नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नए प्रभारी और सह-प्रभारियों की नियुक्ति की है। इस बदलाव में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ और हरियाणा का भाजपा प्रभारी बनाया गया है। छत्तीसगढ़ में उनके साथ सिद्धार्थ शंभु को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है।
स्मृति ईरानी की नई जिम्मेदारी के साथ एक बार फिर उनका राजनीतिक सफर चर्चा में है। टीवी की दुनिया से पहचान बनाने वाली ईरानी ने धीरे-धीरे सक्रिय राजनीति में जगह बनाई और केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।
टीवी की दुनिया से राजनीति तक पहुंचीं स्मृति ईरानी
स्मृति ईरानी का सार्वजनिक जीवन राजनीति से पहले मनोरंजन जगत से जुड़ा रहा। मॉडलिंग के बाद उन्होंने टेलीविजन की दुनिया में कदम रखा। लोकप्रिय धारावाहिक ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में तुलसी विरानी का किरदार निभाने के बाद उन्हें देशभर में पहचान मिली। टीवी करियर की लोकप्रियता के बाद उनका झुकाव राजनीति की ओर बढ़ा और उन्होंने भाजपा के साथ अपना राजनीतिक सफर शुरू किया।
2003 में BJP से जुड़ा राजनीतिक सफर
स्मृति ईरानी वर्ष 2003 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुईं। इसके अगले साल यानी 2004 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें दिल्ली की चांदनी चौक सीट से उम्मीदवार बनाया। इस चुनाव में उनका मुकाबला कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल से हुआ, हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली। इसके बाद संगठन में उनकी भूमिका बढ़ती गई। वर्ष 2010 में उन्हें भाजपा की राष्ट्रीय सचिव और पार्टी की महिला इकाई की अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली। 2011 में वह गुजरात से राज्यसभा पहुंचीं।
अमेठी ने बनाया राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा चेहरा
स्मृति ईरानी के राजनीतिक करियर में अमेठी का खास महत्व रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट से कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा। वह चुनाव हार गईं, लेकिन इस मुकाबले ने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में प्रमुख चेहरा बना दिया। 2019 में उन्होंने एक बार फिर अमेठी से चुनाव लड़ा और इस बार राहुल गांधी को हराकर लोकसभा पहुंचीं। निर्वाचन आयोग के चुनावी आंकड़ों में भी 2019 के अमेठी चुनाव का परिणाम दर्ज है। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें अमेठी से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद वह केंद्रीय मंत्रिपरिषद का हिस्सा नहीं रहीं।
केंद्र सरकार में संभाली कई अहम जिम्मेदारियां
स्मृति ईरानी ने केंद्र सरकार में अलग-अलग महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। उन्हें मानव संसाधन विकास मंत्रालय का प्रभार मिला। इसके बाद वह कपड़ा मंत्रालय से जुड़ीं और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। 2019 में केंद्र में दूसरी बार भाजपा सरकार बनने के बाद उन्हें महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। वह अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय का प्रभार भी संभाल चुकी हैं।
संसद से संगठन तक सक्रिय भूमिका
केंद्रीय मंत्री के तौर पर स्मृति ईरानी महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, कपड़ा और सूचना-प्रसारण जैसे अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहीं। राजनीतिक मंचों और संसद में उनके मुखर वक्तव्यों के कारण वह भाजपा के प्रमुख राष्ट्रीय चेहरों में शामिल रहीं। 2024 में अमेठी से लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी उनकी संगठनात्मक भूमिका बनी रही। अब भाजपा ने उन्हें दो राज्यों की जिम्मेदारी देकर पार्टी के संगठनात्मक कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका सौंपी है।
छत्तीसगढ़ में नई जिम्मेदारी क्यों अहम?
छत्तीसगढ़ में स्मृति ईरानी के साथ सिद्धार्थ शंभु को सह-प्रभारी बनाया गया है। नई नियुक्ति भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव का हिस्सा है। पार्टी ने एक साथ कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रभारी एवं सह-प्रभारी बदले हैं। अब छत्तीसगढ़ में संगठन से जुड़े मामलों में उनकी भूमिका पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व और राज्य संगठन के बीच समन्वय से जुड़ी होगी।
स्मृति ईरानी का राजनीतिक सफर एक नजर में
- 2003: भाजपा में शामिल हुईं।
- 2004: चांदनी चौक से लोकसभा चुनाव लड़ा।
- 2010: भाजपा की राष्ट्रीय सचिव बनीं और महिला इकाई की अध्यक्ष रहीं।
- 2011: गुजरात से राज्यसभा पहुंचीं।
- 2014: अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ा।
- 2014: केंद्र सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री बनीं।
- 2019: अमेठी से लोकसभा चुनाव जीता।
- 2019: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली।
- 2024: अमेठी लोकसभा सीट से चुनाव हार गईं।
- 2026: भाजपा ने छत्तीसगढ़ और हरियाणा का प्रभारी नियुक्त किया।