सीहोर : मध्य प्रदेश के किसान मूंग की खरीदी को लेकर आज सड़कों पर उतरे और सरकार - प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आंदोलन में करीब 5 हजार किसान 2 हजार ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ शामिल हुए और अपनी मांगों को लेकर खुली चेतवानी देते हुए कहा कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होगी। तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
सरकार कर रही केवल 25 प्रतिशत खरीदी
बता दें कि प्रदेश में सरकार द्वारा ग्रीष्मकालीन मूंग की केवल 25 प्रतिशत खरीदी की जा रही है। जिससे किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। इसी के चलते आज बड़ी संख्या में भैरुंदा क्षेत्र में किसान एकत्रित हुए और धरना-प्रदर्शन कर चक्काजाम किया। प्रदर्शन में शामिल किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ राशन, गैस सिलेंडर, चूल्हे और तंबू लेकर पहुंचे। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा।
सीमित खरीदी नीति से हो रहा नुकसान
किसानों का आरोप है कि सीमित खरीदी नीति से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनकी मांग है कि पहले की तरह मूंग की 100 प्रतिशत खरीदी सुनिश्चित की जाए और प्रति एकड़ 6 क्विंटल खरीदी का प्रावधान लागू किया जाए। साथ ही ई-टोकन सिस्टम को पूरी तरह से बंद की जाए। किसानों का कहना है कि स्लॉट बुकिंग के दौरान कई तरह की दिक्कत आती है। जिसकी वजह से उन्हें बार बार कियोस्क सेंटर के चक्कर लगाने पड़ते है।
आंदोलन और होगा उग्र
इधर, "डेरा डालो-घेरा डालो" आंदोलन को लेकर किसान स्वराज संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन को भोपाल तक विस्तारित किया जाएगा। इतना ही नही आंदोलन के चलते आज कृषि उपज मंडी भैरुंदा में नीलामी प्रक्रिया भी प्रभावित हुई। हालांकि मंडी प्रशासन ने किसानों को इसकी सूचना पहले ही दे दी थी।
ये है किसानों की प्रमुख मांगें
= मूंग खरीदी नीति में संशोधन कर 100 प्रतिशत खरीदी सुनिश्चित की जाए तथा प्रति एकड़ 6 क्विंटल का नियम लागू किया जाए।
=ई-टोकन व्यवस्था समाप्त की जाए और खाद (यूरिया, डीएपी) की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
=खरीफ सीजन में मक्का और सोयाबीन की एमएसपी पर खरीदी की ठोस योजना बनाई जाए।
=गोपालपुर सिंचाई परियोजना को शीघ्र पूरा किया जाए।
=इंदौर-बुधनी रेलवे लाइन सहित अन्य भू-अर्जन में किसानों को चार गुना मुआवजा दिया जाए।