रायपुर। देश में अंडों की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। पोल्ट्री कारोबारियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, महंगे पोल्ट्री फीड और विटामिन की बढ़ती लागत के कारण अंडों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। छत्तीसगढ़ में थोक बाजार में अंडा करीब 6.55 रुपये प्रति नग बिक रहा है, जबकि खुदरा बाजार में इसकी कीमत 7.50 से 8 रुपये प्रति नग तक पहुंच गई है।
अंतरराष्ट्रीय हालात का पड़ा असर
पोल्ट्री कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़े तनाव और आयातित उत्पादों की महंगाई का असर पोल्ट्री उद्योग पर भी पड़ा है। विशेष रूप से विदेशों से आने वाले विटामिन और अन्य पोषक तत्वों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई है।
गर्मी से घटी उत्पादन क्षमता
इस वर्ष भीषण गर्मी के चलते मुर्गियों का अंडा उत्पादन प्रभावित हुआ। छत्तीसगढ़ में सामान्य दिनों में प्रतिदिन लगभग 80 लाख अंडों का उत्पादन होता है, लेकिन गर्मी के कारण उत्पादन में करीब 20 लाख अंडों प्रतिदिन की कमी दर्ज की गई। इससे बाजार में आपूर्ति घटने और कीमत बढ़ने की स्थिति बनी।
छत्तीसगढ़ से दूसरे राज्यों में भी जाती है बड़ी खेप
राज्य में तैयार होने वाले लगभग 45 से 50 प्रतिशत अंडों की सप्लाई दूसरे राज्यों में की जाती है, जबकि शेष अंडों की खपत प्रदेश के भीतर होती है। बाजार में मांग और सीमित आपूर्ति के कारण खुदरा कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।
पोल्ट्री फीड और विटामिन हुए महंगे
पोल्ट्री उद्योग की लागत बढ़ने का सबसे बड़ा कारण मुर्गियों के चारे और विटामिन की कीमतों में उछाल है।
मक्का का दाम 19 रुपये से बढ़कर 26 रुपये प्रति किलो हो गया।
कनकी 16 रुपये से बढ़कर 23 रुपये प्रति किलो पहुंच गई।
आयातित विटामिन की कीमत 500-600 रुपये से बढ़कर 1100-1200 रुपये प्रति किलो तक हो गई।
इन बढ़ी हुई लागतों का सीधा असर अंडों की कीमत पर पड़ा है।
मानसून में मिल सकती है राहत
पोल्ट्री कारोबारियों का मानना है कि मानसून के दौरान मौसम अनुकूल रहने पर मुर्गियों का उत्पादन बढ़ सकता है। यदि उत्पादन सामान्य स्तर पर पहुंचा तो आने वाले समय में अंडों की कीमतों में कुछ राहत मिलने की संभावना है।
विशेषज्ञों की राय
पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि वर्तमान समय में उत्पादन लागत काफी बढ़ चुकी है। चारे, विटामिन और अन्य आवश्यक सामग्रियों के महंगे होने के कारण अंडों के दाम बढ़ाना मजबूरी बन गया है। हालांकि मानसून के दौरान उत्पादन सुधरने पर कीमतों में कुछ गिरावट आ सकती है।