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US-Iran Deal 2026: ट्रंप और पेजेश्कियान ने 14 सूत्रीय समझौते पर किए हस्ताक्षर, ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम’ में पाकिस्तान का भी जिक्र

US-Iran Deal 2026: ट्रंप और पेजेश्कियान ने 14 सूत्रीय समझौते पर किए हस्ताक्षर, ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम’ में पाकिस्तान का भी जिक्र

US-Iran Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने 14 सूत्रीय समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस समझौते का नाम ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग बिटवीन यूनाइटेड स्टेट्स एंड इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान’ रखा गया है, जिसके कारण पाकिस्तान का नाम भी चर्चा का विषय बन गया है। यह समझौता फ्रांस में आयोजित G-7 बैठक के दौरान अंतिम रूप दिया गया। दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर आगे की बातचीत के लिए 60 दिनों की प्रक्रिया शुरू करने का प्रावधान किया गया है।

अमेरिका-ईरान MoU: क्या हैं 14 प्रमुख शर्तें?

अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौता ज्ञापन (MoU) को दोनों देशों के संबंधों में एक संभावित ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है। इस दस्तावेज़ में सैन्य संघर्ष समाप्त करने, आर्थिक प्रतिबंध हटाने, परमाणु कार्यक्रम पर सहमति और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल किए गए हैं।

 1. सैन्य कार्रवाई का स्थायी अंत

समझौते के तहत दोनों देश सभी प्रकार की सैन्य कार्रवाइयों को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त करने पर सहमत होंगे। साथ ही भविष्य में एक-दूसरे के खिलाफ कोई सैन्य अभियान शुरू नहीं करने का वचन देंगे।

2. संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान

अमेरिका और ईरान एक-दूसरे की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने की प्रतिबद्धता जताएंगे।

3. 60 दिनों में अंतिम समझौते का लक्ष्य

दोनों पक्ष 60 दिनों के भीतर विस्तृत और अंतिम समझौते को तैयार करने तथा लागू करने के लिए बातचीत जारी रखेंगे।

4. नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने की प्रक्रिया

MoU लागू होते ही अमेरिका ईरान पर लगाए गए समुद्री प्रतिबंधों और नाकेबंदी को हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा, जिसे 30 दिनों के भीतर पूरा करने का प्रस्ताव है।

5. क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी

अंतिम समझौते के 30 दिनों के भीतर अमेरिका ईरान के आसपास तैनात अपनी सैन्य उपस्थिति को कम करने और बलों को हटाने पर सहमत होगा।

6. व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग

ईरान, फारस की खाड़ी और ओमान सागर के बीच आवागमन करने वाले वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित और निर्बाध मार्ग उपलब्ध कराएगा।

 7. 300 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता योजना

अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए व्यापक योजना तैयार की जाएगी। इसके लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की फंडिंग सुनिश्चित करने का प्रस्ताव रखा गया है।

8. प्रतिबंधों को समाप्त करने का वादा

अमेरिका, ईरान पर लगाए गए विभिन्न आर्थिक और वित्तीय प्रतिबंधों को हटाने की दिशा में काम करेगा, जिसमें अंतरराष्ट्रीय और एकतरफा प्रतिबंध भी शामिल हैं।

9. प्रतिबंध हटाने पर तत्काल वार्ता

दोनों देश प्रतिबंधों को समाप्त करने की प्रक्रिया पर तुरंत चर्चा शुरू करेंगे और आपसी सहमति बनाने का प्रयास करेंगे।

10. परमाणु हथियार नहीं बनाएगा ईरान

ईरान ने आश्वासन दिया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। इसके साथ ही संवर्धित परमाणु सामग्री के प्रबंधन के लिए अलग तंत्र विकसित किया जाएगा।

11. यूरेनियम संवर्धन पर चर्चा

दोनों पक्ष ईरान की शांतिपूर्ण परमाणु आवश्यकताओं और यूरेनियम संवर्धन से जुड़े मुद्दों पर अंतिम समझौते के तहत चर्चा करेंगे।

 12. तेल निर्यात को राहत

अमेरिका, प्रतिबंध हटने तक ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात के लिए आवश्यक छूट और बैंकिंग सेवाओं की अनुमति देगा।

 13. फ्रीज संपत्तियों की रिहाई

ईरान की प्रतिबंधित और फ्रीज की गई संपत्तियों को चरणबद्ध तरीके से जारी करने पर दोनों देश सहमत होंगे।
 
14. निगरानी और UNSC की मंजूरी

समझौते के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए विशेष एग्जिक्यूटिव मैकेनिज्म बनाया जाएगा तथा अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की मंजूरी दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

क्या बदल सकता है इस समझौते से?

यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो मध्य-पूर्व में लंबे समय से चली आ रही भू-राजनीतिक तनाव की स्थिति में कमी आ सकती है। साथ ही वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल कीमतों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

अमेरिकी पक्ष ने क्या कहा?

अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस समझौते का उद्देश्य मध्य पूर्व में स्थिरता बहाल करना और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित बनाना है। अधिकारियों का कहना है कि यदि ईरान अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करता है, तो उसे आर्थिक प्रतिबंधों में अतिरिक्त राहत दी जा सकती है।

ईरान की प्रतिक्रिया

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघई ने पुष्टि की कि समझौते के मसौदे को अंतिम रूप देकर दोनों देशों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि ओमान समेत कई मध्यस्थ देशों के सहयोग से महीनों से बातचीत चल रही थी। बाघई के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की संप्रभुता और अधिकारों को बरकरार रखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाने पर सहमति बनी है।

परमाणु कार्यक्रम पर क्या होगा?

समझौते में ईरान ने दोहराया है कि वह परमाणु हथियार विकसित या हासिल नहीं करेगा। साथ ही, अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में ईरान के यूरेनियम भंडार के भविष्य पर चर्चा जारी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो इससे मध्य पूर्व में तनाव कम होगा और वैश्विक तेल बाजार को भी स्थिरता मिल सकती है।

क्यों चर्चा में है ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम’?

इस समझौते का आधिकारिक नाम ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम’ रखा गया है, जिससे पाकिस्तान का नाम अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक चर्चाओं में आ गया है। हालांकि दस्तावेज में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन नामकरण को लेकर राजनीतिक और रणनीतिक हलकों में बहस शुरू हो गई है। ट्रंप और पेजेश्कियान के बीच हुआ यह 14 सूत्रीय समझौता अमेरिका-ईरान संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। यदि आगामी 60 दिनों में अंतिम समझौता सफलतापूर्वक संपन्न होता है, तो यह मध्य पूर्व की राजनीति, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।


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