पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी टैंकर ‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’ पर्शियन गल्फ से भारत के लिए रवाना हो चुके हैं और जल्द ही संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पार कर सकते हैं। जहाजों की ट्रैकिंग के अनुसार, ये दोनों टैंकर ईरान के लारक और केश्म द्वीपों के बीच स्थित चैनल में मौजूद थे, जहां उनकी पहचान की पुष्टि की गई। इसके बाद उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति दी गई है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में सैन्य तनाव के कारण समुद्री गतिविधियां बेहद संवेदनशील बनी हुई हैं।
पहले भी सुरक्षित पहुंच चुके हैं टैंकर:
इससे पहले भी भारत को राहत देते हुए ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ नाम के दो टैंकर सुरक्षित रूप से गुजरात के मुंद्रा और कांडला बंदरगाह पहुंच चुके हैं। इन जहाजों के जरिए करीब 92,712 टन एलपीजी की आपूर्ति हुई, जो देश की लगभग एक दिन की घरेलू गैस जरूरत के बराबर है। इसके अलावा ‘जग लाड़की’ नाम का एक क्रूड ऑयल टैंकर भी 80,000 टन से अधिक तेल लेकर सुरक्षित भारत पहुंच चुका है।
अब भी 24 भारतीय जहाज फंसे
युद्ध शुरू होने के समय कुल 28 भारतीय जहाज होर्मुज क्षेत्र में मौजूद थे। फिलहाल 24 जहाज अब भी क्षेत्र में फंसे हैं। 22 जहाज पश्चिमी हिस्से में 600+ नाविकों के साथ 2 जहाज पूर्वी हिस्से में इनमें 6 एलपीजी टैंकर, 1 एलएनजी टैंकर, 4 क्रूड ऑयल टैंकर, 3 कंटेनर शिप, 2 बल्क कैरियर शामिल हैं।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर असर:
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, जिसमें से 88% कच्चा तेल आयात, 50% प्राकृतिक गैस आयात और 60% एलपीजी आयात शामिल है। विशेष रूप से, एलपीजी की 85-95% आपूर्ति और गैस की बड़ी हिस्सेदारी होर्मुज मार्ग से ही आती है। हालांकि, भारत ने रूस, अमेरिका और अफ्रीका जैसे विकल्पों से कच्चे तेल की आपूर्ति को संतुलित करने की कोशिश की है, लेकिन एलपीजी और गैस सप्लाई अभी भी इस मार्ग पर निर्भर है।
ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित करने में जुटा भारत:
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बावजूद भारत धीरे-धीरे अपनी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित करने में जुटा हुआ है। ‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’ जैसे टैंकरों का सुरक्षित पारगमन न केवल राहत की खबर है, बल्कि यह संकेत भी है कि संकट के बीच कूटनीतिक और लॉजिस्टिक प्रयास असर दिखा रहे हैं।