अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्र और काउंटिंग रूम से कथित रूप से चढ़ावे की राशि में अनियमितता के मामले में जांच तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की जांच में ऐसे वित्तीय दस्तावेज सामने आए हैं, जिनसे संकेत मिले हैं कि लंबे समय से दान राशि के हिसाब-किताब में गंभीर गड़बड़ियां हो रही थीं। जांच एजेंसियां अब पूरे मामले की वित्तीय परतें खंगाल रही हैं।
बैंक रिकॉर्ड से बढ़ा संदेह
जांच के दौरान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब नेशनल बैंक से प्राप्त दैनिक जमा राशि के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। एसआईटी के अनुसार, चोरी के मामले के सामने आने से पहले मंदिर ट्रस्ट के खातों में प्रतिदिन औसतन 16 से 18 लाख रुपये जमा हो रहे थे। वहीं, आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद यही राशि बढ़कर लगभग 24 से 26 लाख रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गई। जांच एजेंसियां इस अंतर को महत्वपूर्ण सुराग मानकर इसकी विस्तृत पड़ताल कर रही हैं।
रोजाना लाखों रुपये की कथित हेराफेरी की आशंका
जांच अधिकारियों का मानना है कि श्रद्धालुओं की संख्या में कोई बड़ा बदलाव नहीं होने के बावजूद दान राशि में अचानक हुई बढ़ोतरी कई सवाल खड़े करती है। प्रारंभिक जांच के आधार पर आशंका जताई जा रही है कि प्रतिदिन बड़ी रकम का हिसाब रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो रहा था। हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
बैंक अधिकारियों से भी हुई पूछताछ
मामले की तह तक पहुंचने के लिए एसआईटी ने नकदी गिनने की प्रक्रिया से जुड़े बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों से भी पूछताछ की है। जांच टीम ने सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन, नकदी गणना की प्रक्रिया और संभावित अनियमितताओं की जानकारी मांगी। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि यदि किसी स्तर पर संदेह था तो उसकी सूचना समय पर क्यों नहीं दी गई।
पुरानी ऑडिट रिपोर्ट की भी होगी जांच
एसआईटी अब मंदिर ट्रस्ट की पुरानी ऑडिट रिपोर्ट का भी दोबारा परीक्षण कराने की संभावना पर विचार कर रही है। जांच एजेंसियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं पिछले वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड में भी कोई अनियमितता तो नहीं हुई। मामले की जांच जारी है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।