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बसपा में बड़ा बदलाव: मायावती ने ईशान आनंद को दी जिम्मेदारी, आकाश और दीपिका रहेंगे दूर

बसपा में बड़ा बदलाव: मायावती ने ईशान आनंद को दी जिम्मेदारी, आकाश और दीपिका रहेंगे दूर

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) में संगठन और परिवार से जुड़े समीकरण एक बार फिर बदलते नजर आ रहे हैं। पार्टी प्रमुख मायावती ने अब अपने छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे ईशान आनंद को संगठन में जिम्मेदारी देने का फैसला किया है। वहीं, उनके दूसरे भतीजे आकाश आनंद और भतीजी दीपिका आनंद को पार्टी की संगठनात्मक जिम्मेदारियों से दूर रखने की बात सामने आई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब बसपा उत्तर प्रदेश समेत आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी है।

मायावती ने ईशान आनंद को लेकर बदला फैसला

मायावती ने अपने हालिया बयान में परिवार के सदस्यों को पार्टी में जिम्मेदारी देने के मुद्दे पर अपने फैसलों और अनुभवों का उल्लेख किया। उन्होंने संकेत दिया कि अब ईशान आनंद को संगठन में सम्मानजनक जिम्मेदारी दी जाएगी। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ दिन पहले ही मायावती ने आकाश और ईशान दोनों को पार्टी में किसी पद से दूर रखने का फैसला सार्वजनिक किया था। इसके बाद अब ईशान को दोबारा संगठन में भूमिका देने की बात सामने आई है।

आकाश आनंद को लेकर मायावती का रुख सख्त

आकाश आनंद को लेकर मायावती का रुख हाल के दिनों में लगातार सख्त रहा है। 3 सितंबर को उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाया गया था। इसके बाद 10 सितंबर को मायावती ने उन्हें पार्टी से पूरी तरह अलग करने की घोषणा की।मायावती ने अपने बयानों में आकाश आनंद के राजनीतिक आचरण और उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव को लेकर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, ये बातें मायावती द्वारा लगाए गए आरोप और उनके राजनीतिक बयान हैं, जिन्हें स्वतंत्र रूप से तथ्य के रूप में स्थापित नहीं किया जा सकता।

दीपिका आनंद को भी संगठन में नहीं मिलेगी जिम्मेदारी

मायावती ने परिवारवाद के मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए दीपिका आनंद को भी पार्टी संगठन में जिम्मेदारी देने से दूरी बनाए रखने का संकेत दिया है। इससे पहले 12 सितंबर को मायावती ने दीपिका को भविष्य में जिम्मेदारी मिलने की संभावना का उल्लेख किया था, लेकिन ताजा घटनाक्रम में ईशान आनंद को आगे लाने की बात कही गई है।

कांशीराम और डॉ. आंबेडकर के सिद्धांतों का हवाला

मायावती ने अपने फैसलों को बसपा की वैचारिक राजनीति से जोड़ते हुए पार्टी संस्थापक कांशीराम और डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का उल्लेख किया है। उनका कहना है कि संगठन में व्यक्तिगत या पारिवारिक संबंधों से ऊपर पार्टी और आंदोलन के हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मायावती ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी परिवार के सदस्य को संगठन में अवसर मिलने का मतलब यह नहीं है कि उसे स्थायी राजनीतिक अधिकार मिल गया। ईशान आनंद के मामले में भी उनका भविष्य पार्टी के प्रति अनुशासन और आचरण पर निर्भर रहेगा।

23 सितंबर को बसपा की अहम बैठक

बसपा की 23 सितंबर 2026 को लखनऊ में अखिल भारतीय स्तर की महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पार्टी के संगठन में पिछले कुछ सप्ताह के दौरान कई बड़े बदलाव हुए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, बैठक में संगठनात्मक स्थिति, आगामी चुनावों की रणनीति और पार्टी के आगे के कार्यक्रमों पर चर्चा हो सकती है।

बसपा संगठन में लगातार हो रहे बदलाव

पिछले कुछ समय में बसपा के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर कई अहम फैसले हुए हैं। आकाश आनंद को पहले महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं, फिर उन्हें हटाया गया। इसके बाद ईशान आनंद को संगठन में भूमिका देने और फिर उससे दूर रखने जैसे फैसले सामने आए। अब दोबारा ईशान को जिम्मेदारी देने की घोषणा ने बसपा की आंतरिक राजनीति को चर्चा में ला दिया है। आगामी 23 सितंबर की बैठक के बाद संगठन में इन बदलावों को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है।
 


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