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कुरेनार में वन माफियाओं के हौसले बुलंद,  वन विभाग की लापरवाही में कटे सागौन के पेड़

कुरेनार में वन माफियाओं के हौसले बुलंद,  वन विभाग की लापरवाही में कटे सागौन के पेड़

जिन कंधों पर वनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उन्हीं की लापरवाही अब जंगलों पर भारी पड़ती नजर आ रही है। कुरेनार वन परिक्षेत्र पश्चिम के अंतर्गत मुख्य सड़क किनारे वन विभाग द्वारा कराए गए प्लांटेशन में लगे सागौन के बड़े-बड़े परिपक्व पेड़ों की दिनदहाड़े कटाई की गई। हैरानी की बात यह रही कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी किसी तरह की कार्रवाई करते नजर नहीं आए।

सड़क किनारे प्लांटेशन बना कटाई का शिकार

स्थानीय लोगों के मुताबिक, सड़क किनारे लगाए गए सागौन के पेड़ों पर खुलेआम कुल्हाड़ी चलती रही। पेड़ काटकर लकड़ी ले जाई जाती रही, लेकिन मौके पर न तो कोई वनकर्मी पहुंचा और न ही किसी प्रकार की रोक-टोक दिखाई दी। लोगों का कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम दिन के उजाले में हुआ, जिससे विभागीय निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पहले भी हो चुकी है जंगल की सफाई

यह पहली बार नहीं है जब इस इलाके में इस तरह की घटना सामने आई हो। स्थानीय निवासियों ने बताया कि करीब दो साल पहले इसी क्षेत्र में लगभग 5 एकड़ जंगल साफ कर खेत बना दिए गए थे। उस समय भी मामले को लेकर चर्चा तो हुई, लेकिन किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई। इससे वन माफियाओं के हौसले और अधिक बढ़ते चले गए।

लगातार कट रहे हरे-भरे पेड़

वन माफियाओं की गतिविधियां अब लगातार बढ़ती जा रही हैं। खेत निकालने और जमीन पर कब्जा करने के नाम पर हरे-भरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है। वहीं, वन विभाग की कार्रवाई अक्सर औपचारिकताओं तक सीमित रह जाती है। कभी-कभार लकड़ी जब्त कर ली जाती है या प्रकरण (पीआर) दर्ज कर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया जाता है।

क्या माफियाओं को मिल रहा संरक्षण?

वन विभाग के अधिकारियों के बयानों से भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर मुख्य सड़क किनारे स्थित प्लांटेशन में दिनदहाड़े पेड़ों की कटाई होती रहे और विभाग को इसकी भनक तक न लगे, यह समझ से परे है। लोगों के बीच यह चर्चा आम हो चली है कि कहीं न कहीं वन माफियाओं को अदृश्य संरक्षण तो नहीं मिल रहा।

अब निगाहें उच्च अधिकारियों की कार्रवाई पर

अब देखना यह होगा कि इस मामले में उच्च अधिकारी जिम्मेदार कर्मचारियों और अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करते हैं। क्या वास्तव में दोषियों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे या फिर मामला लीपापोती कर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। यदि समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले समय में इस क्षेत्र के जंगलों का अस्तित्व और भी बड़े खतरे में पड़ सकता है।

 

 


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