राकेश कानूनगो, नागदा: मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग में सत्र की शुरुआत होते ही नौनिहालों के साथ क्रूरता और लापरवाही का एक मामला सामने आया है। नागदा अनुभाग के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत पारदी के शासकीय प्राथमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में मासूम बच्चे स्कूल के बंद चैनल गेट के बाहर खड़े होकर घंटों ताला खुलने का इंतजार करने को विवश हैं। कड़कड़ाती और तीखी धूप में छोटे-छोटे बच्चों को सड़क पर खड़ा रखने का यह दृश्य स्थानीय शिक्षा तंत्र की खसरा-खतौनी को सरेआम उजागर कर रहा है।
प्राचार्य का फरमान, बच्चे परेशान
स्कूल के बच्चों ने बिना कैमरे के बेहद डरे और सहमे हुए लहजे में बताया कि 15 तारीख से स्कूल खुलने के बाद से ही उनके साथ यह विधिक प्रताड़ना जारी है। स्कूल के प्राचार्य सैगर ने बच्चों को सख्त निर्देश दे रखे हैं कि वे रोजाना सुबह 8:30 से 9:00 बजे के बीच हर हाल में स्कूल पहुंच जाएं। प्राचार्य बच्चों को सुबह 9 बजे चिल्लाती धूप में बुला लेते हैं और खुद के आने का समय सुबह 10:30 से लेकर दोपहर 11:45 बजे के बीच होता है। बच्चों को हिदायत दी गई है कि हम जब तक न आएं, तुम सब गेट के बाहर ही खड़े होकर हमारा इंतजार करना।
ताला खोलने वाला कोई नहीं
इस बड़े शासकीय विद्यालय में सुरक्षा या ताला खोलने के लिए कोई भी पीयून पदस्थ नहीं है। यही कारण है कि जब तक प्राचार्य या अन्य शिक्षक अपनी मर्जी से नहीं आते, तब तक बच्चों को क्लास के भीतर बैठने का अधिकार भी नसीब नहीं होता। गांव के स्थानीय नागरिकों ने बिना कैमरे के बताया कि पारदी स्कूल में प्राचार्य सैगर का एकछत्र दबदबा चलता है। वे अपनी मर्जी के मालिक हैं, जब मन चाहता है स्कूल खोलते हैं और जब चाहते हैं ताला जड़कर ड्यूटी से नदारद हो जाते हैं। इतना ही नहीं, स्कूल के बच्चों को मिलने वाला मध्यान भोजन भी यहां समय पर मापदंडों के अनुसार प्राप्त नहीं हो रहा है।
दहशत का आलम
दबंगई का आलम यह है कि स्कूल के मासूम बच्चे प्राचार्य का नाम सुनते ही थर-थर कांपने लगते हैं। एक मासूम ने दबी जुबान में बताया कि सर उन्हें प्रताड़ित करते हैं और मारते हैं, जिसके चलते बच्चे खुलकर अपनी व्यथा अफसरों को भी नहीं बता पाते। बहरहाल, मीडिया टीम द्वारा मामले को उजागर किए जाने के बाद अब देखना यह होगा कि जिला शिक्षा अधिकारी और प्रशासनिक अमला इस निरंकुश प्राचार्य सैगर के खिलाफ निलंबन जैसी कड़ी कार्रवाई करता है, या फिर हर बार की तरह केवल एक औपचारिक कारण बताओ नोटिस जारी करके मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
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