काठमांडू/गोरखा: नेपाल की दुनिया की आठवीं सबसे ऊंची पर्वत चोटी माउंट मनास्लु पर शनिवार रात हुए भीषण हिमस्खलन में दो पर्वतारोहियों की मौत हो गई। हादसा कैंप-3 के पास हुआ, जहां भारी बर्फ के नीचे दबने से भारतीय मूल के जर्मन पर्वतारोही ध्रुव ज्योति गुहा और उनके नेपाली शेरपा गाइड फुरसेम्बा शेरपा की जान चली गई। मिली जानकारी के मुताबिक दोनों पर्वतारोही मकालू एडवेंचर के अभियान दल का हिस्सा थे। शनिवार को मनास्लु के ऊपरी हिस्से में मौसम अचानक बेहद खराब हो गया था। तेज बर्फीले तूफान के बीच अभियान दल के छह सदस्य कैंप-2 से वापस नीचे लौट आए, जबकि ध्रुव ज्योति गुहा और फुरसेम्बा शेरपा कैंप-3 की ओर आगे बढ़ गए।
कैंप-3 में टेंट पर गिरा भारी हिमस्खलन
अभियान आयोजकों के मुताबिक शनिवार रात दोनों पर्वतारोहियों से संपर्क टूट गया था। इसके बाद रविवार को खोज एवं बचाव दल को कैंप-3 भेजा गया। वहां पहुंचने पर पता चला कि भारी हिमस्खलन उनके टेंट के ऊपर गिरा था। बचाव दल ने कई घंटे की मशक्कत के बाद करीब 7 फीट बर्फ हटाकर दोनों के शव बरामद किए। शवों को फिलहाल बेस कैंप लाने की प्रक्रिया शुरू की गई। मौसम की स्थिति सामान्य होने पर दोनों शवों को हेलीकॉप्टर के जरिए काठमांडू भेजने की तैयारी की जा रही है।
खराब मौसम के बीच आगे बढ़ना पड़ा भारी
अभियान आयोजक मकालू एडवेंचर के प्रबंध निदेशक मोहन लामसाल के अनुसार, शनिवार को मनास्लु के ऊपरी इलाकों में बर्फीला तूफान और खराब मौसम था। स्थिति को देखते हुए अभियान में शामिल छह पर्वतारोहियों ने कैंप-2 से नीचे लौटने का फैसला किया। वहीं, ध्रुव ज्योति गुहा और उनके शेरपा गाइड फुरसेम्बा शेरपा कैंप-3 की ओर आगे बढ़े। इसके बाद रात में आए हिमस्खलन ने उनके टेंट को अपनी चपेट में ले लिया।
इस सीजन में मनास्लु पर चार मौतें
इस हादसे के बाद इस पर्वतारोहण सीजन में मनास्लु पर जान गंवाने वाले लोगों की संख्या चार हो गई है। इससे पहले 17 सितंबर को सिंगापुर के 50 वर्षीय पर्वतारोही लाउ वी सेंग की क्लाइमेटाइजेशन के दौरान मौत की खबर सामने आई थी। वहीं बेस कैंप में 20 वर्षीय नेपाली पोर्टर ताशी शेरपा का शव भी बरामद किया गया था।
493 पर्वतारोहियों को जारी हुए परमिट
माउंट मनास्लु को दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण पर्वत चोटियों में शामिल माना जाता है। नेपाल के पर्यटन विभाग की ओर से इस वर्ष करीब 493 पर्वतारोहियों को मनास्लु पर चढ़ाई के लिए परमिट जारी किए जाने की जानकारी दी गई है। ऊंचाई, अचानक बदलते मौसम, भारी बर्फबारी और हिमस्खलन का खतरा यहां पर्वतारोहण को बेहद जोखिमपूर्ण बनाता है।