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छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान खरीदी, 60 दिनों में 1.68 लाख किसानों का धान खरीदने की चुनौती; टोकन नियम भी बदले

छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान खरीदी, 60 दिनों में 1.68 लाख किसानों का धान खरीदने की चुनौती; टोकन नियम भी बदले

छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। प्रदेश में 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू होगी, जो 15 जनवरी 2027 तक चलेगी। जिले में महज 60 दिनों के भीतर 1 लाख 68 हजार 900 से अधिक पंजीकृत किसानों से धान खरीदने की तैयारी है। इसके लिए कुल 181 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं। कम समय में इतने बड़े स्तर पर खरीदी पूरी करना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती होगी।

इस बार धान खरीदी की प्रक्रिया में कुछ अहम बदलाव किए गए हैं। किसानों को टोकन लेने के लिए अधिक सुविधा देने के साथ ही खरीदी के बाद धान का उठाव करने की व्यवस्था लागू की जा रही है। इससे खरीदी केंद्रों पर भंडारण और परिवहन की जिम्मेदारी बढ़ने वाली है। शासन ने प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी का प्रावधान किया है।

कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने समय-सीमा की बैठक में तैयारियों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को खरीदी शुरू होने से पहले सभी जरूरी इंतजाम पूरे करने के निर्देश दिए हैं।

तुंहर टोकन ऐप से अपनी पसंद की तारीख चुन सकेंगे किसान

इस बार किसानों को टोकन लेने के लिए पहले से तय तारीख पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। वे 'तुंहर टोकन' मोबाइल ऐप के जरिए अपनी सुविधा के अनुसार धान बेचने की तारीख का चयन कर सकेंगे। मोबाइल ऐप से टोकन जारी करने की शुरुआत 10 नवंबर से होगी।

टोकन जारी करने के लिए 70 प्रतिशत हिस्सेदारी मोबाइल ऐप को और 30 प्रतिशत टोकन समिति के माध्यम से दिए जाएंगे। इसके अलावा किसान के पंजीकृत रकबे के आधार पर टोकन की संख्या तय की गई है।

2 एकड़ तक रकबा होने पर 1 टोकन मिलेगा।

2 से 10 एकड़ तक रकबे पर 2 टोकन मिलेंगे।

10 एकड़ से अधिक रकबे पर 3 टोकन दिए जाएंगे।

इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को अपनी सुविधा के मुताबिक धान बिक्री की तारीख चुनने का अवसर देना है।

खरीदी के दौरान नहीं होगा धान का उठाव, केंद्रों पर बढ़ेगा दबाव

इस बार धान खरीदी की व्यवस्था में सबसे अहम बदलाव उठाव को लेकर किया गया है। अवैध धान की आवक रोकने और कस्टम मिलिंग प्रक्रिया पर निगरानी मजबूत करने के लिए खरीदी के दौरान केंद्रों से धान का उठाव नहीं किया जाएगा। खरीदी पूरी होने के बाद ही धान का उठाव किया जाएगा।

इस बदलाव के चलते उपार्जन केंद्रों में बड़ी मात्रा में धान जमा रहेगा। ऐसे में धान को सुरक्षित रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होगा। अधिकारियों को सभी केंद्रों पर व्यवस्थित स्टेकिंग, जल निकासी और तिरपाल की पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बारिश और नमी से धान को नुकसान न पहुंचे।

अवैध धान बेचने वालों और बिचौलियों पर रहेगी नजर

धान खरीदी के दौरान दूसरे राज्यों से अवैध धान की आवक और बिचौलियों की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए प्रशासन निगरानी बढ़ाएगा। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि उपार्जन केंद्रों पर केवल वास्तविक किसानों से नियमानुसार धान खरीदा जाए।

किसानों को केंद्रों पर किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए भी जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने को कहा गया है। सभी व्यवस्थाओं की जांच चेकलिस्ट के आधार पर की जाएगी।

हर दिन करीब 3 हजार किसानों से खरीदी का लक्ष्य

जिले में 60 दिनों के भीतर 1 लाख 68 हजार 900 से अधिक किसानों से धान खरीदना है। इस हिसाब से प्रतिदिन औसतन करीब 2,815 किसानों का धान खरीदना होगा। इसके लिए 181 केंद्रों पर लगातार खरीदी की रफ्तार बनाए रखना जरूरी होगा।

बारदाने की उपलब्धता, हमालों की तैनाती, इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन, परिवहन, सुरक्षित भंडारण और किसानों को समय पर भुगतान जैसी व्यवस्थाएं इस पूरी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाएंगी।

खास बात यह है कि खरीदी के बाद ही धान का उठाव होने से केंद्रों में जगह की उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है। यदि परिवहन और भंडारण की व्यवस्था समय पर नहीं हुई तो खरीदी प्रभावित होने की आशंका रहेगी।

नई व्यवस्था से किसानों को कितनी राहत मिलेगी?

प्रशासन का प्रयास है कि टोकन व्यवस्था में बदलाव से किसानों को धान बेचने में सहूलियत मिले और खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। वहीं, खरीदी के बाद उठाव की व्यवस्था से अवैध धान और कस्टम मिलिंग पर निगरानी मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

अब चुनौती यह होगी कि 181 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से निर्धारित 60 दिनों में सभी पंजीकृत किसानों से सुचारू रूप से धान खरीदा जा सके। नई व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है, इसका पता खरीदी शुरू होने के बाद ही चलेगा।


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