MP Assembly : कूनो नेशनल पार्क में पुनर्स्थापित चीतों के रखरखाव और भोजन पर होने वाले खर्च को लेकर विधानसभा में बड़ा खुलासा हुआ है। कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा द्वारा पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में सरकार ने बताया कि चीतों के भोजन पर सालभर में करीब 1.27 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। औसतन प्रतिदिन लगभग 35 हजार रुपये केवल उनके खाने पर खर्च किए जा रहे हैं।
32 चीते, बकरी मांस खपत अधिक
सरकार के अनुसार कूनो वाइल्डलाइफ डिवीजन में वर्तमान में कुल 32 चीते मौजूद हैं। इनके लिए शिकार के उद्देश्य से चीतल जैसे वन्यजीव भी छोड़े गए हैं, लेकिन जानकारी के मुताबिक चीतों को बकरी का मांस अधिक पसंद आ रहा है, जिस कारण नियमित रूप से मीट उपलब्ध कराया जा रहा है।
अन्य जिलों में भी भेजे जा रहे चीते
सरकार ने यह भी बताया कि कूनो से कुछ चीतों को ग्वालियर, श्योपुर, शिवपुरी, मुरैना और राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में भेजा जा रहा है, ताकि उनके मूवमेंट और अनुकूलन पर निगरानी रखी जा सके।
गांवों में शिकार के आरोप
विधायक ने सदन में यह भी आरोप लगाया कि कूनो जंगल में पर्याप्त प्राकृतिक शिकार उपलब्ध नहीं होने के कारण चीते बाहर निकलकर गांवों में बकरियों और अन्य पालतू जानवरों का शिकार कर रहे हैं।
क्या बोले सीएम मोहन?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि नेशनल पार्क में चीतों के भोजन के लिए अलग से कोई निश्चित बजट निर्धारित नहीं है। प्रतिदिन कितनी बकरियां दी जाएंगी, इसका कोई तय मानक नहीं है, बल्कि आवश्यकता के अनुसार मीट उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि जंगल खुला होने के कारण कभी-कभी चीते गांवों में पहुंच जाते हैं और पालतू जानवरों का शिकार कर लेते हैं।