पुरी (ओडिशा): जगन्नाथ मंदिर के सदियों पुराने रत्न भंडार का रहस्य अब दुनिया के सामने आने जा रहा है। करीब 48 साल बाद मंदिर के खजाने की गिनती और सूची तैयार करने की प्रक्रिया दोबारा शुरू की गई है। बुधवार को दोपहर 12:09 बजे शुभ मुहूर्त में इस ऐतिहासिक कार्य की आधिकारिक शुरुआत हुई, जिसमें आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञों की मदद से खजाने की डिजिटल इन्वेंट्री तैयार की जा रही है।
परंपराओं के साथ शुरू हुई पवित्र प्रक्रिया
मंदिर प्रशासन के अनुसार, रत्न भंडार खोलने के लिए शुभ समय 12:09 बजे से 1:45 बजे के बीच निर्धारित किया गया था। सभी अधिकृत कर्मचारी पारंपरिक धोती-गमछा पहनकर मंदिर में प्रवेश किए, केवल सूचीबद्ध अधिकारियों को ही अंदर जाने की अनुमति दी गई, पूरी प्रक्रिया धार्मिक नियमों और गोपनीयता के साथ की जा रही है।
RBI और विशेषज्ञों की निगरानी में गिनती
इस विशेष कार्य के लिए एक हाई-लेवल टीम बनाई गई है, जिसमें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अधिकारी, सरकारी बैंकों के प्रतिनिधि, दो जेमोलॉजिस्ट (रत्न विशेषज्ञ) शामिल हैं। इनका मुख्य काम हर आभूषण और रत्न की पहचान, डिजिटल फोटोग्राफी, सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है, इसके साथ ही आभूषणों की विशेष सुरक्षा व्यवस्था करने के साथ रत्न भंडार की वस्तुओं को सुरक्षित रखने के लिए सोना-पीले कपड़े में, चांदी-सफेद कपड़े में और अन्य कीमती रत्न लाल कपड़े में विशेष रंग कोडिंग अपनाई गई है। इन सभी को 6 विशेष संदूकों में सुरक्षित रखा जा रहा है।
1978 के बाद पहली बार हो रही गिनती
रत्न भंडार की आखिरी सूची 1978 में तैयार की गई थी। उस समय के आंकड़े 128.38 किलो सोने के 454 आभूषण, 221 किलो चांदी के आभूषण, पूरी प्रक्रिया में 72 दिन लगे थे, इस बार आधुनिक तकनीक के कारण यह काम कम समय में पूरा होने की उम्मीद है।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था (SOP)
राज्य सरकार की मंजूरी के बाद मंदिर प्रबंधन ने विशेष SOP लागू किया है, मंदिर की दैनिक पूजा-पाठ जारी रहेगी। श्रद्धालु ‘बाहरा कथा’ से दर्शन कर सकेंगे। ‘भीतरा कथा’ में आम लोगों की एंट्री पूरी तरह बंद रहेगा।
चरणबद्ध तरीके से खुलेंगे कक्ष
गिनती की प्रक्रिया इस क्रम में हो रही है। रोजाना पूजा में उपयोग होने वाले आभूषण रत्न भंडार का बाहरी कक्ष और अंत में आंतरिक (सबसे सुरक्षित) कक्ष में रखा जाएगा।
क्यों खास है यह प्रक्रिया?
48 साल बाद ऐतिहासिक खजाने की जांच पहली बार डिजिटल रिकॉर्डिंग और फोटोग्राफी की जाएगी। पारंपरिक आस्था और आधुनिक तकनीक का संगम पर देश-विदेश के श्रद्धालुओं की भी नजर इस प्रक्रिया पर बनी हुई है।