र से आराम मिलता है।

     

    और भी...

  • Health Tips : बीमारी छोटी हो या बड़ी लेकिन डॉक्टर से कभी नहीं छिपानी चाहिए ये 4 बातें

    Health Tips : बीमारी छोटी हो या बड़ी लेकिन डॉक्टर से कभी नहीं छिपानी चाहिए ये 4 बातें

    Health Care Tips : किसी भी रोग में डॉक्टर का ट्रीटमेंट तभी जल्दी और सटीक असर करता है, जब उन्हें पेशेंट की हेल्थ संबंधी (Health Related) पूरी जानकारी मिलती है। इसलिए रोग छोटा हो या बड़ा, उसके बारे में पूरी और सही जानकारी डॉक्टर को जरूर दें और कोई भी तथ्य ना छुपाएं और ना ही गलत बताएं।

    क्या कहती है डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट डब्ल्यूएचओ (WHO) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल लाखों मरीज इसलिए अपनी जान गंवा देते हैं, क्योंकि उनकी बीमारी को सही ढंग से डायग्नोज करना संभव नहीं होता है। दरअसल, इनमें से ज्यादातर मामलों में इसकी वजह मरीजों द्वारा डॉक्टर के साथ सहयोग ना करना होता है यानी या तो अज्ञानता के कारण या लापरवाही के कारण मरीज डॉक्टर को अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्या (Health Related Issue) सही तरीके से नहीं बताता है। सटीक इलाज का एक फॉर्मूला यह भी है कि अपनी समस्या को अपने डॉक्टर से पूरी ईमानदारी और विस्तार से बताएं।

    1- एंटी डिप्रेशन की दवा लेते वक्त धूम्रपान न करें धूम्रपान के बारे में : डॉ. माजिद अलीम की मानें तो अगर आप एंटी डिप्रेशन की दवा ले रहे हैं और धूम्रपान कर रहे हैं तो दवा का परिणाम उल्टा भी हो सकता है। इसलिए जब अपने डॉक्टर के पास जाएं तो उन्हें इस बात की पूरी जानकारी दें कि आप धूम्रपान करते हैं और कितना करते हैं? धूम्रपान करने वाली महिलाओं को गर्भ निरोधक गोलियों का प्रयोग तो बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। इससे ब्लड क्लॉट के खतरे, रक्तचाप की समस्या आदि होने की आशंका काफी बढ़ जाती है।

    2-शराब की लत आमतौर पर शराब (Alcohol) पीने वाले मरीज जब डॉक्टर के पास जाते हैं तो वे या तो अपनी समस्या बताते हुए शराब पीने की आदत को जानबूझकर नहीं बताते या उन्हें इसे बताने की जरूरत ही नहीं महसूस होती। लेकिन अगर आप शराब पीते हैं तो डॉक्टर को जरूर बताएं। सिर्फ इतना ही नहीं कितनी पीते हैं, कैसे पीते हैं और कब-कब पीते हैं, यह सब भी साफ-साफ बताएं। दरअसल, जो लोग नियमित पीते हैं, ऐसे लोगों को पेन किलर या कोलेस्ट्रॉल की दवा बड़ी सावधानी पूर्वक दी जाती है, क्योंकि कुछ दवाएं उन्हें काफी नुकसान पहुंचा सकती हैं। शुगर या डायबिटीज के मरीज हैं तो इससे नर्व को नुकसान हो सकता है। अल्कोहल लेने वाला व्यक्ति अगर नींद की गोली लेता है तो वह कोमा में भी जा सकता है।

    3- सेल्फ मेडिकेशन की जानकारी आजकल बहुत से लोग सामान्य बीमारियों जैसे-खांसी, जुकाम, पेट दर्द, सिरदर्द आदि की दवाएं खुद ही दुकानदार से खरीद लाते हैं। जब उन दवाओं से कोई लाभ नहीं होता तो फिर डॉक्टर के पास जाते हैं। उन्हें अपनी तकलीफ तो बताते हैं, लेकिन यह बताना नहीं चाहते कि हमने उस तकलीफ के लिए पहले ही कई गोलियां खा ली हैं। उन्हें लगता है कि इससे डॉक्टर डांटेंगे। लेकिन आप यह नहीं जानते कि ऐसी दवाएं बीपी, हार्ट की बीमारियों, डायबिटीज आदि को बढ़ा सकती हैं। पेट में गैस की तकलीफ से राहत के लिए दुकानदार से ली जाने वाली दवा बीपी और किडनी के रोगियों को सावधानीपूर्वक लेनी होती है, क्योंकि ये दवाएं आपस में प्रतिक्रिया करके नुकसान भी कर सकती हैं।

    4- फूड हैबिट के बारे में सेहतमंद जिंदगी के लिए संतुलित भोजन बहुत जरूरी होता है, लेकिन अधिकांश लोग इस पर जरूरी ध्यान नहीं देते हैं। बीमार होने पर भी मनचाहा या बगैर परहेज के खाते रहते हैं। तबियत बिगड़ने पर डांट के डर से डॉक्टर को अपने गलत खान-पान की जानकारी छुपा लेते हैं। कई बार डायबिटीज के रोगी डॉक्टर से

     

    और भी...

  • Health Tips : जमीन पर बैठकर खाना खाने से मिलते है गजब के फायदे

    Health Tips : जमीन पर बैठकर खाना खाने से मिलते है गजब के फायदे

    Health Tips : अपने देश में सदियों से कई परंपराएं ऐसी हैं, जिनका सीधा संबंध मनुष्य के स्वास्थ्य (Health) से होता है। ऐसी ही एक परंपरा जमीन पर बैठकर खाना खाने की है। हालांकि आजकल अधिकतर लोग जमीन पर बैठकर खाना नहीं खाते हैं। भले ही, यह आपके लिए बहुत आरामदायक हो, लेकिन यह स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। ऐसे में आपको जमीन पर बैठकर खाने के फायदों के बारे में पता होना चाहिए।

    1-वजन नियंत्रण में रहता है: जब आप सुखासन में बैठते हैं तो आपका दिमाग अपने आप शांत हो जाता है। वह बेहतर ढंग से भोजन पर ध्यान केंद्रित कर पाता है। इससे दिमाग पेट को सही समय पर तृप्ति का अहसास करवाता है। इस प्रकार सुखासन में बैठकर खाने से आप जरूरत से ज्यादा खाने से बचते हैं और आपका वेट नियंत्रित रहता है।

    2-लचीला बनता है शरीर: जब आप सुखासन में बैठते हैं तो आपकी श्रोणि, निचली पीठ, पेट के आस-पास और पेट की मांसपेशियों में खिंचाव होता है। इससे डाइजेस्टिव सिस्टम आराम से अपना काम कर पाता है। इसके अलावा, यह स्थिति किसी भी प्रकार से आपके पेट पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालती, जिससे आपको खाने में और बेहतर ढंग से पचाने में मदद मिलती है। इससे पेट से जुड़ी समस्याएं कम होती हैं। इसके अलावा, जब आप जमीन पर बैठ कर खाना खाते हैं, तो आप स्वाभाविक रूप से खाने के लिए थोड़ा आगे झुकते हैं और खाने को निगलने के लिए वापस अपनी पहले वाली अवस्था में आ जाते हैं। इस तरह लगातार आगे और पीछे की ओर झुकने से आपकी पेट की मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं। साथ ही यह आपके पेट में एसिड को भी बढ़ाता है। इस तरह आपके लिए भोजन को पचाना बहुत आसान हो जाता है।
     

    3-दर्द से दिलाए राहत: खाना खाने का यह तरीका आपको समय से पहले बूढ़ा नहीं होने देता हैं, क्योंकि इस मुद्रा में बैठकर खाना खाने से रीढ़ की हड्डी और पीठ से जुड़ी समस्याएं नहीं होती हैं। साथ ही, जो लोग कंधों को पीछे धकेलते हुए गलत मुद्रा में बैठने के कारण किसी तरह के दर्द से परेशान होते हैं, वह समस्या भी इस आसन में बैठकर खाना खाने से दूर हो जाती है।

    4-उम्र को बढ़ाए: एक अध्ययन में पाया गया है कि जो लोग जमीन पर पद्मासन में या सुखासन में बैठते हैं और बिना किसी सहारे के खड़े होने में सक्षम होते हैं, उनकी लंबे समय तक जीवित रहने की संभावना ज्यादा होती है।

    5-लचीले बनते हैं जोड़: पद्मासन और सुखासन एक ऐसी मुद्रा है, जो आपके पूरे शरीर को लाभ पहुंचाती है। यह केवल आपके पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में ही मदद नहीं करती, बल्कि आपके जोड़ों को कोमल और लचीला बनाए रखने में भी मदद करती है। गठिया व हड्डियों की कमजोरी जैसे रोगों से भी बचाती है। लचीलेपन के साथ जोड़ों में चिकनाई आती है, जिससे जमीन पर बैठने में आसानी होती है।

    6- दिमाग रहता है शांत: जो लोग सुखासन में बैठकर खाना खाते हैं, उनका दिमाग तनाव रहित रहने की संभावना अधिक होती है, क्योंकि यह दिमाग को रिलैक्स औेर तंत्रिकाओं को शांत करता है। आयुर्वेद में माना गया है कि मन को शांत रखकर खाना खाने से पाचन बेहतर होता है। साथ ही, खाने के बाद संतुष्टि का अहसास भी होता है।

    7- दिल बने मजबूत: जब आप जमीन पर बैठकर खाना खाते हैं तो ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है। इस तरह दिल बड़ी आसानी से पाचन में मदद करने वाले सभी अंगों तक खून पहुंचाता है, लेकिन जब आप कुर्सी पर बैठ कर खाना खाते हैं तो यहां ब्लड सर्कुलेशन विपरीत होता है। जमीन पर बैठ कर खाना खाने से दिल भी स्वस्थ रहता है।

     

    और भी...

  • Skin Care Tips : आंखों के नीचे आ रहे काले घेरे तो दूध ऐसे करेगा हटाने में मदद

    Skin Care Tips : आंखों के नीचे आ रहे काले घेरे तो दूध ऐसे करेगा हटाने में मदद

    Dark Circles : आज के समय में आंखों के नीचे डार्क सर्कल (Dark Circles) होना आम बात हो गई है। बदलते खान-पान, नींद न पूरी होना और तनाव की वजह से आंखों के नीचे काले घेरे आ सकते हैं। इससे महिलाएं और पुरुष दोनों ही परेशान है, लेकिन यह महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलते हैं। यहां आपको दूध से बने कुछ घरेलू नुस्खों के बारे में बताया जा रहा है, जिनका इस्तेमाल कर आप इन काले घेरों को हटा सकते हैं।

    आंखों के नीचे काले घेरे आने का कारण

    1- थकान (Fatigue)

    2-बढ़ती उम्र (Age)

    3- आंख पर ज्यादा जोर पड़ना (Eye strain)

    4- एलर्जी (Allergies)

    5- डिहाड्रेशन (Dehydration)

    6- सन ओवर एक्सपोजर (Sun overexposure)

    7- जेनेटिक्स (Genetics)

    8-तनाव

    कैसे कर सकते हैं उपाय

    - अच्छी नींद लें

    - कोल्ड कंप्रेस लगाएं

    -तनाव न लें

    - कंम्प्यूटर और फोन का इस्तेमाल कम करें

    -अपनी आंखों को आराम दें

    ये रहे घरेलू नुस्खे

    1- कच्चे दूध को करें अप्लाई आप कच्चे दूध को अपने आंखों के नीचे बने काले घेरों पर कॉटन की मदद से अप्लाई कर सकते है। 10-15 मिनट तक रखने के बाद आप साफ पानी से अपनी आंखों को धो सकते हैं।

    2- दूध के झाग आंखों के नीचे बने काले घेरे के लिए दूध का झाग भी अच्छा रहता है, मगर शहरों में कच्चा दूध या दूध के झाग नहीं मिलते हैं। इसलिए आप दूध से बनी मलाई का भी प्रयोग कर सकते हैं।

    3- आलू का रस और दूध आप दूध के साथ आलू के रस का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इन दोनों को अच्छे से मिलाकर आप कॉटन से काले घेरों पर अप्लाई करें। इससे आपको डार्क सर्कल हटाने में काफी मदद मिलेगी।

    4- ठंडा दूध भी करेगा मदद आप फ्रीज में रखा ठंडा दूध भी अपनी आंखों के नीचे अप्लाई कर सकते हैं। इसके बाद इसे 15 मिनट तक रखने के बाद आप अपनी आंखों को अच्छे से धो सकते हैं।

    5- गुलाब जल और दूध गुलाब जल और दूध दोनों ही स्किन के लिए अच्छे होते हैं। अगर आप इन दोनों को अच्छे से मिलाकर डार्क सर्कल पर अप्लाई करते हैं तो इससे आपको काफी फायदा मिलेगा।

     

    और भी...

  • Health tips : थायरॉइड के मरीजों को रोजाना खाने चाहिए ये 4 फल

    Health tips : थायरॉइड के मरीजों को रोजाना खाने चाहिए ये 4 फल

    इन दिनों अधिकतर लोगों में थायरॉइड (Thyroid) की समस्या देखने को मिल रही है। यह एक हॉर्नोनल जनित बीमारी है, जो पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा होती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो यह बीमारी शरीर में आयोडीन की कमी से हो सकती है, इसके साथ ही जिंक, फॉस्फोरस और विटामिन्स की कमी भी इसकी वजह बन सकती है। यहां कुछ ऐसे फ्रूट्स के बारे में बताया जा रहा है, जिनका नियमित रूप से सेवन कर आप इस बीमारी को कंट्रोल कर सकते हैं।
     

    सेब (Apple)

    सेब आपकी सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। रोजाना एक सेब (Apple) खाने से आपको वजन कम करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही इससे ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugar) को भी मैनेज किया जा सकता है। अध्ययनों से पता चलता है कि सेब आपके शरीर को डिटॉक्सीफाई कर सकता है, जो थायरॉयड ग्रंथि को अच्छी तरह से काम करने में हेल्प करता है। सेब कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) के लेवल को भी कम करता है और डायबिटीज (Diabetes), मोटापा और दिल से संबंधित बीमारियों से बचाता है।

    संतरा (Orange) संतरे में विटामिन सी (Vitamin C) और एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) भरपूर मात्रा में पाया जाते हैं, इसे खाने से आपकी थायरॉयड ग्रंथि (Thyroid disease) पर पॉजिटिव इफेक्ट पड़ता है। यह आपके इम्यून सिस्टम को भी बढ़ाता है और बल्ड शुगर लेवल को भी कंट्रोल करता है।

    अनानास (Pineapple) अनानास में विटामिन सी (Vitamin C) और मैंगनीज (Minerals) की उच्च मात्रा होती है, ये दोनों पोषक तत्व आपके शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचा सकते हैं। इस खट्टे फल में विटामिन बी (Vitamin B) भी होता है, जो थायरॉइड के लक्षणों में से एक थकान को दूर करने में मदद कर सकता है। अनानास का सेवन करना कैंसर, ट्यूमर और कब्ज से पीड़ित लोगों के लिए भी अच्छा माना जाता है

    जामुन जामुन में एंटीऑक्सिडेंट भरपूर मात्रा में होता है, जो थायरॉइड पेशेंट्स के लिए अच्छा माना जाता है। अगर आप नियमित रूप से जामुन का सेवन करते हैं, तो इससे आपको काफी राहत मिलेगी।


     

    और भी...

  • Sunday Special: बिहार का लोकप्रिय पारंपरिक व्यंजन है लिट्टी चोखा, घर पर ऐसे करें तैयार

    Sunday Special: बिहार का लोकप्रिय पारंपरिक व्यंजन है लिट्टी चोखा, घर पर ऐसे करें तैयार

    लिट्टी चोखा (Litti Chokha) बिहार के लोकप्रिय व्यंजनों (Popular Recipes of Bihar Litti Chokha) में से एक है। जिसको लिट्टी और चोखे - दो अलग-अलग व्यंजनों के साथ खाने को कहा जाता है। लिट्टी चोखा बिहार (Bihar), झारखंड (Jharkhand) के अलावा पूर्वी यूपी में खासतौर पर ज्‍यादा पसंद किया जाता है। वैसे दक्षिण भारत समेत देश के अन्य कई हिस्सों में भी लिट्टी चोखा को बड़े प्‍यार व स्‍वाद से खाया जाता है। लिट्टी वैसे तो तो बाटी जैसी दिखाई देती है, पर इसमें फर्क काफी होता है। आटे में सत्तू भरकर लिट्टी तैयार की जाती है। साथ ही आलू, बैंगन व टमाटर को मिक्‍स करके चोखा बनाया जाता है। फिर चोखा को लिट्टी के साथ बड़े प्रेम से खाया जाता है।

    लिट्टी में इस्तेमाल होने वाली सामग्री लिट्टी को बनाने के लिए 2 कप आटा, आधा चम्मच तेल, आधा चम्मच अजवाइन और दो बड़े चम्मच घी की जरूरत होती है। तैयार करने की प्रक्रिया सबसे पहले आटे को छान कर बर्तन में रख लें। फिर आटे में घी व हल्‍का सा नमक डाल कर अच्छे से मिला लें। इसके बाद हल्के गर्म पानी के साथ नरम आटा गूंथ लें। फिर गूंथे हुए आटे को ढंककर करीब आधा घंटे तक रखना होगा। फिर लिट्टी बनाने के लिए गूंथा हुआ आटा तैयार है। सत्तू में ये सामग्री होगी इस्तेमाल सत्तू बनाने में एक कप बिना छिलके वाले चले भून लें, या सत्तू, कद्दूकस करे हुए 4 से 5 लहसुन, कद्दूकस किया हुआ एक टुकड़ा अदरक लें, एक प्याज बारीक कटी हुई, 2 से 3 बारीक कटी हुई हरी मिर्च, बारीक कटा हुआ आधा कप हरा धनिया, एक चम्मच अजवाइन, एक बड़ा चम्मच नींबू का रस, एक चम्‍मच तेल व दो भरे हुए लाल मिर्च के अचार का मसाला और नमक स्वादानुसार इस्तेमाल होगा।

     

    लिट्‍टी में भरने वाला सत्‍तू ऐसे करें तैयार अदरक को सबसे पहले धोएं और छिलकर बारीक टुकड़ों में काट लें या कद्दूकस भी की जा सकती है। हरा धनिया व हरी मिर्च बारीक काट लें। सत्तू को बर्तन में निकाल लें। फिर उसमें अदरक, धनिया, हरी मिर्च, नमक, काला नमक, नींबू का रस, जीरा, सरसों का तेल व अचार का मसाला मिला लें। जब सत्‍तू इसमें पूरी तरह से मिल जाए तो इसके बाद 1 से 2 छोटे चम्मच तेल व पानी डाल लें व फिर उसे ऐसे मिक्स कर दें कि वह पूरी तरह से भूरभूरा हो जाए। लो अब सत्‍तू भी हो गया तैयार। ऐसे बनाएं लिट्टी गूंथे हुए आटे की मध्यम आकार की लोइयां बना लें। फिर लोई को अंगुलियों की मदद से 2 से 3 इंच के व्यास में गोल कर लें। जिसपर एक या डेढ़ छोटी चम्मच सत्‍तू रख लें। फिर लोई को को चारों ओर से उठा कर बंद कर गोल कर दें। फिर इस गोले को हथेली की मदद से दबा कर थोड़ा चपटा कर दें। लो आपकी लिट्टी सिकने के लिए हो गई तैयार। फिर लकड़ियों या कोयले को जला कर उसे पूरी तरह से आग बना लें। जिसे जमीन या अंगीठी में रख लें। तैयार लोइयों को उस पर रख दें और पलट-पलट कर भूरी होने तक सेंकते रहें।

    चोखा ऐसे करें तैयार आलू, बैंगन और टमाटर को धोने के बाद भून लें। ठंडा होने पर इनके छिलका उतार लें। अब किसी बर्तन में रख कर चम्मच की मदद से मिक्स कर लें। फिर इसमें कटी हुई प्‍याज, हरी मिर्च, हरा धनिया पत्‍ता, नींबू, अचार, नमक व तेल डाल कर अच्छे से मिला लें। लो अब तैयार हो गया बिहार का लोकप्रिया चोखा। यदि आप अदरक और लहसुन को पसंद करते हैं तो 5 से 6 लहसुन की कलियां व अदरक का एक छोटा सा टुकड़ा बारीक काटकर इस चोखे में मिक्स कर लें।

    अब परोस दें एक प्याले में चोखा डाल दें। गर्म लिट्टी को बीच में से तोड़कर घी में डुबा दें। अब आलू, बैंगन और टमाटर के चोखा को हरी धनिए की चटनी के साथ पेश कर दें।

     

    और भी...

  • बारिश के मौसम में भूलकर भी ना खाएं ये 5 चीजें, वरना बढ़ सकती है आपकी परेशानियां

    बारिश के मौसम में भूलकर भी ना खाएं ये 5 चीजें, वरना बढ़ सकती है आपकी परेशानियां

    Health Tips : बरसात (Rainy Season) का मौसम हमें गर्मी से तो राहत देता ही है, लेकिन यह हमारे लिए कई बीमारियों को लेकर आता है। यहां ऐसी चीजों के बारे में बताया जा रहा है, जिन्हें आपको बारिश के दिनों में खाने से बचना चाहिए। आइए जानते हैं इन फूड्स (Foods) के बारे में।

    1- स्ट्रीट फूड (Street Foods) से बचे- बारिश के मौसम में स्ट्रीट फूड से बचना चाहिए, इससे आपकी सेहत को नुकसान पहुंच सकता है। बरसात में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है अगर आप ये फूड्स खाएंगे तो आपको फूड पाइजनिंग, पेट दर्द, इंफेक्शन आदि हो सकता है।

    2- ऑयली फूड (Oily Food) को करें अवॉइड - बरसात के मौसम में ज्यादा तला-भूना नहीं खाना चाहिए, इससे आपका डायजेशन काफी स्लो हो जाता है और आप खाने को बचा नहीं पाते हैं, इससे आपको गैस, कब्ज, सीने में जलन आदि की समस्या हो सकती है।

    3- दही (Curd) को कहे ना - वैसे तो दही खाना सेहत के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन बरसात के मौसम में इससे परहेज करना चाहिए। एक्सपर्ट्स की मानें तो मानसून में खाने-पीने की चीजों में बैक्टीरिया हो सकते हैं, इसे खाने से आपको पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है।

    4- कुछ हरी सब्जियों (Green Vegetables) से करें परहेज हरी सब्जियां हमारी सेहत के लिए अच्छी होती है, लेकिन बरसात में उनका सेवन करने से बैक्टीरिया और फंगस इंफेक्शन हो सकता है। इसलिए इस सीजन में पत्ता गोभी, पालक, बथुआ, मेथी जैसी सब्जियां नहीं खाना चाहिए। इनमें बारिश के मौसम में कीड़े लगने का खतरा रहता है, जो हमारी सेहत को खराब कर सकते हैं।

    5- फिश (Fish) से करें परहेज इस मौसम से मछली खाने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि मानसून में फिश खाने से फूड प्वाइजनिंग की समस्या हो सकती है।

     

    और भी...

  • इन बीमारियों की वजह से आती है खांसी, जानें हर बात जो आप इसके बारे में जानता चाहते हैं

    इन बीमारियों की वजह से आती है खांसी, जानें हर बात जो आप इसके बारे में जानता चाहते हैं

    Health Tips : वास्तव में खांसी (Cough) कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं है, बल्कि गले का साफ करने के लिए शरीर का एक मैकेनिज्म (Mechanism) होता है। समस्या तब होती है, जब बार-बार खांसी आए या लंबे समय तक खांसी से छुटकारा ना मिले। सर्दी, जुकाम और बुखार (Fever) के कारण खांसी हो सकती है, जो थोड़े दिन में ठीक हो जाती है। कभी-कभार खांसी होना किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं है, लेकिन अगर बच्चों में चार सप्ताह तक या वयस्कों में आठ सप्ताह तक लगातार खांसी की समस्या बनी रहे तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

    इसलिए होती है खांसी खांसी के बारे में गाजियाबाद स्थित संयुक्त जिला चिकित्सालय में वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक- डॉ. संजय तेवतिया बताते हैं, जब गले में म्यूकस या बाहरी तत्व जैसे धुएं या धूल के कण जमा हो जाते हैं तो गले को साफ करने के लिए एक रिफ्लक्स एक्शन के रूप में खांसी आती है, ताकि गला साफ हो जाए और सांस लेने में परेशानी ना हो। कभी-कभी खांसी आना जरूरी है ताकि आपका गला साफ रहे और म्यूकस या बाहरी तत्व बाहर निकल जाएं। जब खांसी की समस्या तीन सप्ताह से कम समय तक रहती है तो उसे एक्यूट कफ कहते हैं। लेकिन अगर खांसी तीन से आठ सप्ताह तक बनी रहे तो उसे उसे क्रॉनिक कफ कहते हैं, यह किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। खांसी दो तरह की हो सकती है-

    गीली खांसी- जब खांसी के साथ बलगम निकले तो इसे गीली खांसी कहते हैं। सामान्यता सर्दी-जुकाम और फ्लू होने पर खांसी के साथ बलगम आता है। बलगम गले, छाती, नाक, श्वसन मार्ग और फेफड़ों में जमा होता है। जब बलगम का रंग नीला-पीला हो जाए या उसके साथ खून आए तो सतर्क हो जाएं, यह किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है।

    सूखी खांसी- सूखी खांसी में बलगम नहीं निकलता है। अकसर सूखी खांसी को नियंत्रित करना कठिन होता है। सूखी खांसी की समस्या श्वसन मार्ग की सूजन या जलन के कारण हो सकती है।

    खांसी आने की वजहें

    -कईं स्थितियों के कारण खांसी की समस्या हो सकती है, ये कारण स्थायी और अस्थायी दोनों हो सकते हैं।

    -गले में जमा हुए म्यूकस या बाहरी तत्वों जैसे धूल

    -धुएं के कणों को साफ करने के लिए
    -श्वसन मार्ग का संक्रमण जैसे कोल्ड या फ्लू

    -धूम्रपान करना

    -अस्थमा

    -दवाइयों के साइड-इफेक्ट्स

    -वोकल कॉर्ड का डैमेज हो जाना

    -जीईआरडी यानी गैस्ट्रोइसोफैगियल रिफ्लक्स डिजीज

    -बैक्टीरिया का संक्रमण जैसे न्यूमोनिया, टीबी आदि गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं जैसे पल्मोनरी एंबोलिज़्म, हार्ट फेलियर, फेफड़ों का कैंसर, सीओपीडी यानी क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज
     

    और भी...