Ukraine Attack On Russia: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन ने एक बार फिर रूस की राजधानी मॉस्को को निशाना बनाकर बड़ा संदेश दिया है। मॉस्को स्थित ऑयल रिफाइनरी पर हुए ड्रोन हमले के बाद यूक्रेन ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय रक्षा प्रदर्शनी ‘यूरोसैटरी-2026’ में इस हमले का वीडियो सार्वजनिक कर दिया। वीडियो में तेल भंडारण टैंकों में भीषण विस्फोट और आग की लपटें साफ दिखाई दे रही हैं। इस कदम को यूक्रेन की ओर से रूस को खुली चुनौती और अपनी आधुनिक ड्रोन क्षमता का प्रदर्शन माना जा रहा है।
200 से अधिक ड्रोन से हमला, रिफाइनरी में लगी भीषण आग
जानकारी के अनुसार यूक्रेन ने मॉस्को के कपोटन्या क्षेत्र स्थित ऑयल रिफाइनरी को निशाना बनाया। हमले में 200 से अधिक ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि फ्यूल स्टोरेज टैंक की छत हवा में उछल गई और पूरे इलाके में काला धुआं फैल गया। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई जबकि 15 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। बीते दो महीनों में यह रूस की 15वीं तेल रिफाइनरी या ऑयल टर्मिनल है, जिसे यूक्रेन ने निशाना बनाया है।
जेलेंस्की की चेतावनी, पुतिन को दिया सीधा संदेश
हमले के बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि यदि रूस युद्ध जारी रखना चाहता है तो यूक्रेन भी जवाब देना जानता है। जेलेंस्की ने कहा कि रूस को अब युद्ध समाप्त करने और बातचीत का रास्ता अपनाने की जरूरत है। दूसरी ओर रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इस हमले का जवाब देने की चेतावनी दी है। गौरतलब है कि यह हमला ऐसे समय हुआ जब जी-7 सम्मेलन के दौरान जेलेंस्की और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच महत्वपूर्ण मुलाकात हुई थी।
मॉस्को में हड़कंप, सैकड़ों उड़ानें प्रभावित
ड्रोन हमले के बाद मॉस्को के प्रमुख हवाई अड्डों पर सुरक्षा कारणों से कई उड़ानों को रोक दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 550 उड़ानें रद्द या प्रभावित हुईं। रूस के रक्षा मंत्रालय का दावा है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने लगभग 1000 यूक्रेनी ड्रोन को मार गिराया। हालांकि कुछ ड्रोन अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहे, जिससे रिफाइनरी परिसर में आग भड़क गई।
युद्ध में नई रणनीति का संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस की ऊर्जा अवसंरचना पर लगातार हो रहे हमले यूक्रेन की नई सैन्य रणनीति का हिस्सा हैं। इसका उद्देश्य रूस की आर्थिक और लॉजिस्टिक क्षमता को कमजोर करना है। मॉस्को के करीब हुई इस घटना ने यह भी दिखाया है कि युद्ध अब केवल सीमावर्ती क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रूस की राजधानी भी इसके प्रभाव से अछूती नहीं है।