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Scindia Family Case: सिंधिया राजपरिवार का ऐतिहासिक समझौता, कोर्ट आज लगाएगी कानूनी मुहर

Scindia Family Case: सिंधिया राजपरिवार का ऐतिहासिक समझौता, कोर्ट आज लगाएगी कानूनी मुहर

जावेद खान, ग्वालियर: देश के सबसे प्रतिष्ठित और चर्चित राजघरानों में शुमार 'सिंधिया राजवंश' का 16 साल पुराना संपत्ति विवाद आज हमेशा-हमेशा के लिए सुलझने जा रहा है। ग्वालियर की जिला अदालत में आज इस ऐतिहासिक महा-समझौते पर अंतिम कानूनी मुहर लगेगी। इसके साथ ही पिछले डेढ़ दशक से भी अधिक समय से चले आ रहे एक दर्जन से ज्यादा अदालती मुकदमों का अंत हो जाएगा। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का अपनी बुआओं वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे राणा के साथ लंबे समय से चल रहा यह विवाद आपसी रजामंदी के फॉर्मूले पर खत्म हो गया है, जिसका ड्राफ्ट कोर्ट में पेश किया जा चुका है।

40,000 करोड़ का साम्राज्य

सिंधिया राजपरिवार की कुल संपत्ति देश और दुनिया भर में करीब 40,000 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत जिन प्रमुख और बेशकीमती संपत्तियों के बंटवारे का रास्ता साफ होगा। 

ग्वालियर: भव्य जयविलास पैलेस (मुख्य केंद्र)

शिवपुरी: माधव विलास, हैप्पी विलास और जॉर्ज कैसल

उज्जैन: ऐतिहासिक कालियादेह पैलेस

पुणे: पद्मा विलास पैलेस

मुंबई: समुद्र फ्लैट्स (पॉश इलाका)

दिल्ली: ग्वालियर हाउस (लेखा विहार और सिंधिया विला)

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दर्ज होगी हाजिरी

अदालती सूत्रों के मुताबिक, आज ग्वालियर जिला कोर्ट में समझौते की औपचारिक प्रक्रियाओं को पूरा किया जाएगा। इसके लिए दोनों पक्षों के सभी प्रमुख सदस्यों की उपस्थिति वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से दर्ज कराई जाएगी, जिसके बाद अदालत इस समझौते को अपनी आधिकारिक मंजूरी देगी। 

इन सदस्यों के बीच हो रहा है समझौता

ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे सिंधिया, यशोधरा राजे, उषा राजे राणा, बालकृष्णराव सिंधिया, कनिष्कादेवी, प्रतिमादेवी और चित्रांगदा राजे।

2010 में शुरू हुई थी कानूनी जंग

इस हाई-प्रोफाइल विवाद की शुरुआत साल 2010 में हुई थी, जब उषा राजे राणा, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे सिंधिया ने जिला न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने दावा दायर करते हुए दलील दी थी कि उनके पिता की अकूत संपत्ति पर बेटों की तरह बेटियों का भी वैधानिक रूप से समान अधिकार है, इसलिए उन्हें उनका उचित हिस्सा मिलना चाहिए। 16 साल की लंबी कानूनी खींचतान के बाद आखिरकार परिवार के सभी सदस्यों ने आपसी बातचीत से इस विवाद को सुलझा लिया है, जो मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि देश की सियासत और राजघरानों के इतिहास का एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।


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