छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रश्नकाल की शुरुआत होते ही विभिन्न जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा शुरू हो गई। सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति, सड़क दुर्घटनाएं, कौशल उन्नयन नीति और गैस आपूर्ति जैसे विषयों पर विधायकों ने सरकार से जवाब मांगा। कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।
सीएम ग्राम सड़क योजना पर विधायक ने उठाया सवाल
विधायक किरण देव ने मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत एलेंगनार, उरकापाल और कांदानार सड़क निर्माण कार्य का मुद्दा सदन में उठाया। उन्होंने बिना सर्वे किए टेंडर जारी करने पर आपत्ति जताते हुए सरकार से जवाब मांगा। इस पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की अनुपस्थिति में मंत्री केदार कश्यप ने जवाब देते हुए कहा कि यह इलाका संवेदनशील क्षेत्र में आता है और यहां डीएमएफ फंड से भी कार्यों को स्वीकृति दी गई है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में अर्थवर्क समेत कई प्रारंभिक कार्य किए जा चुके हैं और आने वाले एक वर्ष में सड़क निर्माण का काम पूरा कर लिया जाएगा।
अकलतरा में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता
विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह ने अकलतरा क्षेत्र में हो रही लगातार सड़क दुर्घटनाओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने ड्रंक एंड ड्राइव के मामलों और बढ़ती दुर्घटनाओं को लेकर सरकार से जानकारी मांगी। उन्होंने बताया कि अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जो बेहद चिंताजनक है। इस पर मंत्री ने कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विशेष कदम उठाए जाएंगे।
कोंडागांव के स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति पर चर्चा
विधायक लता उसेंडी ने कोंडागांव जिले के स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध सुविधाओं और व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए। इस पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले में 7 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 22 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 137 उप स्वास्थ्य केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।
भुगतान में देरी को लेकर सरकार पर सवाल
लता उसेंडी ने स्वास्थ्य विभाग के कार्यक्रमों के भुगतान में हो रही देरी को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि पिछली बार एक महीने के भीतर भुगतान करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन 9 महीने बाद भी भुगतान नहीं किया गया है। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वर्क ऑर्डर जारी होने के बाद किए गए कार्यों का ही भुगतान किया जाएगा। यदि किसी कार्य के लिए मौखिक अनुमति के आधार पर काम किया गया है, तो उसे कार्योत्तर स्वीकृति देकर भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
लता उसेंडी ने गलत जानकारी देने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की। विधायक को गलत जवाब दिए जाने को लेकर विपक्ष ने नाराजगी जताई और सरकार पर सदन में गलत जानकारी देने का आरोप लगाया।
सरकारी अस्पतालों में अटैचमेंट खत्म करने की घोषणा
भाजपा विधायक प्रबोध मिंज के सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के शासकीय अस्पतालों में कर्मचारियों के संलग्नीकरण (अटैचमेंट) की व्यवस्था को समाप्त किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि अस्पतालों के कर्मचारी अब अपने मूल पदस्थापना स्थान पर ही काम करेंगे।
कौशल उन्नयन नीति पर भी हुई चर्चा
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने राज्य में कौशल उन्नयन नीति तैयार करने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि नए ट्रेड का चयन, स्किल्ड संस्थानों का आवासीय स्वरूप और भर्ती प्रक्रिया की बेहतर निगरानी जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस मामले में केंद्र सरकार की नीतियों से भी सहयोग लिया जा सकता है। इस पर विभागीय मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि सरकार इस दिशा में काम करने के लिए तैयार है और जल्द ही इस पर पहल की जाएगी।
गैस आपूर्ति और मूल्यवृद्धि पर स्थगन प्रस्ताव
सदन में गैस आपूर्ति और मूल्यवृद्धि के मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव भी लाया गया। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि पूरे प्रदेश में गैस सिलेंडर की कमी को लेकर अफरातफरी की स्थिति बन गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि कोई संकट नहीं है, लेकिन जमीनी स्तर पर गैस की कमी महसूस की जा रही है।
सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक
स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विधायक अजय चंद्राकर ने यह कहते हुए आपत्ति जताई कि यह केंद्र सरकार का विषय है। इसके बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश के कई हिस्सों में लोगों को गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा है और कालाबाजारी हो रही है। उन्होंने कहा कि जब व्यवस्था राज्य सरकार को करनी है तो इस विषय पर सदन में चर्चा होना जरूरी है।
हंगामे के कारण सदन की कार्रवाई स्थगित
भूपेश बघेल के बयान के बाद सदन में माहौल और गर्म हो गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने नारेबाजी शुरू कर दी। भारी हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष को सदन की कार्रवाई 5 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।