रायपुर। भारतमाला परियोजना से जुड़े कथित मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 12.78 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां अटैच की हैं। इस कार्रवाई के साथ ही मामले में अब तक 36.14 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं। अटैच की गई संपत्तियों में 4.69 करोड़ रुपये के शेयर और म्यूचुअल फंड निवेश भी शामिल हैं। ईडी ने इस मामले में जय प्रकाश गांधी समेत 13 अन्य आरोपियों के खिलाफ विशेष पीएमएलए न्यायालय में सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (अतिरिक्त अभियोजन शिकायत) भी दाखिल की है। एजेंसी का आरोप है कि परियोजना के मुआवजे में अनियमितताओं के जरिए अवैध संपत्ति अर्जित कर उसे विभिन्न वित्तीय निवेशों में लगाया गया।
ईओडब्ल्यू-एसीबी की एफआईआर के आधार पर शुरू हुई जांच
ईडी की जांच की शुरुआत आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर हुई थी। यह मामला अभनपुर के तत्कालीन एसडीओ निर्भय साहू और अन्य आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत दर्ज किया गया था। बाद में इस प्रकरण में विशेष न्यायालय में चार्जशीट भी प्रस्तुत की गई।
पहले भी हुई थी बड़ी जब्ती
जांच के दौरान ईडी ने 29 दिसंबर 2025 और 27 अप्रैल 2026 को कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान 49 लाख रुपये नकद, जिनका कोई वैध हिसाब नहीं मिला, और करीब 37.133 किलोग्राम चांदी बरामद की गई थी, जिसकी अनुमानित कीमत 89.80 लाख रुपये थी। इसके अलावा जमीन कारोबारियों के सिंडिकेट से जुड़ी 23.35 करोड़ रुपये की संपत्तियां भी अस्थायी रूप से अटैच की गई थीं। नई कार्रवाई के बाद कुल अटैच संपत्ति का मूल्य 36.14 करोड़ रुपये हो गया है।
जमीन के छोटे-छोटे टुकड़े कर बढ़ाया गया मुआवजा
जांच एजेंसी के मुताबिक, परियोजना की अधिसूचना जारी होने के बाद कुछ जमीन मालिकों, बिचौलियों और राजस्व अधिकारियों ने कथित साजिश के तहत जमीनों की खरीद-फरोख्त की। बाद में अधिक मुआवजा प्राप्त करने के लिए जमीन को कई छोटे हिस्सों में विभाजित किया गया। इस प्रक्रिया में परिवार के सदस्यों के नाम पर सेल डीड और गिफ्ट डीड के जरिए जमीन का हस्तांतरण भी किया गया, जिससे मुआवजे की राशि कई गुना बढ़ गई।
56.76 लाख की जमीन पर मिला 9.83 करोड़ का मुआवजा
ईडी की जांच में सामने आया कि जय प्रकाश गांधी और उनके परिवार को लगभग 56.76 लाख रुपये मूल्य की जमीन के बदले 9.83 करोड़ रुपये का मुआवजा प्राप्त हुआ। जांच एजेंसी का दावा है कि इस राशि को बाद में कई चरणों में घुमाकर अचल संपत्तियों, शेयर, म्यूचुअल फंड और अन्य निवेश साधनों में लगाया गया।
फर्जी रिकॉर्ड से भी लिया गया करोड़ों का मुआवजा
जांच में यह भी सामने आया कि गांव नायकबंधा की विभिन्न खसरा नंबर वाली जमीनों के लिए अन्य लोगों को भी इसी प्रकार कथित रूप से अधिक मुआवजा मिला। वहीं, उमा तिवारी पर आरोप है कि उन्होंने एक दिवंगत भूमि स्वामी की बेटी को गोद ली हुई बेटी दर्शाने के लिए कथित रूप से फर्जी राजस्व दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और गांव उगेतारा की जमीन के बदले करीब 2.13 करोड़ रुपये का मुआवजा हासिल किया।
जांच जारी
प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि मामले में धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के पहलुओं की जांच अभी जारी है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि अवैध रूप से प्राप्त राशि को किन-किन माध्यमों से निवेश किया गया और इसमें किन अन्य लोगों की भूमिका रही।