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5 करोड़ की स्वर्ण रामचरितमानस गायब? ट्रस्ट की जांच में सामने आई पूरी सच्चाई

5 करोड़ की स्वर्ण रामचरितमानस गायब? ट्रस्ट की जांच में सामने आई पूरी सच्चाई

अयोध्या। राम जन्मभूमि मंदिर में दान की गई करीब 5 करोड़ रुपये मूल्य की स्वर्ण रामचरितमानस को लेकर उठे विवाद पर अब स्थिति साफ हो गई है। पिछले कुछ दिनों से यह दावा किया जा रहा था कि मंदिर को भेंट की गई यह दुर्लभ ग्रंथ लापता हो गई है। मामला सामने आने के बाद मंदिर ट्रस्ट और प्रशासन ने तत्काल जांच शुरू की। जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट किया गया कि स्वर्ण रामचरितमानस कहीं गायब नहीं हुई है, बल्कि राम मंदिर परिसर में सुरक्षित रखी गई है। अफवाहों पर विराम लगाने के लिए ट्रस्ट ने इसकी तस्वीरें भी सार्वजनिक की हैं।

पूर्व गृह सचिव के आरोपों के बाद बढ़ा विवाद

यह मामला तब सुर्खियों में आया जब देश के पूर्व केंद्रीय गृह सचिव एस. लक्ष्मी नारायण ने आरोप लगाया कि उनके परिवार की ओर से रामलला को समर्पित की गई स्वर्ण रामचरितमानस का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया। उन्होंने दावा किया कि इतनी बड़ी भेंट देने के बावजूद उन्हें आधिकारिक रसीद नहीं मिली और बाद में ग्रंथ के संबंध में कोई जानकारी भी साझा नहीं की गई।

उन्होंने यह भी कहा कि यह पवित्र ग्रंथ उन्होंने स्वयं राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को सौंपा था। उनके अनुसार इस विशेष ग्रंथ को तैयार करने के लिए उनकी दिवंगत मां और पत्नी के सोने के आभूषणों का उपयोग किया गया था, जिससे यह उनके परिवार के लिए आस्था और भावनाओं से जुड़ी अमूल्य धरोहर बन गई।

जांच में सुरक्षित मिली स्वर्ण रामचरितमानस

आरोपों के बाद मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय प्रशासन ने पूरे मामले की जांच की। जांच में पता चला कि स्वर्ण रामचरितमानस मंदिर परिसर में सुरक्षित संरक्षित है और उसके गायब होने की खबरें निराधार हैं। ट्रस्ट ने विवाद खत्म करने के उद्देश्य से ग्रंथ की नवीनतम तस्वीरें भी जारी कीं और लोगों से अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील की।

155 किलो वजनी इस ग्रंथ की खासियतें हैं अनोखी

स्वर्ण रामचरितमानस अपनी भव्यता और निर्माण शैली के कारण बेहद खास मानी जाती है। इसे तैयार करने में लगभग 4 किलोग्राम शुद्ध 24 कैरेट सोने का उपयोग किया गया है। ग्रंथ के 1,000 पन्नों पर सोने की परत चढ़ाई गई है, जबकि प्रत्येक पृष्ठ को मजबूत बनाने के लिए लगभग 151 किलोग्राम तांबे का इस्तेमाल किया गया। इस कारण पूरे ग्रंथ का वजन करीब 155 किलोग्राम है।

दान और सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल

इस विवाद ने एक बार फिर मंदिर में मिलने वाले बहुमूल्य दान के रिकॉर्ड, संरक्षण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर दी है। हालांकि ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि स्वर्ण रामचरितमानस पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन इस घटना के बाद दान की गई मूल्यवान वस्तुओं के दस्तावेजीकरण और पारदर्शिता को लेकर सवाल जरूर उठे हैं।


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