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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: व्याख्याता को BEO का प्रभार देना नियमों के खिलाफ; शिक्षा विभाग का आदेश रद्द

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: व्याख्याता को BEO का प्रभार देना नियमों के खिलाफ; शिक्षा विभाग का आदेश रद्द

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि शैक्षणिक संवर्ग के शिक्षकों को प्रशासनिक पदों का प्रभार नहीं दिया जा सकता। अदालत ने व्याख्याता को ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) का अतिरिक्त प्रभार सौंपने संबंधी राज्य सरकार के आदेश को शिक्षा सेवा नियमों के विपरीत मानते हुए निरस्त कर दिया।

ABEO ने दी थी आदेश को चुनौती

यह मामला सहायक ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (ABEO) रवि कुमार गौतम से जुड़ा है। उनकी नियुक्ति प्रशासनिक संवर्ग में हुई थी और वे जुलाई 2025 से प्रभारी बीईओ के रूप में कार्यरत थे। बाद में शिक्षा विभाग ने 10 जून 2026 को उनका प्रभार हटाकर व्याख्याता अनिल कुमार शर्मा को बीईओ का अतिरिक्त दायित्व सौंप दिया। इस आदेश को रवि कुमार गौतम ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

याचिका में नियमों के उल्लंघन का दावा

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि शिक्षा विभाग का आदेश छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा नियम, 2026 और शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के प्रावधानों के विपरीत है। उनका कहना था कि शिक्षकों को सामान्य परिस्थितियों में गैर-शैक्षणिक अथवा प्रशासनिक जिम्मेदारियां नहीं सौंपी जा सकतीं।

सरकार के तर्क से अदालत संतुष्ट नहीं हुई

राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा कि रवि कुमार गौतम का कार्य संतोषजनक नहीं था, इसलिए उन्हें हटाया गया। हालांकि सरकार अपने इस दावे के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज या रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सकी। इस पर अदालत ने सरकारी पक्ष के तर्क को स्वीकार नहीं किया।

पदोन्नति नियमों का पालन जरूरी

जस्टिस बिभू दत्त गुरु की एकलपीठ ने कहा कि शिक्षा सेवा नियमों में शैक्षणिक और प्रशासनिक संवर्ग अलग-अलग निर्धारित किए गए हैं। बीईओ के 75 प्रतिशत पद सहायक ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों की पदोन्नति से तथा 25 प्रतिशत पद नियमित प्राचार्यों से भरे जाने का प्रावधान है। संबंधित व्याख्याता इन दोनों श्रेणियों में नहीं आते, इसलिए उन्हें बीईओ का प्रभार देना नियमों के अनुरूप नहीं था।

RTE कानून का भी दिया हवाला

अदालत ने अपने फैसले में शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा-27 का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव, जनगणना या अन्य विशेष परिस्थितियों को छोड़कर शिक्षकों से गैर-शैक्षणिक या प्रशासनिक कार्य नहीं कराए जा सकते। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने से बचाना है।

विवादित आदेश हुआ निरस्त

हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग द्वारा 10 जून 2026 को जारी आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया। साथ ही स्पष्ट किया कि भविष्य में प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति और अतिरिक्त प्रभार केवल शिक्षा सेवा नियमों के अनुरूप ही दिए जाने चाहिए।


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