बाबा मंसूर शाह : मध्यप्रदेश से राज्यसभा सांसद और मोदी सरकार में केंन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर के शाही राज परिवार सिंधिया परिवार के मुखिया है। बीते रविवार को सिंधिया दिल्ली से ग्वालियर पहुंचे और सीधे अपने कुलगुरू बाबा मंसूर शाह के दर पर माथा टेका। महाराज सिंधिया ने अपने पूराने महल जो कभी सचिवालय हुआ करता था वहां बाबा मंसूर शाह की पारंपरिक तरीके से पूरा अर्चना की इसके बाद वह सीधे अपनी कुलदेवी मांढरे की माता के मंदिर पहुंचे और पूजा अर्चना की।
ग्वालियर का सिंधिया राजघराना बीते करीब 300 सालों से बाबा मंसूर शाह की भक्ति करता आया है। राजघराने का मुखिया बाबा मंसूर शाह के दर पर सिर झुकाने जरूर आता है जो सिलसिला आज भी जारी है। महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया से पहले उनके पिता माधवराव सिंधिया बाबा मंसूर शाह के दर पर पूजा करने जाते थें उनके निधन के बाद यह ज्योतिरादित्या सिंधिया ने यह सिलसिला जारी रखा।
कौन है बाबा मंसूर शाह
बाबा मंसूर शाह एक सूफी संत थे। जो महाराष्ट्र के बीड जिले में रहते थे। कई सालों पहले की बात है जब सिंधिया परिवार पेशवाओं की सेना का हिस्सा हुआ करता था। सिंधिया परिवार पहले सतारा जिले के एक गांव में रहा करता था और पेशवाओं की सेवा करता था। सिंधिया परिवार के संस्थापक महादजी सिंधिया एक बार मुगलों से जंग लड़ने गए थे। उस दौरान कई सैनिक मारे गए, युद्ध के दौरान जब महादजी नहीं लौटे तो तो उनकी मां और पत्नी फकीर मंसूर शाह के दर पर पहुंची और अपनी व्यथा सुनाई। तब बाबा मंसूर शाह ने कहा की उन्हें कुछ नहीं हुआ है वह लौट आएंगे आप इंतजार किजिए। इतना कहते ही चम्त्कार हुआ सामने से राने खा नामक युवक घायल महाद जी को लेकर बाबा के दरबार पहुंचा।
बाबा ने सिंधिया को दी आधी रोटी
बताया जाता है कि जब महादजी लौटकर आए तब बाबा मंसूर शाह ने उन्हें अपनी आधी रोटी तोड़कर दी थी। और कहा था कि राजा बनोगे, तुम्हारी पांच पीढियां राज करेंगी। इसके बाद महादजी सिंधिया ने आधी रोटी अपने पूजा घर में रख दी और उसकी पूजा करने लगा। इसके बाद कालान्तर में महादजी सिंधिया ने सिंधिया डायनेस्टी की स्थापना की। सबसे पहले उन्होंने उज्जैन को पहली राजधानी बनाई इसके बाद ग्वालियर में आकर रहने लगे। इस दौरान वह बाबा मंसूर शाह की निशानी स्वरूप आधी रोटी भी ग्वालियर ले आए और देवघर बनाकर उसकी पूजा करने लगे। सिंधिया परिवार ने ग्वालियर में गोरखी महल का निर्माण कराया और बाबा मंसूर शाह की स्मृति की स्थापना की। जहां आज भी बाबा मंसूर शाह की दी हुई आधी रोटी की पूजा की जाती है। देवघर में बाबा मंसूर शाह का एक अंगवस्त्र भी स्थापित है।
कहा जाता है कि बाबा मंसूर शाह के आशीर्वाद से ही सिंधिया राजपरिवार स्थापित हुआ है। सिंधिया राजघराना आज भी बाबा मंसूर शाह की पूजा करता आया है। बताया जाता है कि पूजा के दौरान जब तक उससे फूल नीचे नहीं गिर जाते तब तक उसके ऊपर चंवर डुलाते रहते है। फूल नीचे गिरने के बाद उन फूलों को महल में लेजाकर पूजा घर में रख दिया जाता है।