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2029 से बदलेगा देश का सियासी नक्शा: लोकसभा में 816 सीटें, महिलाओं को 33% आरक्षण, यूपी-बिहार में बड़ा इजाफा...

2029 से बदलेगा देश का सियासी नक्शा: लोकसभा में 816 सीटें, महिलाओं को 33% आरक्षण, यूपी-बिहार में बड़ा इजाफा...

भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था एक बड़े परिवर्तन की ओर बढ़ रही है। केंद्र सरकार आगामी 2029 लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण को लागू करने और सीटों के परिसीमन की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की तैयारी में है। इससे न केवल संसद का आकार बढ़ेगा, बल्कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में ऐतिहासिक इजाफा होगा।

लोकसभा की सीटें 543 से बढ़कर 816 होने की संभावना:

सूत्रों के अनुसार, नए परिसीमन के बाद लोकसभा की कुल सीटों की संख्या वर्तमान 543 से बढ़कर करीब 816 तक पहुंच सकती है। इसके लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाया जाएगा। इस बदलाव के साथ संसद का स्वरूप और प्रतिनिधित्व दोनों व्यापक होंगे।

महिलाओं को मिलेगा 33% आरक्षण:

सरकार 2029 से महिलाओं को लोकसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में काम कर रही है। कुल संभावित सीटें: 816 महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें: 273 रहेगी। यह कदम महिलाओं को नीति-निर्माण में सीधे भागीदारी का अवसर देगा और भारतीय राजनीति का संतुलन बदलेगा।

राज्यों में सीटों का नया समीकरण:

परिसीमन के बाद बड़े राज्यों में सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है। उत्तर प्रदेश: 80 से बढ़कर 120 सीटें, बिहार: 40 से बढ़कर 60 सीटें, केरल: 20 से बढ़कर 30 सीटें हैं, इस बदलाव से जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व को अधिक संतुलित किया जाएगा।

SC/ST आरक्षण में भी बढ़ोतरी

सीटों की कुल संख्या बढ़ने का असर आरक्षित वर्गों पर भी पड़ेगा:
SC सीटें: 84 से बढ़कर लगभग 126
ST सीटें: 47 से बढ़कर लगभग 70
इससे सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व दोनों मजबूत होंगे।

छोटे राज्यों के लिए रोटेशन फॉर्मूला

जिन राज्यों या केंद्रशासित प्रदेशों में केवल 1 या 2 सीटें हैं, वहां महिला आरक्षण लागू करने के लिए रोटेशन सिस्टम अपनाया जा सकता है। हर तीसरे चुनाव में सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होगी, जिससे छोटे क्षेत्रों में भी महिलाओं को नेतृत्व का अवसर मिलेगा।

क्यों अहम है यह बदलाव?

यह प्रस्तावित परिवर्तन कई मायनों में ऐतिहासिक है:
संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी
जनसंख्या आधारित प्रतिनिधित्व मजबूत होगा
बड़े राज्यों की राजनीतिक ताकत बढ़ेगी
सामाजिक संतुलन और समावेशिता को बढ़ावा मिलेगा

चुनाव भारत की राजनीति में नया अध्याय:

अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो 2029 का लोकसभा चुनाव भारत की राजनीति के इतिहास में एक नया अध्याय लिखेगा। महिलाओं के लिए आरक्षण और सीटों के विस्तार से देश की लोकतांत्रिक संरचना और अधिक समावेशी और प्रतिनिधिक बन जाएगी।


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