होम
देश
दुनिया
राज्य
खेल
अध्यात्म
मनोरंजन
सेहत
जॉब अलर्ट
जरा हटके
फैशन/लाइफ स्टाइल

 

सीमा विवाद सुलझाने की तैयारी या नया विवाद? भारत-म्यांमार प्रस्ताव पर मणिपुर में बवाल

सीमा विवाद सुलझाने की तैयारी या नया विवाद? भारत-म्यांमार प्रस्ताव पर मणिपुर में बवाल

नई दिल्ली। भारत और म्यांमार के बीच वर्षों से लंबित सीमा निर्धारण (Border Demarcation) का मामला एक बार फिर चर्चा में है। दोनों देशों के बीच सीमा के कुछ अनसुलझे हिस्सों को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत जारी है। इसी बीच ऐसी रिपोर्टें सामने आई हैं कि कुछ क्षेत्रों में जमीन की अदला-बदली (Land Swap) के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि सरकार ने इस तरह के किसी प्रस्ताव की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन इस मुद्दे ने मणिपुर में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस वार्ता में कहा कि भारत-म्यांमार सीमा के कुछ हिस्से अब भी पूरी तरह तय नहीं हो सके हैं और इन्हें लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। उन्होंने जमीन की अदला-बदली संबंधी खबरों की पुष्टि नहीं की, लेकिन यह जरूर माना कि सीमा निर्धारण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

क्या है जमीन की अदला-बदली का प्रस्ताव?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मणिपुर के चंदेल जिले और म्यांमार के सगाइंग क्षेत्र के बीच स्थित बॉर्डर पिलर 65 से 68 के बीच लगभग 1.4 वर्ग मील क्षेत्र को लेकर समाधान तलाशा जा रहा है। यह इलाका सीमा निर्धारण के दौरान लंबे समय से विवादित माना जाता है। हालांकि भारत सरकार की ओर से अब तक इस प्रस्ताव पर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह सीमा?

भारत और म्यांमार के बीच करीब 1,643 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जो अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम से होकर गुजरती है। गृह मंत्रालय के अनुसार, लगभग 1,472 किलोमीटर सीमा का सीमांकन हो चुका है, जबकि करीब 171 किलोमीटर हिस्सा अब भी पूरी तरह तय नहीं हो पाया है। सरकार का उद्देश्य सीमा निर्धारण पूरा कर वहां प्रभावी निगरानी और बाड़बंदी (Border Fencing) को आगे बढ़ाना है, ताकि अवैध घुसपैठ, तस्करी और उग्रवादी गतिविधियों पर नियंत्रण मजबूत किया जा सके।

फ्री मूवमेंट रिजीम खत्म होने के बाद बढ़ा फोकस

भारत ने वर्ष 2024 में भारत-म्यांमार सीमा पर फेंसिंग की योजना की घोषणा की थी। इसके साथ ही फ्री मूवमेंट रिजीम (FMR) को भी समाप्त करने का फैसला लिया गया, जिसके तहत सीमा से जुड़े जनजातीय समुदाय बिना वीजा सीमित दूरी तक आवाजाही कर सकते थे। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था सीमा सुरक्षा को और मजबूत करेगी।

मणिपुर में विरोध क्यों शुरू हुआ?

जमीन की अदला-बदली की चर्चाओं के बाद मणिपुर के कई सामाजिक संगठनों ने इसका विरोध जताया है। COCOMI (Coordinating Committee on Manipur Integrity) ने कहा है कि राज्य की क्षेत्रीय अखंडता से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। संगठन का कहना है कि यदि राज्य की सीमा में किसी प्रकार का बदलाव किया गया तो व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। उनका तर्क है कि मणिपुर की मौजूदा सीमाएं ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा हैं और इनमें किसी भी प्रकार की कटौती स्वीकार्य नहीं होगी।

पहले भी हो चुका है भूमि समझौता

भारत ने पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद सुलझाने के लिए पहले भी भूमि समझौते किए हैं। वर्ष 2015 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुए भूमि सीमा समझौते (Land Boundary Agreement) के तहत दोनों देशों ने एन्क्लेव का आदान-प्रदान किया था, जिससे चार दशक से अधिक पुराना सीमा विवाद समाप्त हुआ था।

आगे क्या होगा?

फिलहाल भारत और म्यांमार के बीच सीमा निर्धारण को लेकर बातचीत जारी है। सरकार ने जमीन की अदला-बदली संबंधी किसी अंतिम निर्णय की पुष्टि नहीं की है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वार्ता किस दिशा में आगे बढ़ती है और मणिपुर में उठ रहे विरोध के बीच केंद्र सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है।


संबंधित समाचार