राकेश कानूनगो,नागदा: नागदा में संचालित बहुराष्ट्रीय केमिकल कंपनी लैंक्सेस उद्योग में बुधवार की रात लगभग 9:30 बजे अचानक भीषण आग लग गई। आगजनी इतनी खौफनाक थी कि उद्योग के बेंजाइन डाइड के एचसीएल टैंक और एफएफ प्लांट को चपेट में लेते हुए आग की गगनचुंबी लपटें फैक्ट्री की बाउंड्रीवॉल से बाहर तक साफ नजर आने लगीं।
इस हादसे के कारण पूरे औद्योगिक परिसर की बिजली गुल हो गई और चारों तरफ अंधेरा छा गया। आग की लपटें देखकर आसपास के रहवासी इलाकों में दहशत और सुरक्षा को लेकर तनाव का माहौल बन गया। ग्रेसिम और लैंक्सेस सहित आसपास की निजी दमकलों ने करीब 1 घंटे की भारी मशक्कत के बाद जैसे-जैसे आग पर काबू पाया।
छिपाई गई हादसे की वजह!
आगजनी की इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद उद्योग के कप्तानों द्वारा स्थानीय प्रशासन या पुलिस को कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई।जब बाहर के लोगों ने आसमान में लपटें देखकर पुलिस को सूचित किया, तो मौके पर नायब तहसीलदार सुभाष सुनहरे और बिरलाग्राम थाना प्रभारी जितेंद्र पाटीदार दलबल के साथ पहुंचे। लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने अधिकारियों और नगरपालिका की सरकारी दमकल को भी आधे घंटे तक मुख्य गेट पर ही खड़ा रखा और अंदर प्रवेश नहीं करने दिया। थाना प्रभारी पाटीदार ने इस अनदेखी पर उद्योग को नोटिस थमाने की बात कही है।
15 दिन में दूसरी लापरवाही
बता दें कि इस संवेदनशील रासायनिक कारखाने में सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर नजर आ रही हैं। बीते 15 दिनों के अंदर यह दूसरा बड़ा हादसा है। महज दो हफ्ते पहले ही इस प्लांट में मिनी लिफ्ट पर काम करते समय दो श्रमिक ऊंचाई से नीचे गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिनमें से एक श्रमिक ओंकार का इलाज इंदौर में चल रहा है। इंडस्ट्रियल हेल्थ एंड सेफ्टी विभाग के अधिकारी हिमांशु सोलोमन द्वारा की गई जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि मिनी लिफ्ट का मुख्य पार्ट टूटा हुआ था, इसके बावजूद उस पर केवल पेंटिंग कर काम चलाया जा रहा था। इस पर विभाग ने उद्योग को पहले ही नोटिस जारी कर रखा है।
नियंत्रण में स्थिति
प्रबंधन का दावा है कि उद्योग के आपातकालीन सुरक्षा दल ने तुरंत कमान संभालते हुए आग पर पूरी तरह काबू पा लिया है और वर्तमान में उत्पादन को सुधारने का प्रयास जारी है। इस हादसे में किसी भी श्रमिक या कर्मचारी के घायल होने या जनहानि की कोई सूचना नहीं है। आग लगने के वास्तविक कारणों की तकनीकी जांच की जा रही है, जिसके बाद ही विस्तृत डेटा साझा किया जाएगा। हालांकि, घटना के बाद से ही शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने मीडिया के कैमरों से दूरी बना रखी है।
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