Naxal Surrender in Bastar: जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को आज एक बड़ी सफलता मिलने जा रही है। प्रशासन और पुलिस की संयुक्त पहल ‘पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन’ के तहत दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के 108 माओवादी कैडर हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होंगे। जानकारी के मुताबिक, यह सामूहिक आत्मसमर्पण कार्यक्रम जगदलपुर स्थित बस्तर रेंज मुख्यालय में दोपहर 2 बजे आयोजित किया जाएगा, जिसमें समाज के वरिष्ठ जनों और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी रहेगी।
खुफिया इनपुट से मिली बड़ी सफलता:
पुलिस अधिकारियों के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी कैडरों से मिली सूचनाओं और खुफिया इनपुट के आधार पर नक्सल विरोधी अभियानों के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी डंप बरामदगी की गई है। बस्तर रेंज के कई जिलों, विशेषकर बीजापुर समेत अन्य इलाकों से बरामद हथियारों और विस्फोटक सामग्री को भी कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शित किया जाएगा।
नक्सली AK-47 के साथ करेंगे आत्मसमर्पण:
इसी कार्यक्रम में कांकेर जिले में सक्रिय तीन नक्सली भी आत्मसमर्पण करेंगे, जिनमें दो डीवीसीएम (DVCM) रैंक के माओवादी शामिल हैं। ये तीनों नक्सली अपने साथ 3 AK-47 राइफल भी पुलिस को सौंपेंगे।
कांकेर में घट रही नक्सलियों की संख्या:
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस आत्मसमर्पण के बाद कांकेर जिले में सक्रिय हथियारबंद नक्सलियों की संख्या घटकर सिर्फ 21 रह जाएगी। प्रशासन ने 31 मार्च से पहले कांकेर को नक्सल मुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ अभियान को और तेज कर दिया है।
पुनर्वास योजना से बढ़ रहा भरोसा:
‘पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन’ पहल के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास नीति के अनुसार आर्थिक सहायता, कौशल प्रशिक्षण और समाज में पुनर्स्थापन की सुविधा दी जाती है। अधिकारियों का कहना है कि इस योजना के कारण बड़ी संख्या में माओवादी हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन की ओर लौटने के लिए आगे आ रहे हैं।