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Iran-US Talks: 6 अरब डॉलर के फंड और परमाणु जांच पर स्विट्जरलैंड में होगी अहम बातचीत

Iran-US Talks: 6 अरब डॉलर के फंड और परमाणु जांच पर स्विट्जरलैंड में होगी अहम बातचीत

Iran-US Talks: अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए अंतरिम शांति समझौते के बाद अब दोनों देशों के प्रतिनिधि स्विट्जरलैंड में आमने-सामने बैठने जा रहे हैं। इस बैठक को पश्चिम एशिया में स्थिरता और शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वार्ता के केंद्र में ईरान का परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे रहेंगे।

परमाणु ठिकानों की जांच चाहता है अमेरिका

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका चाहता है कि ईरान संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निरीक्षकों को उन संवेदनशील स्थलों का निरीक्षण करने की अनुमति दे, जहां संवर्धित यूरेनियम छिपाए जाने की आशंका जताई जाती रही है। ये वही ठिकाने हैं जो पहले अमेरिका और इजरायल के निशाने पर रहे हैं। बताया जा रहा है कि जून 2025 के बाद से संयुक्त राष्ट्र की निरीक्षण टीम इन स्थलों तक नहीं पहुंच सकी है। ऐसे में अमेरिका इस मुद्दे को वार्ता का सबसे अहम एजेंडा मान रहा है।

बदले में मिलेगा 6 अरब डॉलर के फंड का एक्सेस

यदि ईरान निरीक्षण के लिए सहमत होता है, तो अमेरिका उसे कतर में फ्रीज किए गए लगभग 6 अरब डॉलर के फंड तक सीमित पहुंच देने पर विचार कर सकता है। हालांकि इस राशि का उपयोग केवल मानवीय जरूरतों, जैसे खाद्य सामग्री, दवाइयों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीद के लिए किया जा सकेगा।विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रस्ताव दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

कौन-कौन होगा बैठक में शामिल?

स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में होने वाली इस बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस हिस्सा लेंगे। वहीं ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और केंद्रीय बैंक प्रमुख अब्दोलनासेर हेम्मती शामिल होंगे।इसके अलावा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर भी मध्यस्थ देश के प्रतिनिधियों के रूप में मौजूद रहेंगे।

60 दिनों में समाधान तलाशने की कोशिश

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच हुए अंतरिम समझौते के तहत दोनों देशों ने विवादित मुद्दों को सुलझाने के लिए 60 दिनों का समय तय किया है। इस अवधि में परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों में ढील, लेबनान संघर्ष और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर ठोस सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी।

बातचीत के सामने मौजूद हैं चुनौतियां

हालांकि वार्ता को लेकर उम्मीदें जताई जा रही हैं, लेकिन कई चुनौतियां भी सामने हैं। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों में आशंका जताई गई है कि इजरायल की राजनीतिक परिस्थितियां इस प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष शुरुआती दौर में भरोसे का माहौल बनाने में सफल रहते हैं, तो आने वाले दो महीने पश्चिम एशिया की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।स्विट्जरलैंड में होने वाली यह बैठक सिर्फ अमेरिका और ईरान के रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता से जुड़ी हुई है। परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक प्रतिबंधों पर बनने वाली सहमति आने वाले समय में क्षेत्रीय राजनीति की दिशा तय कर सकती है।


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