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Kawasi Lakhma Interim Bail: शराब घोटाले मामला में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व आबकारी मंत्री लखमा को दी अंतरिम जमानत, लगाईं कड़ी शर्तें...

Kawasi Lakhma Interim Bail: शराब घोटाले मामला में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व आबकारी मंत्री लखमा को दी अंतरिम जमानत, लगाईं कड़ी शर्तें...

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत की खबर सामने आई है। लंबे समय से जेल में बंद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को शीर्ष अदालत ने अंतरिम जमानत दे दी है। यह राहत उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) से जुड़े मामलों में मिली है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते हुए लखमा पर कड़ी शर्तें भी लागू की हैं, जिनका पालन अनिवार्य होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने लगाईं ये शर्तें:

अंतरिम जमानत के साथ सुप्रीम कोर्ट ने कवासी लखमा को निम्न शर्तों का पालन करने का निर्देश दिया है, जिसके मुताबिक उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहना होगा, केवल कोर्ट पेशी के लिए ही राज्य में प्रवेश की अनुमति है, अपना पासपोर्ट संबंधित प्राधिकरण के पास जमा करना होगा। वर्तमान पता और मोबाइल नंबर स्थानीय पुलिस थाने में दर्ज कराना अनिवार्य है, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में जमानत रद्द की जा सकती है।

दीपक बैज का बयान बना था चर्चा का विषय:

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज पिछले शनिवार को रायपुर सेंट्रल जेल में कवासी लखमा से मुलाकात करने पहुंचे थे। उन्होंने लखमा के स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में दीपक बैज ने कहा था “हमें पूरा भरोसा है कि फरवरी में कोर्ट से लखमा को जमानत मिलेगी। बाहर आने के बाद वे बस्तर और पूरे प्रदेश में कांग्रेस को मजबूत करेंगे।”

 “आदिवासी नेता को टारगेट किया गया”-दीपक बैज

पीसीसी चीफ दीपक बैज ने इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया था। उन्होंने कहा कि “एक आदिवासी नेता को चुनकर जेल भेजा गया है। इसके खिलाफ कांग्रेस पूरे प्रदेश में आवाज़ उठाएगी।” उन्होंने यह भी बताया कि जेल में रहते हुए लखमा की तबीयत पहले ठीक नहीं थी, लेकिन अब उनकी सेहत में सुधार है।

3,200 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का आरोप:

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान सामने आए शराब घोटाले की जांच ED कर रही है। इस मामले में ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है, जिसमें करीब 3,200 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का दावा किया गया है। ED के अनुसार तत्कालीन IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के MD एपी त्रिपाठी, कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट के जरिए शराब घोटाले को अंजाम दिया गया। FIR में कई राजनेताओं, अधिकारियों और कारोबारियों के नाम शामिल होने की बात कही गई है।

आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम जमानत के बाद अब इस मामले की आगे की सुनवाई और जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कोर्ट का अंतिम फैसला क्या रहता है और जांच एजेंसियां किस दिशा में आगे बढ़ती हैं।


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