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रावघाट परियोजना में अवैध सड़क निर्माण का खुलासा, बिना अनुमति काटे गए सैकड़ों पेड़; BSP को नोटिस

रावघाट परियोजना में अवैध सड़क निर्माण का खुलासा, बिना अनुमति काटे गए सैकड़ों पेड़; BSP को नोटिस

रावघाट लौह अयस्क परियोजना के लिए बनाई गई सड़क को लेकर सामने आए कथित वन नियम उल्लंघन के मामले में वन विभाग की जांच में गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि हुई है। विभागीय जांच में पाया गया कि बिना आवश्यक वैधानिक अनुमति के जंगल क्षेत्र में सड़क का निर्माण किया गया और इसके लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की गई। मामले के सामने आने के बाद वन विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है।

रिकॉर्ड और मौके की जांच में मिली पुष्टि

मामले के उजागर होने के बाद पूर्व वनमंडल भानुप्रतापपुर के वनमंडलाधिकारी ने पांच सदस्यीय जांच दल गठित किया। टीम ने पुराने अभिलेखों की जांच के साथ मौके का निरीक्षण किया। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि लगभग 1,340 मीटर लंबी और करीब 9.95 मीटर चौड़ी सड़क बिना वन विभाग की स्वीकृति के तैयार की गई। प्रारंभिक जांच में करीब 540 पेड़ों की कटाई का अनुमान लगाया गया है, जबकि अंतिम संख्या इससे अधिक भी हो सकती है।

पहाड़ काटकर तैयार की गई सड़क

जांच में यह भी सामने आया कि सड़क निर्माण के दौरान पहाड़ी क्षेत्र को काटकर मार्ग बनाया गया। वन विभाग का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया के लिए विभाग से कोई अनुमति नहीं ली गई, जिससे भारतीय वन अधिनियम, 1927 और वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है।

BSP प्रबंधन को जारी हुआ नोटिस

पूर्व वनमंडल भानुप्रतापपुर के वनमंडलाधिकारी ऋषभ जैन ने बताया कि मामले में भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के रावघाट प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। प्रबंधन से जवाब मिलने के बाद संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

वन विभाग के अधिकारियों पर भी कार्रवाई

जांच रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। सहायक वनमंडलाधिकारी (SDO) विजय चंद्रवंशी और रेंजर वीरेंद्र यादव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसके अलावा दो वनपाल और तीन वनरक्षकों सहित कुल पांच मैदानी कर्मचारियों को संबंधित क्षेत्र से हटाते हुए उनके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

मामले की जांच जारी

वन विभाग का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है। जांच पूरी होने और संबंधित पक्षों के जवाब मिलने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इस घटनाक्रम के बाद वन क्षेत्र में परियोजनाओं के लिए अनुमति प्रक्रिया और पर्यावरणीय नियमों के पालन को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं।


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