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ईरान-इजरायल युद्ध का असर: छत्तीसगढ़ में ड्राई फ्रूट्स 30% तक महंगे, मामरा बादाम 4200 पार...

ईरान-इजरायल युद्ध का असर: छत्तीसगढ़ में ड्राई फ्रूट्स 30% तक महंगे, मामरा बादाम 4200 पार...

रायपुर। मध्य पूर्व में जारी ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव का असर अब भारत के बाजारों में साफ दिखने लगा है। छत्तीसगढ़ में ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में अचानक उछाल आया है, जहां कई प्रमुख आइटम 30 प्रतिशत तक महंगे हो गए हैं। व्यापारियों के मुताबिक, आयात में कमी और सप्लाई चेन प्रभावित होने से कीमतों में यह तेजी आई है।

आवक घटी, दाम बढ़े

व्यापारियों का कहना है कि दिल्ली समेत देश के बड़े बाजारों में पहले से मौजूद स्टॉक अब खत्म होने की कगार पर है। जैसे ही नया माल आना बंद हुआ, कीमतों में तेजी देखने को मिली। फिलहाल त्योहारी सीजन नहीं होने से मांग सामान्य है, लेकिन सप्लाई बाधित रहने पर आगे और महंगाई बढ़ सकती है।

मामरा बादाम ने तोड़े रिकॉर्ड

ईरान से आने वाला हाई क्वालिटी मामरा बादाम अब 4200 रुपए प्रति किलो के पार पहुंच गया है, जो पहले करीब 3800 रुपए था। लेकिन अब मीडियम क्वालिटी बादाम: 2600–3000 रुपए,  अफगानी बादाम: 1800–2600 रुपए और सामान्य बादाम: 800–1200 रुपए हो गए हैं।

पिस्ता भी हुआ महंगा

ईरानी पिस्ता के दाम बढ़कर 3200 रुपए किलो हो गए हैं, जो पहले 2800 रुपए थे। अन्य पिस्ता: 2300–2700 रुपए वहीं  अमेरिकन पिस्ता: करीब 1500 रुपए किलो हो गए हैं।

अंजीर और मुनक्का में राहत

जहां एक तरफ ड्राई फ्रूट्स महंगे हुए हैं, वहीं अंजीर के दाम में गिरावट देखी गई है। पहले: 2400 रुपए किलो और अब: 800–1600 रुपए किलो हैं, मुनक्का के दाम फिलहाल 600–800 रुपए प्रति किलो हैं।

किशमिश और काजू के दाम भी चढ़े

व्यापारियों का कहना है कि पिछले साल अंगूर की फसल कमजोर रहने से किशमिश की कीमतें पहले ही बढ़ी हुई थीं, जो अब तक बरकरार हैं। किशमिश: 250 रुपए से बढ़कर 500–600 रुपए किलो हो गया है, वहीं हरी किशमिश: 500 से बढ़कर 700–800 रुपए किलो काजू (थोक): 700–1700 रुपए और काजू (चिल्हर): 800–2000 रुपए बिक रही है।
 
आगे क्या होगा?

यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबा चलता है, तो ड्राई फ्रूट्स की सप्लाई और प्रभावित हो सकती है। इससे न केवल कीमतें और बढ़ेंगी, बल्कि बाजार में कुछ उत्पादों की कमी भी देखने को मिल सकती है। ईरान-इजरायल युद्ध का असर अब सीधे आम लोगों की रसोई तक पहुंच चुका है। ड्राई फ्रूट्स जैसे रोजमर्रा के इस्तेमाल के सामान महंगे होने से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ना तय है। आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है, यदि आयात जल्द सामान्य नहीं हुआ।


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