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Sikkim News: 71 सरकारी स्कूलों में AI-FunZone की शुरुआत, कक्षा 3 से 5 के छात्रों को मिलेगी पर्सनलाइज्ड लर्निंग

Sikkim News: 71 सरकारी स्कूलों में AI-FunZone की शुरुआत, कक्षा 3 से 5 के छात्रों को मिलेगी पर्सनलाइज्ड लर्निंग

गंगटोक: सिक्किम में स्कूली शिक्षा को तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक नई पहल शुरू की गई है। राज्य के 71 सरकारी स्कूलों में AI-FunZone नाम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित लर्निंग प्रोग्राम लागू किया गया है। इस पायलट प्रोजेक्ट का उद्देश्य कक्षा 3 से 5 तक के बच्चों की बुनियादी पढ़ने-लिखने और गणित की क्षमता को मजबूत करना है। यह कार्यक्रम गंगटोक जिले के खामदोंग, नाडोक और मार्तम ब्लॉक के सरकारी स्कूलों में चलाया जा रहा है। शिक्षा विभाग ने इस पहल के लिए अप्रैल 2026 में EkStep Foundation के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) किया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक करीब 2,100 विद्यार्थी इस पायलट कार्यक्रम से जुड़े हैं।

AI बच्चों की पढ़ाई में कैसे करेगा मदद?

AI-FunZone के तहत बच्चों को कंप्यूटर या साझा डिजिटल डिवाइस के माध्यम से रोजाना छोटे और व्यक्तिगत अभ्यास सत्र दिए जाएंगे। सिस्टम विद्यार्थी के सीखने के स्तर के आधार पर अभ्यास को अनुकूलित कर सकता है। रीडिंग के दौरान AI बच्चे की आवाज सुनकर यह पहचानने में मदद करता है कि उसे किन हिस्सों में परेशानी हो रही है। वहीं गणित में बच्चों की गलतियों के पैटर्न को पहचानकर उसी के अनुसार आगे के अभ्यास तैयार किए जा सकते हैं।

60 मिनट की होगी AI-FunZone क्लास

इस कार्यक्रम को स्कूल की नियमित पढ़ाई से अलग किसी अतिरिक्त गतिविधि के रूप में नहीं रखा गया है। इसके लिए स्कूल के नियमित टाइमटेबल में 60 मिनट की AI-FunZone क्लास शामिल की गई है। शिक्षा विभाग के मुताबिक AI का इस्तेमाल शिक्षकों की जगह लेने के लिए नहीं बल्कि पढ़ाई को सपोर्ट करने के लिए किया जाएगा। कक्षा में शिक्षक की भूमिका पहले की तरह महत्वपूर्ण रहेगी।

अंग्रेजी, नेपाली और गणित पर फोकस

AI-FunZone के तहत विद्यार्थियों को मुख्य रूप से अंग्रेजी, नेपाली और गणित में डिजिटल लर्निंग सपोर्ट दिया जा रहा है। तकनीक का उद्देश्य हर बच्चे की जरूरत के अनुसार अभ्यास उपलब्ध कराना है, ताकि जिन विषयों या अवधारणाओं में विद्यार्थी कमजोर है, उन पर अतिरिक्त अभ्यास कराया जा सके।

शिक्षकों को रियल-टाइम में मिलेगी बच्चों की प्रगति की जानकारी

इस कार्यक्रम में एक रियल-टाइम डैशबोर्ड भी शामिल है। इसके जरिए शिक्षक प्रत्येक विद्यार्थी की प्रगति पर नजर रख सकते हैं और यह पता लगा सकते हैं कि किस बच्चे को किस क्षेत्र में अतिरिक्त सहायता की जरूरत है। इस तरह AI से मिलने वाली जानकारी को शिक्षक अपनी नियमित कक्षा की पढ़ाई में इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे बच्चों के लर्निंग गैप को पहचानने और उस पर काम करने में मदद मिल सकती है।

करीब 300 रिसोर्स पर्सन की ट्रेनिंग पूरी

कार्यक्रम को लागू करने के लिए खामदोंग, नाडोक और मार्तम ब्लॉक के करीब 300 रिसोर्स पर्सन को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। हालांकि, शिक्षा विभाग ने यह भी बताया है कि कुछ स्टैंडअलोन प्राइमरी और जूनियर हाई स्कूलों में कंप्यूटर या टैबलेट, हेडसेट और हाई-स्पीड इंटरनेट जैसी डिजिटल सुविधाओं की कमी सामने आई है।

बिना परीक्षा और रैंकिंग के अभ्यास

AI-FunZone की एक खास बात इसका गैर-परीक्षा आधारित अभ्यास मॉडल है। बच्चों को रैंकिंग या दूसरे विद्यार्थियों से तुलना के दबाव के बिना अभ्यास करने का अवसर मिलता है। शिक्षा विभाग के अनुसार, कंप्यूटर, ऑडियो, ग्राफिक्स और इंटरैक्टिव गतिविधियों के जरिए बच्चों को स्वतंत्र रूप से अभ्यास करने तथा जरूरत के मुताबिक दोबारा सीखने का मौका मिलता है। AI आधारित आकलन से शिक्षकों को यह समझने में मदद मिलती है कि किसी विद्यार्थी को किन क्षेत्रों में अतिरिक्त सहयोग चाहिए।


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