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आत्मानंद विद्यालयों के संविदा शिक्षकों का प्रदर्शन, सेवा सुरक्षा और नियमितीकरण को लेकर उठाई आवाज

आत्मानंद विद्यालयों के संविदा शिक्षकों का प्रदर्शन, सेवा सुरक्षा और नियमितीकरण को लेकर उठाई आवाज

 

रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में कार्यरत संविदा शिक्षक और कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राजधानी रायपुर के तूता धरना स्थल पर दो दिवसीय सांकेतिक आंदोलन शुरू किया। प्रदेशभर से पहुंचे शिक्षकों और कर्मचारियों ने सरकार से सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान करने और स्थायी नीति लागू करने की मांग की।

प्रदेशभर के शिक्षक हुए आंदोलन में शामिल

छत्तीसगढ़ स्वामी आत्मानंद संविदा शिक्षक एवं कर्मचारी संघ के नेतृत्व में आयोजित इस धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शिक्षक और कर्मचारी शामिल हुए। संगठन का दावा है कि राज्य के विभिन्न जिलों से करीब 8 हजार कर्मचारी आंदोलन में पहुंचे और अपनी मांगों के समर्थन में एकजुटता दिखाई।

सरकार के सामने रखी गईं पांच प्रमुख मांगें

प्रदर्शन के दौरान संगठन ने राज्य सरकार के समक्ष पांच प्रमुख मांगें रखीं—

संविदा शिक्षकों एवं कर्मचारियों का नियमितीकरण।
कार्य के अनुरूप वेतनमान तय किया जाए।
प्रत्येक वर्ष वार्षिक वेतन वृद्धि लागू की जाए।
स्वास्थ्य बीमा, पेंशन, अवकाश और सेवा सुरक्षा जैसी सुविधाएं प्रदान की जाएं।
सेवा शर्तों में संशोधन कर सम्मानजनक और सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

'सम्मान और भविष्य की सुरक्षा चाहिए'

संघ के प्रदेश अध्यक्ष दुर्योधन यादव ने कहा कि वर्षों से आत्मानंद विद्यालयों में कार्यरत संविदा कर्मचारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दे रहे हैं, लेकिन आज भी वे अस्थायी सेवा, कम वेतन और भविष्य की असुरक्षा जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य केवल कर्मचारियों के अधिकारों की मांग करना है।

विद्यालयों की सफलता में संविदा कर्मचारियों की अहम भूमिका

संघ के संरक्षक कमल वर्मा ने कहा कि आत्मानंद विद्यालयों की उपलब्धियों में संविदा शिक्षकों और कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान है। ऐसे में सरकार को उनके हितों की रक्षा करते हुए स्थायी समाधान निकालना चाहिए।

वहीं महासचिव हरिओम शर्मा ने कहा कि संगठन संवाद के माध्यम से समाधान चाहता है, लेकिन यदि मांगों पर निर्णय में देरी होती है तो आंदोलन का स्वरूप आगे बढ़ाया जाएगा।

कई संगठनों ने जताया समर्थन

धरना-प्रदर्शन को विभिन्न कर्मचारी, शिक्षक और सामाजिक संगठनों का भी समर्थन मिला। वक्ताओं ने कहा कि यह केवल संविदा कर्मचारियों का मुद्दा नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में कार्यरत हजारों कर्मचारियों के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा विषय है।

सरकार के रुख के बाद तय होगी अगली रणनीति

संघ के मीडिया प्रभारी राहुल कुमार पाण्डेय ने बताया कि आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है। यदि सरकार की ओर से सकारात्मक पहल नहीं होती है तो संगठन आगामी दिनों में लोकतांत्रिक तरीके से आगे की रणनीति तय करेगा।

धरना स्थल पर प्रदर्शनकारियों ने "नियमितीकरण हमारा अधिकार है", "सम्मानजनक सेवा हमारा अधिकार है" और "शिक्षक का सम्मान, शिक्षा का सम्मान" जैसे नारों के साथ अपनी मांगों को दोहराया।


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