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MP में बढ़ी मरीजों की परेशानी, हड़ताल पर गए 8 हजार डॉक्टर्स, स्वास्थ्य मंत्री ने कहा - जल्द समस्या का समाधान होगा

MP में बढ़ी मरीजों की परेशानी, हड़ताल पर गए 8 हजार डॉक्टर्स, स्वास्थ्य मंत्री ने कहा - जल्द समस्या का समाधान होगा

भोपाल : मध्य प्रदेश में आज करीब 8 हजार जूनियर डॉक्टर्स काम बंद हड़ताल पर चले गए है। जिसकी वजह से प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह से चरमरा गई है। डॉक्टर्स स्टाइपेंड में वृद्धि और लंबित एरियर के भुगतान को लेकर यह आंदोलन कर रहे है। उनका कहना है कि अगर सरकार जल्द उनकी मांगों को पूरा नहीं करेंगे। तो विरोध और तेज किया जाएगा।

डाक्टरों से निवेदन हड़ताल बंद कर काम पर जाए- राजेंद्र शुक्ल

इधर, जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल को लेकर स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि मेरी उनसे फ़ोन पर बात हुई है, उनकी समस्या का समाधान जल्द होगा। मेरी  जुनियर डाक्टरों से निवेदन है कि हड़ताल बंद कर काम पर जाए। स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने हड़ताल को लेकर आगे कहा कि मामला कोर्ट में है लिहाजा उस पर कुछ भी कहना ठीक नहीं है। इसके पहले हाई कोर्ट ने डॉक्टरों की हड़ताल को असंवैधानिक बता चुके है। 

ओपीडी में सेवाएं बंद

इधर, हड़ताल को लेकर जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (JDA) का कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं तब तक वे ओपीडी में सेवाएं नहीं देंगे।इसी के चलते मांगों को लेकर रेजिडेंट डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न पिछले तीन दिनों से काली पट्टी बांधकर विरोध जता रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।

हर्निया, रॉड इंप्लांट जैसे सामान्य ऑपरेशन टले

JDA ने यह भी साफ किया कि ऑपरेशन थिएटर (OT) में भी सिर्फ अति गंभीर मरीज होने पर ही सेवा देंगे। यानी प्रदेशभर के मेडिकल कॉलेजों में हर्निया, रॉड इंप्लांट जैसे सामान्य ऑपरेशन टल सकते हैं। इसका सीधा असर इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों पर पड़ेगा।

संशोधित स्टाइपेंड लागू करने की मांग

हड़ताल को लेकर JDA से जुड़े डॉ. ब्रिजेंद्र ने बताया कि मध्य प्रदेश शासन के 7 जून 2021 के आदेश के अनुसार CPI आधारित स्टाइपेंड संशोधन 1 अप्रैल 2025 से लागू होना था। इसके बावजूद अब तक न तो संशोधित स्टाइपेंड लागू किया गया है और न ही अप्रैल 2025 से देय एरियर का भुगतान किया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि इस संबंध में कई बार शासन और संबंधित विभागों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। जिसके चलते उन्हें ये कदम उठाना पड़ा। 
 

 


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